Wednesday, September 9, 2026
HomeHigh CourtWorkplace Law: सावधान! गाली और यौन उत्पीड़न के बीच का अंतर समझें…हर...

Workplace Law: सावधान! गाली और यौन उत्पीड़न के बीच का अंतर समझें…हर गुस्से वाले शब्द F*** off को यौन उत्पीड़न की नजर से देखना गलत

Workplace Law: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कार्यस्थल पर होने वाले विवादों और यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की कानूनी सीमाओं को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस कीर्ति सिंह की बेंच अभिषेक शाह बनाम हरियाणा राज्य मामले की सुनवाई कर रही थी, जहाँ एक पूर्व बिजनेस मैनेजर ने इस्तीफा देने के महीनों बाद अपने डायरेक्टर पर अभद्र भाषा और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अदालत ने एक कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर बहस के दौरान ‘गाली’ या ‘अभद्र भाषा’ का इस्तेमाल करना हमेशा Section 354-A IPC के तहत अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसमें यौन संकेत (Sexual Intent) न हो।

मामला क्या था? (Workplace Dispute vs Harassment)

  • तनाव: अक्टूबर 2018 में कंपनी के एक इवेंट से ठीक पहले कर्मचारी ने मेडिकल लीव मांगी, जिससे डायरेक्टर और उसके बीच विवाद शुरू हुआ।
  • इस्तीफा और कानूनी नोटिस: कर्मचारी ने इस्तीफा दे दिया जिसे उसी दिन स्वीकार कर लिया गया। बाद में दोनों पक्षों के बीच बकाया राशि और रोजगार की शर्तों को लेकर कानूनी नोटिसों का आदान-प्रदान हुआ।
  • देरी से FIR: इस्तीफा देने के लगभग 4 महीने बाद (फरवरी 2019 में), पूर्व कर्मचारी ने डायरेक्टर के खिलाफ गाली देने और परेशान करने की FIR दर्ज कराई।

कोर्ट का मुख्य तर्क: ‘सेक्सुअल ओवरटोन’ का अभाव

  • अदालत ने Section 354-A IPC के तत्वों की बारीकी से जांच की।
  • अशिष्टता बनाम यौन: कोर्ट ने माना कि डायरेक्टर द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द (F*** off) “अशिष्ट और असभ्य” (Uncouth and Discourteous) तो हो सकता है, लेकिन इसका सामान्य अर्थ में कोई यौन अर्थ या संकेत नहीं निकलता।
  • यौन मंशा की कमी: यौन उत्पीड़न के लिए शारीरिक संपर्क, यौन संबंध की मांग या कामुक टिप्पणी (Sexually coloured remarks) होना जरूरी है। इस मामले में विवाद पूरी तरह से ‘काम से जुड़ी छुट्टी’ को लेकर था।
  • बदले की कार्रवाई: कोर्ट ने FIR दर्ज कराने में हुई 4 महीने की देरी और कानूनी नोटिसों के आदान-प्रदान को देखते हुए माना कि यह कार्यवाही ‘बदले की भावना’ (Retaliatory) से प्रेरित हो सकती है।

फैसले का कानूनी महत्व (Legal Significance)

  • पृथक घटना: एक अकेली अपमानजनक टिप्पणी, जो काम के दबाव या गुस्से में दी गई हो, उसे बिना यौन मंशा के यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।
  • प्रक्रिया का दुरुपयोग: ऐसी शिकायतों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’ (Abuse of Process) होगा।
  • सफाई शुल्क: कोर्ट ने FIR तो रद्द कर दी, लेकिन डायरेक्टर को पीजीआईएमईआर (PGIMER), चंडीगढ़ के ‘पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड’ में ₹20,000 जमा करने का निर्देश दिया।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतपंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (जस्टिस कीर्ति सिंह)।
धाराIPC की धारा 354-A (यौन उत्पीड़न)।
मुख्य शब्द“F*** off” (कार्यस्थल विवाद के दौरान)।
अदालती आदेशFIR और सभी कार्यवाही रद्द।
शर्त₹20,000 समाज सेवा कोष में जमा करने होंगे।

कार्यस्थल पर भाषा की गरिमा

यह फैसला कार्यस्थल पर ‘कठोर भाषा’ और ‘यौन उत्पीड़न’ के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचता है। हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कार्यस्थल पर गाली-गलौज को अनुशासनहीनता या सिविल मामला तो माना जा सकता है, लेकिन हर अपमानजनक शब्द को ‘यौन उत्पीड़न’ का रंग देकर आपराधिक केस दर्ज करना गलत है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
27 ° C
27 °
27 °
94 %
0kmh
62 %
Wed
34 °
Thu
35 °
Fri
33 °
Sat
33 °
Sun
33 °

Recent Comments