Wednesday, October 28, 2026
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Winsome Diamond Case: बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की कोई भूमिका नहीं…₹82.55 करोड़ के कथित धोखाधड़ी…CBI ने यह क्यों कहा, देखें

Winsome Diamond Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विनसम डायमंड्स (Winsome Diamonds) घोटाले के एक मामले में बैंक ऑफ इंडिया (BoI) के अधिकारियों को बड़ी राहत दी है।

भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता और उसकी कंपनी विनसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी लिमिटेड के खिलाफ चल रही जांच में CBI ने बैंक अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया है। अब एजेंसी केवल निजी व्यक्तियों (Private Persons) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी। ₹82.55 करोड़ के इस कथित धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला है कि बैंक के किसी भी सार्वजनिक सेवक या अधिकारी की इस साजिश में कोई संलिप्तता या भ्रष्टाचार नहीं पाया गया है।

₹82.55 करोड़ का घोटाला और BoI की भूमिका

  • साजिश: 2012-13 के दौरान बैंक ऑफ इंडिया से ₹82.55 करोड़ की धोखाधड़ी की गई थी।
  • SBLC का खेल: बैंक ने विनसम डायमंड्स को ₹96 करोड़ की क्रेडिट सुविधाएं दी थीं, जिसमें ₹90 करोड़ Standby Letters of Credit (SBLC) के रूप में थे।
  • धोखाधड़ी का तरीका: जतिन मेहता के सहयोगियों (खासकर UAE के हैथम सलमान अली) द्वारा नियंत्रित विदेशी खरीदारों ने जानबूझकर भुगतान में चूक की। इसके परिणामस्वरूप विदेशी बैंकों ने SBLC को लागू (Invoke) कर दिया, जिससे बैंक ऑफ इंडिया को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

CBI का निष्कर्ष: भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं

  • जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बैंक अधिकारियों ने किसी आपराधिक साजिश में हिस्सा नहीं लिया।
  • No Corruption: अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
  • IPC के तहत चार्जशीट: अब केवल जतिन मेहता और उसके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला चलाया जाएगा।

‘Standby Letter of Credit’ (SBLC) क्या है?

  • आम आदमी की भाषा में समझें तो SBLC बैंक द्वारा दी गई एक ‘गारंटी’ है।
  • यदि बैंक का क्लाइंट (जैसे जतिन मेहता) किसी विदेशी पार्टी के साथ किए गए समझौते को पूरा नहीं कर पाता या भुगतान में चूक करता है, तो बैंक उस तीसरी पार्टी को भुगतान करने की गारंटी देता है।
  • इस मामले में, मेहता की कंपनियों ने भुगतान नहीं किया, इसलिए बैंक ऑफ इंडिया को अपनी गारंटी (SBLC) के तहत पैसा चुकाना पड़ा।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मुख्य आरोपीजतिन मेहता (फिलहाल लंदन में होने की संभावना)।
कुल बैंक धोखाधड़ीजतिन मेहता पर विभिन्न बैंकों से करीब ₹4600 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
BoI का नुकसान₹82.55 करोड़।
जांच की स्थितिCBI जल्द ही जतिन मेहता और उसके सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी।

बैंक अधिकारियों के लिए न्याय

अक्सर बड़े बैंकिंग घोटालों में बैंक अधिकारियों पर मिलीभगत का संदेह जताया जाता है। हालांकि, CBI की इस रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि विनसम डायमंड केस में बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी इस शातिर साजिश का हिस्सा नहीं थे। यह मामला पूरी तरह से एक निजी कारोबारी द्वारा बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग का परिणाम था।

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