Thursday, October 15, 2026
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RTE Ruling: शिक्षा का हक है, पर स्कूल चुनने की आजादी नहीं…क्यूं कहा-EWS कोटा का मतलब मनमर्जी का स्कूल नहीं

RTE Ruling: दिल्ली हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (RTE) को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने एक मां की अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि RTE एक्ट का उद्देश्य सामाजिक समावेश (Social Inclusion) है, न कि किसी विशेष निजी संस्थान में सीट सुनिश्चित करना। अदालत ने फैसला सुनाया है कि भले ही हर बच्चे को शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपनी पसंद के किसी खास स्कूल में दाखिले का दावा कर सकता है।

मामला क्या था? (The Admission Dispute)

  • पृष्ठभूमि: एक महिला ने अपने बच्चे के लिए 2023-24 सत्र में एक निजी स्कूल में EWS कैटेगरी के तहत कक्षा 1 में दाखिला मांगा था।
  • विवाद: ड्रा में नाम आने के बावजूद स्कूल ने दाखिला नहीं दिया। मामला कोर्ट पहुंचा, लेकिन तब तक शैक्षणिक सत्र (Academic Year) खत्म हो गया।
  • अपील: महिला ने मांग की कि उसके बच्चे को अब अगले सत्र (2024-25) में उसी स्कूल की कक्षा 2 में सीधा दाखिला दिया जाए।

कोर्ट का तर्क: समय बीतने के साथ अधिकार खत्म

  • अदालत ने अपील को खारिज करने के लिए निम्नलिखित कानूनी आधार बताए।
  • सत्र की समाप्ति: कोर्ट ने कहा कि यदि सत्र के दौरान कोई अंतरिम आदेश (Interim Order) या सीट रिजर्व नहीं की गई है, तो सत्र खत्म होते ही उस विशेष स्कूल में दाखिले का अधिकार भी ‘perish’ (समाप्त) हो जाता है।
  • विकल्प की उपलब्धता: जब निजी स्कूल ने मना किया, तो शिक्षा निदेशालय (DoE) ने बच्चे को दूसरे पसंदीदा स्कूल में सीट ऑफर की थी, जिसे मां ने ठुकरा दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ‘नगर निगम स्कूल’ (Municipal School) का विकल्प भी दिया गया, जिसे भी परिवार ने नहीं माना।

RTE एक्ट का असली उद्देश्य

  • अदालत ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) की व्याख्या की।
  • सामाजिक समानता: यह कानून इसलिए बनाया गया है ताकि स्कूल एक ऐसी साझा जगह बनें जहाँ जाति, वर्ग या जातीय बाधाएं न हों।
  • सीमाएं: “शिक्षा के अधिकार को किसी विशेष स्कूल को चुनने के अधिकार के रूप में अनुवादित नहीं किया जा सकता।”

आंकड़ों में EWS दाखिले (Delhi EWS Admissions Stats)

दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह (DG) के लिए निजी स्कूलों में सीटों का गणित कुछ इस प्रकार है

विवरणसांख्यिकी (अनुमानित)
निजी स्कूलों में EWS/DG कोटा25% सीटें
सालाना आवेदन (दिल्ली)~2,00,000 से अधिक
उपलब्ध सीटें~35,000 से 40,000
चयन प्रक्रियाकम्प्यूटरीकृत ड्रा (Computerized Draw)

निष्कर्ष: सिस्टम बनाम जिद

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि सरकार और प्रशासन का कर्तव्य बच्चे को ‘शिक्षा उपलब्ध कराना’ है। यदि प्रशासन किसी अन्य अच्छे स्कूल में दाखिला दे रहा है, तो अभिभावक केवल एक विशेष निजी स्कूल की जिद पर अड़े रहकर शिक्षा के अधिकार का हवाला नहीं दे सकते।

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