Police Promotion Row: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग में आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (Out-of-turn Promotion) को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।
हाईकोर्ट जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी ने कांस्टेबल शालीग्राम दुबे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2002 के एक एंटी-नक्सल ऑपरेशन के आधार पर पदोन्नति की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन कोई ‘अधिकार’ नहीं बल्कि एक ‘पुरस्कार’ है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी जोखिम भरे ऑपरेशन वाली टीम का हिस्सा होना प्रमोशन का आधार नहीं हो सकता; इसके लिए असाधारण वीरता (Exceptional Bravery) का व्यक्तिगत प्रमाण होना अनिवार्य है।
मामला क्या था? (The 2002 Operation)
- घटना: अक्टूबर 2002 में नक्सलियों ने मालाजखंड कॉपर माइन्स जा रहे एक ट्रक से लगभग 8 टन डायनामाइट लूट लिया था।
- पुलिस कार्रवाई: पुलिस की एक बड़ी टीम ने इस डायनामाइट को बरामद किया था। इस ऑपरेशन में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों को आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया गया।
- याचिकाकर्ता की दलील: कांस्टेबल दुबे का कहना था कि वह भी उस टीम का हिस्सा थे, इसलिए ‘समानता’ (Parity) के आधार पर उन्हें भी प्रमोशन मिलना चाहिए।
कोर्ट का कड़ा रुख: “भेदभाव का दावा नहीं किया जा सकता”
- अदालत ने पुलिस रेगुलेशन के नियम 70-A (Regulation 70-A) की व्याख्या की।
- विवेकपूर्ण शक्ति: आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन देना प्रशासन का विशेषाधिकार है। यह इस पर निर्भर करता है कि किस अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से कितनी असाधारण हिम्मत दिखाई है।
- समानता का अभाव: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में ‘समानता’ (Parity) या ‘भेदभाव’ (Discrimination) का तर्क नहीं दिया जा सकता। हर जवान की भूमिका अलग होती है और पुरस्कार भी उसी आधार पर मिलता है।
- सबूत की कमी: कोर्ट ने नोट किया कि हालांकि याचिकाकर्ता वहां मौजूद थे, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो उनके द्वारा किसी ‘विशिष्ट वीरता कार्य’ को दर्शाता हो।
राज्य सरकार का पक्ष (State’s Stand)
सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि ऑपरेशन में लगभग 80 पुलिसकर्मी शामिल थे। केवल उन चुनिंदा लोगों को प्रमोशन दिया गया जिन्होंने जान की बाजी लगाकर अदम्य साहस दिखाया। बाकी कर्मियों को छोटे पुरस्कार दिए गए, जबकि कुछ (याचिकाकर्ता सहित) केवल अपनी नियमित ड्यूटी कर रहे थे, जिसके लिए विशेष पदोन्नति नहीं दी जा सकती।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विषय | अदालत का निष्कर्ष |
| प्रमोशन का आधार | केवल व्यक्तिगत और असाधारण वीरता। |
| रेगुलेशन 70-A | यह विवेकाधीन है, इसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता। |
| टीम वर्क बनाम बहादुरी | टीम में होना और वीरता दिखाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। |
| नतीजा | याचिका में मेरिट की कमी, केस खारिज। |
निष्कर्ष: अनुशासन और योग्यता सर्वोपरि
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला पुलिस जैसे अनुशासित बल में पदोन्नति के मानकों को स्पष्ट करता है। कोर्ट ने संदेश दिया है कि ‘आउट-ऑफ-टर्न’ प्रमोशन केवल भीड़ का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि उस भीड़ से अलग हटकर कुछ असाधारण कर दिखाने के लिए मिलता है।

