Sunday, August 16, 2026
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Blanket ban on MBBS migration: मेडिकल छात्र माइग्रेशन…दिल्ली हाई कोर्ट ने नियम 18 को रद्द किया

Blanket ban on MBBS migration: दिल्ली हाई कोर्ट ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

ऐसा पूर्ण प्रतिबंध “मनमाना” और संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन: कोर्ट

अदालत ने ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन, 2023 के तहत एमबीबीएस (MBBS) छात्रों के माइग्रेशन पर लगे ‘पूर्ण प्रतिबंध’ को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा पूर्ण प्रतिबंध “मनमाना” और संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन है।

यह था मामला

  • यह याचिका साहिल अर्श नामक छात्र ने दायर की थी, जो 40% दृष्टिबाधित (Visually Impaired) है।
  • बाड़मेर की चुनौती: साहिल को मजबूरी में राजस्थान के बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना पड़ा था। वहां की भीषण गर्मी और धूल भरी जलवायु के कारण उसकी आंखों की स्थिति बिगड़ने लगी।
  • इलाज की जरूरत: उसे दिल्ली के एम्स (AIIMS) में निरंतर इलाज की आवश्यकता थी, जिसके आधार पर उसने दिल्ली माइग्रेशन की मांग की थी।
  • NMC का इनकार: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने दिसंबर 2024 में उसका अनुरोध यह कहकर ठुकरा दिया कि 2023 के नए नियमों में माइग्रेशन का प्रावधान ही खत्म कर दिया गया है।

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • चीफ जस्टिस और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने NMC के नियम 18 को खारिज करते हुए कई गंभीर बातें कहीं।
  • अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि किसी भी स्थिति में (चाहे वह कितनी भी गंभीर क्यों न हो) माइग्रेशन की अनुमति न देना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
  • दुरुपयोग का डर तर्कसंगत नहीं: केवल इस डर से कि नियम का दुरुपयोग हो सकता है, किसी नागरिक के जायज अधिकारों को नहीं छीना जा सकता। इसके लिए सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए, न कि पूर्ण प्रतिबंध।
  • दिव्यांग अधिकार (PwD Act): अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे दिव्यांगों को “उचित आवास” (Reasonable Accommodation) और भेदभाव मुक्त वातावरण प्रदान करें।
  • प्रशासनिक चूक: कोर्ट ने नोट किया कि साहिल को बाड़मेर का कॉलेज इसलिए मिला क्योंकि काउंसलिंग अधिकारियों ने समय पर उसकी PwD श्रेणी को मान्यता नहीं दी थी, जिससे उसे आखिरी राउंड में बचे-खुचे विकल्प चुनने पड़े। इसके लिए छात्र को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है।

अदालत का आदेश

  • नियम 18 रद्द: मेडिकल छात्रों के माइग्रेशन पर लगा पूरा प्रतिबंध अब कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
  • दोबारा विचार का निर्देश: हाई कोर्ट ने NMC को आदेश दिया है कि वह साहिल के माइग्रेशन अनुरोध पर दोबारा विचार करे और इसमें “दिव्यांगता अधिकारों” और “मानवीय गरिमा” को प्राथमिकता दे।
  • पॉलिसी बनाने के निर्देश: अधिकारियों को ऐसी नीति बनाने को कहा गया है जो विशेष परिस्थितियों में ट्रांसफर की अनुमति दे।
  • कोर्ट का संदेश: प्रशासनिक दक्षता के नाम पर नियामक उपाय (Regulatory Measures) मानवीय गरिमा और संवैधानिक सुरक्षा की अनदेखी नहीं कर सकते।
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