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Arms Act Ruling: सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो डालना अपराध नहीं है…इरादा भी देखा जाए, पूरा केस पढ़ें

Arms Act Ruling: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आर्म्स एक्ट (Arms Act) के तहत दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की बेंच ने हरियाणा के राजनीतिक व्यक्ति बजरंग दास और उनके बेटे के खिलाफ पंचकूला के सेक्टर-5 थाने में दर्ज एफआईआर (2019) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह मामला कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ केवल फोटो खिंचवाना या उन्हें पोस्ट करना, बिना किसी अवैध इरादे या कब्जे के, आपराधिक अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

मामला क्या था? (The Facebook Photos)

  • घटना: अप्रैल 2019 में विकास नाम के एक व्यक्ति (जो बजरंग दास का ड्राइवर था) ने फेसबुक पर कुछ लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ फोटो पोस्ट किए थे।
  • पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने विकास के साथ-साथ हथियारों के मालिकों (बजरंग दास और उनके बेटे) के खिलाफ भी आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 29 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
  • दलील: याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और उनके पास हथियारों के वैध लाइसेंस मौजूद हैं।

कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष: फोटो बनाम कानून

  • हाई कोर्ट ने जांच में पाया कि आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का कोई ठोस आधार नहीं है:
  • वैध कब्जा: चूंकि हथियार लाइसेंसी थे, इसलिए धारा 25 (अवैध कब्जा) का सवाल ही नहीं उठता।
  • हथियार सौंपना (Section 29): कोर्ट ने नोट किया कि फोटो तब खींचे गए थे जब हथियार घर में रखे हुए थे। ड्राइवर को हथियार सौंपने (Delivery) का कोई सबूत नहीं मिला। केवल फोटो के लिए हथियार हाथ में लेना अवैध हस्तांतरण नहीं है।
  • इरादे की कमी (No Mens Rea): “ऐसी कोई सामग्री नहीं है जिससे यह साबित हो कि हथियार किसी अवैध कार्य को अंजाम देने के इरादे से दिए गए थे।”

कानूनी मिसाल: भजन लाल केस का हवाला

  • कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम भजन लाल’ का हवाला दिया।
  • यदि एफआईआर में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कोई अपराध नहीं दर्शाते या वे पूरी तरह से असंभव लगते हैं, तो ऐसी एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।
  • कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि फोटो में कई अन्य हथियार भी दिख रहे थे, लेकिन पुलिस ने केवल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की, जो जांच में भेदभाव को दर्शाता है।

कोर्ट का अंतिम आदेश

हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उनके साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने एफआईआर नंबर 126 (थाना सेक्टर-5, पंचकूला) को बजरंग दास और उनके बेटे के संबंध में क्वाश (Quash) कर दिया।

यह रहा अदालत का निष्कर्ष: सोशल मीडिया और जिम्मेदारी

यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून केवल दिखावे के आधार पर किसी को अपराधी नहीं बना सकता जब तक कि कोई वास्तविक अवैध कृत्य न हुआ हो। हालांकि, यह जिम्मेदार नागरिकों के लिए एक सीख भी है कि लाइसेंसी हथियारों का प्रदर्शन सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर करने से अनावश्यक कानूनी पेचीदगियां पैदा हो सकती हैं।

In the Court of Punjab & Haryana
Coram: Surya Partap Singh J.
CRM-M-30985-2021
Bajrang Dass & Anr. vs State of Haryana & Anr.

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