Sunday, September 20, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Young Advocate: युवा वकील तंगी के कारण वकालत न छोड़ें...जूनियर वकीलों को...

Young Advocate: युवा वकील तंगी के कारण वकालत न छोड़ें…जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड देने की मांग पर राज्य व बार काउंसिल से मांगा जवाब

Young Advocate: केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुबॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश (अगस्त 2026)
मामला/याचिका21 युवा अधिवक्ताओं द्वारा दायर याचिका (Stipend & Welfare Scheme for Junior Lawyers)
माननीय पीठबॉम्बे हाई कोर्ट (कोल्हापुर पीठ) – जस्टिस मिलिंद जाधव एवं जस्टिस नंदेश देशपांडे
संविधान के अनुच्छेदअनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) एवं अनुच्छेद 21 (जीवन व आजीविका का अधिकार)
BCI की सुझाई दरेंशहरी: ₹20,000/माह | ग्रामीण: ₹15,000/माह
अगली सुनवाई तिथि24 अगस्त 2026

Young Advocate: बॉम्बे हाई कोर्ट (कोल्हापुर पीठ) ने महाराष्ट्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) को सख्त निर्देश जारी करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में नए और जूनियर वकीलों को वित्तीय संकट से उबारने तथा उन्हें मासिक स्टाइपेंड (Stipend) देने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में क्या योजनाएं हैं।

जस्टिस मिलिंद एन. जाधव और जस्टिस नंदेश देशपांडे की खंडपीठ ने 21 युवा अधिवक्ताओं द्वारा दायर याचिका पर यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।

शुरुआती 2-3 साल उथल-पुथल भरे, युवाओं का टिकना जरूरी

अदालत ने युवा वकीलों की आर्थिक मजबूरी पर गहरी चिंता जताते हुए कहा,

हाई कोर्ट की टिप्पणी: “यह मामला निश्चित रूप से राज्य और संबंधित बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन आज के समय में इस पर ठोस कदम उठाना अनिवार्य है। सभी हितधारकों का यह परम कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि बार में शामिल होने वाले युवा वकील अपनी प्रैक्टिस के पहले दो या तीन वर्षों में अपने पैर जमा सकें, ताकि वे वित्तीय कठिनाइयों के कारण इस पेशे से दूर न हो जाएं।”

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के उस अवलोकन को भी रेखांकित किया जिसमें वकालत के शुरुआती दो-तीन वर्षों को ‘उथल-पुथल’ (Turmoil) का दौर कहा गया है, जिसकी वजह से कई प्रतिभाशाली और होनहार युवा वकील वकालत छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

Young Advocate: याचिकाकर्ताओं के प्रमुख तर्क और BCI का ‘कागजी शेर’ आदेश

  1. BCI सर्कुलर की अनदेखी (15 अक्टूबर 2024): याचिकाकर्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के 15 अक्टूबर 2024 के उस सर्कुलर का हवाला दिया, जिसमें वरिष्ठ वकीलों और लॉ फर्मों के अधीन काम करने वाले जूनियर वकीलों को शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम ₹20,000 प्रति माह और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹15,000 प्रति माह का स्टाइपेंड देने की सिफारिश की गई थी।
  2. केवल ‘कागजी शेर’ (Paper Tiger): वकीलों ने कोर्ट को बताया कि BCI की यह सिफारिश जमीनी स्तर पर बिना किसी सख्ती के केवल एक “कागजी शेर” बनी हुई है।
  3. मौजूदा वेलफेयर एक्ट अपर्याप्त: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हालांकि राज्य में ‘महाराष्ट्र एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट, 1981’ लागू है, लेकिन नए वकीलों की जरूरतों को पूरा करने में यह ढांचा काफी अपर्याप्त साबित हुआ है।
  4. अन्य राज्यों का उदाहरण: याचिका में झारखंड, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और पुडुचेरी जैसे राज्यों का उदाहरण दिया गया, जहाँ युवा वकीलों के लिए वित्तीय सहायता व स्टाइपेंड योजनाएं सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं।

हाई कोर्ट का निर्देश एवं अगली सुनवाई

  • पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता वकीलों ने संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत अपने अधिकारों का हवाला दिया है और युवा वकीलों के व्यापक हित में इस याचिका में पर्याप्त दम है।
  • कोर्ट ने राज्य सरकार और BCMG को 24 अगस्त 2026 की अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब/हलफनामा दाखिल करने का अंतिम आदेश दिया है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
27 ° C
27 °
27 °
94 %
0kmh
8 %
Sat
28 °
Sun
34 °
Mon
36 °
Tue
36 °
Wed
36 °

Recent Comments