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COMPENSATION Case: पति करोड़पति, फिर भी पत्नी को 5 लाख मुआवजा; कोर्ट ने बढ़ाकर किया 1 करोड़

COMPENSATION Case: मुंबई की एक सेशंस कोर्ट ने घरेलू हिंसा की शिकार एक महिला को दिए गए मुआवजे की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दी है।

बेटी को मिलने वाला मासिक भत्ता भी बढ़ाया

डिंडोशी कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. जे. अंसारी ने यह फैसला मई में सुनाया। उन्होंने कहा कि 5 लाख रुपए का मुआवजा उस महिला के लिए बहुत कम है, जिसने 20 साल तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेली है। कोर्ट ने कहा कि महिला का पति करोड़पति है और पैसे की कोई कमी नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने महिला और उसकी बेटी को मिलने वाला मासिक भत्ता भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया।

दिसंबर 1997 में शादी के बाद से ही प्रताड़ना का आरोप

महिला ने 2020 में मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे 5 लाख रुपए मुआवजा दिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि दिसंबर 1997 में शादी के बाद से ही उसे पति और ससुराल वालों ने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया। कोर्ट ने माना कि महिला को 20 साल की शादी में मारपीट, ताने और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। जब हालात बर्दाश्त से बाहर हो गए, तब उसने कोर्ट का सहारा लिया।

पति ने कहा- मेरी हालत खराब, लेकिन कोर्ट ने नहीं माना

महिला के पति ने कोर्ट में दावा किया कि उसकी आर्थिक स्थिति खराब है और वह पत्नी को कोई मुआवजा देने की स्थिति में नहीं है। उसने कहा कि वह खुद और अपने जुड़वां बेटों का खर्च उठा रहा है, जिसमें किराया और पढ़ाई का खर्च शामिल है। हालांकि कोर्ट ने पति की दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि पति और उसके पिता ने 2012 में 1 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति खरीदी थी। वह आज भी एक लिफ्ट कंपनी चला रहा है, जिससे साफ है कि वह आर्थिक रूप से सक्षम है।


मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा जरूरी: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से साफ है कि पति और उसका परिवार करोड़पति हैं। ऐसे में 5 लाख रुपए का मुआवजा बहुत कम है। महिला को 20 साल तक जो शोषण, अपमान और आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी, उसके लिए मुआवजे की राशि में बड़ा इजाफा जरूरी है।

बेटों से भी अलग कर दिया गया

कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को अब अपने दोनों बेटों से भी अलग रहना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि पति ने बेटों को मां के खिलाफ भड़का दिया है। यह भी एक तरह की मानसिक प्रताड़ना है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद मुआवजे और मासिक भत्ते दोनों में बढ़ोतरी की।

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