Tuesday, September 29, 2026
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LAND ACQUISITION : भूमि अधिग्रहण में ‘भूमि के बदले भूमि’ नीति दुर्लभ मामलों में ही लागू हो…यह रहा सुप्रीम निर्देश

LAND ACQUISITION : सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ‘भूमि के बदले भूमि’ जैसी पुनर्वास नीतियों को लेकर सतर्क किया है।

हरियाणा सरकार की नीति की सराहना की

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ऐसी योजनाएं केवल दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में ही लागू की जानी चाहिए। कोर्ट ने हरियाणा सरकार की नीति को लेकर कहा कि यह मामला सभी राज्यों के लिए आंखें खोलने वाला है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार के हनन की दलील टिकाऊ नहीं है। कोर्ट ने यह टिप्पणी हरियाणा अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की। ये याचिकाएं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 2016 के फैसले के खिलाफ थीं, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा गया था जो विस्थापितों के पक्ष में था।

सभी मामलों में मुआवजे के अलावा पुनर्वास जरूरी नहीं

कोर्ट ने कहा कि सरकार को केवल मानवीयता, न्याय और समानता के आधार पर ही कोई लाभकारी योजना बनानी चाहिए। हरियाणा की नीति के तहत सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण होने पर विस्थापितों को वैकल्पिक भूखंड दिए जाते हैं, लेकिन कोर्ट ने इसे असामान्य और विवादों को जन्म देने वाली नीति बताया। कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों में मुआवजे के अलावा पुनर्वास जरूरी नहीं है। सरकार कई बार लोगों को खुश करने के लिए अनावश्यक योजनाएं बना देती है, जिससे बाद में कानूनी विवाद खड़े हो जाते हैं।

पुराना मामला, नई नीति लागू

यह विवाद 1990 के दशक में हरियाणा सरकार द्वारा की गई भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। उस समय मुआवजा तो दिया गया, लेकिन साथ ही 1992 की नीति के तहत पुनर्वास भूखंड देने का वादा भी किया गया था। हालांकि, विस्थापित तय प्रक्रिया के तहत आवेदन नहीं कर पाए और जरूरी राशि भी जमा नहीं की।

14 से 20 साल बाद दायर हुए मुकदमे

अधिकतर विस्थापितों ने भूमि अधिग्रहण के 14 से 20 साल बाद अदालत में याचिकाएं दायर कीं। ये याचिकाएं स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट की धारा 39 के तहत अनिवार्य आदेश की मांग को लेकर थीं। कोर्ट ने कहा कि इतनी देरी के बाद दायर मुकदमे तकनीकी रूप से स्वीकार्य नहीं हैं, लेकिन न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए 2016 की नीति का लाभ देने का फैसला किया गया।

2016 की नीति के तहत आवेदन का मौका

कोर्ट ने सभी उत्तरदाताओं (विस्थापितों) को 4 हफ्ते का समय दिया है कि वे 2016 की नीति के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करें और जरूरी राशि जमा करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम मौका होगा और समय सीमा के बाद कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।

अनपढ़ और ग्रामीणों को दी राहत

कोर्ट ने माना कि कुछ विस्थापित ग्रामीण और अशिक्षित हो सकते हैं, जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते। ऐसे लोगों को सक्षम अधिकारी को उचित आवेदन देकर और राशि जमा कर आवेदन करने की अनुमति दी गई है।

भूमि माफियाओं पर नजर रखने का आदेश

कोर्ट ने हरियाणा सरकार और HUDA को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि कोई भू-माफिया या असामाजिक तत्व भूखंड आवंटन का अनुचित लाभ न उठा सके।

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