Wednesday, September 30, 2026
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RELIGIOUS IDENTITY: क्या अंतर-धार्मिक विवाह के बाद छीनी जा सकती है महिला की धार्मिक पहचान?…संवैधानिक चुनौती पर होगा विचार

RELIGIOUS IDENTITY: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक चुनौती पर विचार करने का निर्णय लिया है।

मामला धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों (Religious Personal Laws) के भीतर लैंगिक भेदभाव से जुड़ा है, मुख्य प्रश्न यह है कि क्या एक पारसी महिला द्वारा किसी गैर-पारसी से विवाह करने पर उसकी धार्मिक पहचान और अधिकार खत्म किए जा सकते हैं? मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दीना बुधराजा द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और चैरिटी कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने ‘नागपुर पारसी पंचायत’ के संविधान के नियम 5(2) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।

विवाद की जड़: नागपुर पारसी पंचायत का नियम 5(2)

  • आरोप: यह नियम प्रावधान करता है कि यदि कोई पारसी महिला किसी गैर-पारसी से शादी करती है, तो उसकी धार्मिक पहचान छीन ली जाती है और उसे अग्यारी (अग्नि मंदिर) जैसे धार्मिक स्थलों में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है।
  • भेदभाव: याचिका में कहा गया है कि यह नियम केवल महिलाओं पर लागू होता है। यदि कोई पारसी पुरुष समुदाय के बाहर शादी करता है, तो उस पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई जाती।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

  • अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि यह नियम भारतीय संविधान के निम्नलिखित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
  • अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता (लैंगिक आधार पर भेदभाव)।
  • अनुच्छेद 21: जीवन और गरिमा का अधिकार।
  • अनुच्छेद 25: धर्म की स्वतंत्रता (अपनी पसंद के धर्म को मानने और पालन करने का अधिकार)।

जियो पारसी जैसी योजनाएं सरकार की ओर से चलाई जा रही

समुदाय की घटती आबादी को देखते हुए ‘जियो पारसी’ (Jiyo Parsi) जैसी सरकारी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन कड़े धार्मिक नियमों के कारण पहचान खोने का डर इस समस्या को और जटिल बनाता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल पारसी महिलाओं के लिए, बल्कि भारत में व्यक्तिगत कानूनों और संवैधानिक अधिकारों के बीच के संतुलन को समझने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने नोट किया कि कानून का यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसी तरह की एक अन्य याचिका भी लंबित है। कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

सांख्यिकीय संदर्भ: भारत में पारसी समुदाय (Parsi Community in India)

पारसी समुदाय भारत के सबसे छोटे अल्पसंख्यक समूहों में से एक है। 2011 की जनगणना और हाल के अध्ययनों के अनुसार इस समूह की स्थिति इस प्रकार है।

विवरण सांख्यिकीय आंकड़े (लगभग)

कुल जनसंख्या (भारत) 57,264 (2011 जनगणना के अनुसार)
लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 1,050 महिलाएं (समुदाय में महिलाओं की संख्या अधिक है)
साक्षरता दर 98% (भारत में सबसे अधिक शिक्षित समुदायों में से एक)
प्रजनन दर (TFR) ~0.8 (जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से बहुत कम है)
अंतर-धार्मिक विवाह समुदाय में होने वाले लगभग 30-35% विवाह अब समुदाय से बाहर हो रहे हैं।

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