Monday, August 31, 2026
HomeLatest NewsAadhaar Correction: छोटी सुधार के लिए कोर्ट क्यों आएं लोग?… यूं लगाई...

Aadhaar Correction: छोटी सुधार के लिए कोर्ट क्यों आएं लोग?… यूं लगाई आधार सुधार में देरी पर UIDAI को फटकार

Aadhaar Correction: पटना हाई कोर्ट ने आधार कार्ड में जन्म तिथि (DOB) सुधार में होने वाली देरी पर सख्त नाराजगी जताई है।

प्रशांत रजक बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के जस्टिस अजित कुमार ने कहा कि आधार कार्ड में सुधार की प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं होनी चाहिए कि लोगों को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े। कोर्ट ने UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) को फटकार लगाते हुए कहा कि नागरिकों को ऐसी छोटी प्रशासनिक गलतियों के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने चाहिए।

मामला क्या था? (The DOB Mismatch)

  • याचिकाकर्ता: नवादा जिले के रहने वाले प्रशांत रजक।
  • विवाद: उनके आधार कार्ड में जन्म तिथि 24 जुलाई 2008 दर्ज थी, जबकि उनके मैट्रिक सर्टिफिकेट (Matriculation Certificate) के अनुसार सही तारीख 24 जुलाई 2007 थी।
  • प्रशासनिक ढिलाई: बार-बार आवेदन करने के बावजूद अधिकारियों ने सुधार नहीं किया, जिसके बाद उन्हें रिट याचिका दायर करनी पड़ी।

कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “दयनीय स्थिति”

  • सुनवाई के दौरान जस्टिस अजित कुमार ने सिस्टम की खामियों पर कड़े सवाल उठाए।
  • सॉरी स्टेट ऑफ अफेयर्स: “अदालत बहुत ही दयनीय स्थिति देख रही है… आवेदकों को जन्म तिथि में सुधार के लिए इस कोर्ट के दरवाजे खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
  • गैर-जरूरी मुकदमेबाजी: कोर्ट ने कहा कि जब वैधानिक दस्तावेज (Statutory Documents) उपलब्ध हों, तो अधिकारियों को बिना किसी देरी के सुधार करना चाहिए। यह अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा देता है।

UIDAI को निर्देश (The Court’s Direction)

  • अदालत ने इस मामले का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए निर्देश दिया।
  • एक सप्ताह का समय: याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, पटना के निदेशक के पास जाने को कहा गया है।
  • त्वरित कार्रवाई: अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) करें और आधार डेटाबेस में तुरंत आवश्यक सुधार करें।
  • भविष्य के लिए चेतावनी: कोर्ट ने उम्मीद जताई कि UIDAI पटना अपने अधिकारियों को उचित निर्देश जारी करेगा ताकि भविष्य में आम नागरिकों को ऐसी छोटी समस्याओं के लिए परेशान न होना पड़े।

केंद्र सरकार का पक्ष

भारत संघ के वकील ने आश्वासन दिया कि यदि याचिकाकर्ता आवश्यक दस्तावेजों के साथ क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होते हैं, तो वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार सुधार की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।

निष्कर्ष: सरकारी सेवाओं में जवाबदेही की जरूरत

पटना हाई कोर्ट का यह रुख उन लाखों लोगों के लिए राहत भरा है जो आधार या अन्य सरकारी पहचान पत्रों में छोटी-मोटी गलतियों को ठीक करवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘प्रशासनिक सुधार’ प्रशासन का काम है, न कि न्यायपालिका का समय बर्बाद करने का जरिया।

IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA
Civil Writ Jurisdiction Case No.2736 of 2026
CORAM: HONOURABLE MR. JUSTICE AJIT KUMAR
Prashant Rajak Versus
The Union of India through the Secretary, Ministry of Electronics and
Information Technology, The Secretary, Ministry of Electronics and Information Technology,
The Unique Identification Authority of India (UIDAI) Through its Chief Executive Officer, The Chief Executive Officer, Unique Identification Authority of India (UIDAI), The Director, UIDAI Regional Office

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
30 ° C
30 °
30 °
84 %
3.1kmh
100 %
Mon
30 °
Tue
32 °
Wed
26 °
Thu
28 °
Fri
31 °

Recent Comments