Monday, August 24, 2026
HomeSupreme CourtReligion & Law: ईसाई धर्म ही एकमात्र सच्चा धर्म…पादरी के खिलाफ कानूनी...

Religion & Law: ईसाई धर्म ही एकमात्र सच्चा धर्म…पादरी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Religion & Law: सुप्रीम कोर्ट ने एक पादरी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन पर रोक (Stay) लगा दी है, जिन पर आरोप था कि उन्होंने ईसाई धर्म को एकमात्र सच्चा धर्म बताया था। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने ‘रेवरेंड फादर विनीत विन्सेंट परेरा’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। फादर परेरा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने उनके खिलाफ केस रद्द करने से इनकार कर दिया था।

विवाद की जड़ क्या है? (The Allegation)

  • FIR: उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज FIR के अनुसार, फादर परेरा अपनी प्रार्थना सभाओं में बार-बार कथित तौर पर कहते थे कि “ईसाई धर्म ही एकमात्र सच्चा धर्म है”।
  • आरोप: पुलिस का दावा है कि इस बयान से दूसरे समुदायों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी।
  • जांच: दिलचस्प बात यह है कि जांच के दौरान पुलिस को अवैध धर्मांतरण (Illegal Conversion) का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन उन्होंने ‘अन्य धर्मों की आलोचना’ के आधार पर IPC की धारा 295A के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी।

हाई कोर्ट का सख्त रुख (Allahabad HC View)

  • 18 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फादर परेरा की याचिका खारिज करते हुए कहा था।
  • सेक्युलर देश: भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में किसी एक धर्म को “एकमात्र सच्चा धर्म” बताना गलत है।
  • अपमानजनक: ऐसा दावा करना अन्य धर्मों के प्रति तिरस्कार (Disparagement) को दर्शाता है।
  • धारा 295A: हाई कोर्ट ने माना था कि ऐसे बयान प्रथम दृष्टया धारा 295A के दायरे में आते हैं, जो जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से संबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

  • पादरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने तर्क दिया।
  • गलत फंसाया गया: उनके मुवक्किल के खिलाफ धारा 295A का कोई अपराध नहीं बनता है।
  • मजिस्ट्रेट की चूक: मजिस्ट्रेट ने बिना न्यायिक दिमाग लगाए (Judicial Mind) चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया।
  • सुप्रीम कोर्ट की राहत: दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

कानूनी प्रावधान: धारा 295A (Section 295A IPC)

पहलूविवरण
अपराधकिसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना।
शर्तयह कृत्य “जानबूझकर” (Deliberate) और “दुर्भावनापूर्ण” (Malicious) इरादे से किया गया होना चाहिए।
सजाइसमें जुर्माने के साथ कारावास का प्रावधान है।

निष्कर्ष: अभिव्यक्ति की आजादी बनाम धार्मिक संवेदनशीलता

यह मामला एक बार फिर उस बारीक रेखा को रेखांकित करता है जहाँ एक व्यक्ति की अपने धर्म के प्रति अटूट आस्था और दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान के बीच संतुलन बनाना होता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात का परीक्षण करेगा कि क्या किसी धर्म को “एकमात्र सत्य” कहना वास्तव में अपराध की श्रेणी में आता है या यह केवल धार्मिक विश्वास की अभिव्यक्ति है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
74 %
6.2kmh
99 %
Mon
31 °
Tue
34 °
Wed
34 °
Thu
32 °
Fri
34 °

Recent Comments