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Bombay HC: क्या डीजीपी के सर्कुलर सिर्फ दिखावे के लिए हैं?बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से पूछा

Bombay HC: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से सवाल उठाया है कि क्या राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा जारी किए गए सर्कुलर सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या पूरे पुलिस बल पर वास्तव में लागू होते हैं।

सर्कुलर का पालन क्यों नहीं हो रहा

अनुशासन की कमी पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मी न तो कानून का पालन कर रहे हैं और न ही डीजीपी के निर्देशों का। न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और राजेश पाटिल की खंडपीठ ने 7 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि केस डायरी को लेकर डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर का पालन न करना “अविवेकपूर्ण और अक्षम्य” है। कोर्ट ने डीजीपी से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके कार्यालय से जारी सर्कुलर का पालन क्यों नहीं हो रहा।

पुलिस की लापरवाही पर सुनवाई की

कोर्ट एक आर्थिक अपराध की जांच में पुलिस की लापरवाही पर सुनवाई कर रही थी। केस डायरी देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि यह दस्तावेज “पीले रंग की प्लास्टिक फाइल में ढीले पन्नों” जैसा है, जिसे बेहद लापरवाही से तैयार किया गया है।

केस डायरी सही तरीके से बनाए जाने के निर्देश दिए

डीजीपी ने पहले भी कई बार सर्कुलर जारी कर सभी पुलिसकर्मियों को सीआरपीसी की धारा 172 के तहत केस डायरी सही तरीके से बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि सभी पुलिसकर्मी कानून और डीजीपी के निर्देशों का पालन करें।

डीजीपी के निर्देश निचले स्तर तक नहीं पहुंच रहे

कोर्ट ने यह भी कहा कि डीजीपी के निर्देश निचले स्तर तक नहीं पहुंच रहे हैं और पुलिसकर्मी खुलेआम इनका उल्लंघन कर रहे हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, “ऐसा लगता है कि अनुशासित बल में खुद पुलिसकर्मी ही अनुशासन नहीं मान रहे।”कोर्ट ने कहा कि उसके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, इसलिए डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वे हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उनके द्वारा जारी सर्कुलर का पालन अधीनस्थ अधिकारी क्यों नहीं कर रहे। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या संसद द्वारा बनाए गए कानून पुलिसकर्मियों पर बाध्यकारी हैं या सिर्फ किताबों तक सीमित हैं।

जांच में गंभीर खामियां

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एफआईआर जून 2024 में दर्ज हुई थी, लेकिन अब तक जांच की बुनियादी प्रक्रिया जैसे पंचनामा तक नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध जैसे गंभीर मामले की जांच स्थानीय थाने के असिस्टेंट इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी कर रहा है, और उसकी कार्यशैली बेहद लापरवाह है।

ठाणे पुलिस कमिश्नर से भी मांगा जवाब

कोर्ट ने ठाणे पुलिस कमिश्नर को भी निर्देश दिया है कि वे इस मामले में हलफनामा दाखिल करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, तब तक डीजीपी और ठाणे पुलिस कमिश्नर दोनों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।

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