Friday, October 2, 2026
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AI Deepfake Row: डिजिटल दुनिया में आवाज-चेहरा आपकी अपनी संपत्ति है…आध्यात्मिक गुरु के नाम पर फर्जी प्रवचन पर दिया आदेश

AI Deepfake Row: दिल्ली हाई कोर्ट ने उभरती हुई AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

डीपफेक (Deepfake) वीडियो और कंटेंट पर रोक लगाई

हाईकोर्ट के जस्टिस तुषार राव गेडला ने डॉ. अनिरुद्ध जोशी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा (Ex-parte Ad-interim Injunction) जारी की है। कोर्ट ने माना कि AI का उपयोग करके किसी की पहचान के साथ खिलवाड़ करना ‘अपूरणीय क्षति’ है। कोर्ट ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु डॉ. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी, जिन्हें उनके अनुयायी ‘अनिरुद्ध बापू’ के नाम से जानते हैं, के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की रक्षा करते हुए उनके डीपफेक (Deepfake) वीडियो और कंटेंट पर रोक लगा दी है।

मामला क्या था? (The Digital Impersonation)

  • फर्जी कंटेंट: अज्ञात व्यक्तियों (John Does) ने आधुनिक AI टूल्स का उपयोग करके अनिरुद्ध बापू के नकली वीडियो, इमेज और वॉयस-क्लोन (Voice-cloned) कंटेंट बनाया था।
  • भ्रामक प्रचार: इन डीपफेक वीडियो में उन्हें फर्जी प्रवचन देते, उत्पादों (Products) का प्रचार करते और अनुयायियों के साथ बातचीत करते दिखाया गया था।
  • सोशल मीडिया का प्रभाव: ये वीडियो YouTube, Instagram, Facebook और X पर वायरल हो रहे थे, जिससे आम जनता को लगा कि ये असली हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन”

  • हाई कोर्ट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं को रेखांकित किया।
  • साख को खतरा: कोर्ट ने कहा कि दशकों की आध्यात्मिक शिक्षाओं से बनी गुरु की प्रतिष्ठा और विश्वास को ये फर्जी वीडियो कमजोर कर रहे हैं।
  • पर्सनैलिटी राइट्स: किसी व्यक्ति के नाम, आवाज, छवि और व्यवहार के तरीकों (Mannerisms) का बिना अनुमति उपयोग करना उनके व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन है।
  • तकनीक का दुरुपयोग: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक लाभ या किसी को गुमराह करने के लिए AI जैसी तकनीक के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती।

हाई कोर्ट के कड़े निर्देश (The Court’s Order)

  • अदालत ने तकनीकी दिग्गजों और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।
  • रोक (Restraint): प्रतिवादियों को अनिरुद्ध बापू की पहचान, आवाज या शैली का किसी भी माध्यम (AI सहित) में उपयोग करने से रोक दिया गया है।
  • टेकडाउन (Takedown): Google (YouTube), Meta (Facebook/Instagram) और X को आदेश दिया गया है कि वे शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर ऐसे सभी आपत्तिजनक कंटेंट को हटाएं।
  • पहचान उजागर करना: इन प्लेटफॉर्म्स को उन अकाउंट्स की जानकारी भी देनी होगी जिन्होंने ये वीडियो अपलोड किए हैं।

संदर्भ: अनिरुद्धाचार्य महाराज जैसे ही प्रभावशाली

कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ता का प्रभाव अनिरुद्धाचार्य महाराज (वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक) जैसे लोकप्रिय व्यक्तित्वों के समान है, जिनकी बड़ी डिजिटल मौजूदगी है और जिनके नाम पर जनता को आसानी से गुमराह किया जा सकता है।

निष्कर्ष: डिजिटल युग में ‘पहचान’ की सुरक्षा

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला एक नजीर (Precedent) बनेगा। यह संदेश देता है कि डिजिटल दुनिया में आपकी ‘आवाज’ और ‘चेहरा’ आपकी अपनी संपत्ति है, और AI के दौर में कानून इनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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