Kotak Mahindra Bank:बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है।
बैंक ने अदालत को बताया कि मार्च 2026 में पंचकुला नगर निगम (MC) के ₹150 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाले के सिलसिले में हरियाणा पुलिस ने राज्य में बैंक की 109 शाखाओं (Branches) को पूरी तरह सील कर दिया था। बैंक के कामकाज के ठप होने के बाद, जब बैंक ने नगर निगम के खाते में ₹127.27 करोड़ जमा कराए, तब जाकर इन शाखाओं को “डी-सील” (खोला) किया गया। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की पीठ ने कोटक महिंद्रा बैंक को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए पंचकुला नगर निगम पर इस राशि का इस्तेमाल करने से अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
कैसे हुआ ₹150 करोड़ का ‘मास्टरमाइंड’ घोटाला?
संदिग्ध एफडी (FDs): हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (SV&ACB) द्वारा 24 मार्च 2026 को दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, यह घोटाला 2018 से लगातार चल रहा था। पंचकुला नगर निगम ने कोटक बैंक की सेक्टर-11 शाखा में कुल 145.03 करोड़ रुपये की 16 एफडी कराई हुई थीं, जिनकी मैच्योरिटी वैल्यू ₹158.02 करोड़ थी।
अधिकारियों को हुआ शक: फरवरी 2026 में जब नगर निगम के अधिकारी ₹59.58 करोड़ की 11 एफडी मैच्योर होने पर बैंक पहुंचे, तो बैंक द्वारा दिए गए स्टेटमेंट और नगर निगम के रिकॉर्ड आपस में मेल नहीं खा रहे थे।
बैंक मैनेजर ही निकला मास्टरमाइंड: जांच में सामने आया कि कोटक बैंक का तत्कालीन ब्रांच मैनेजर पुष्पिंदर सिंह इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड था। उसने नगर निगम के सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर निगम के दो फर्जी बैंक खाते खोले। वैध खातों से सरकारी पैसा इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया और वहां से निजी लोगों के जरिए पुष्पिंदर तक पहुंचाया गया।
पुलिस ने 109 शाखाएं सील कर हमें पंगु बना दिया: बैंक के वकील
शिकायत करने पर बैंक पर ही एक्शन: हाई कोर्ट में कोटक बैंक का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। वकील ने बताया कि जब 18 मार्च को विसंगतियां सामने आईं, तो बैंक ने खुद पंचकुला के पुलिस उपायुक्त (DCP) को शिकायत सौंपी थी। लेकिन पुलिस ने बैंक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय उल्टा 30 मार्च को बैंक की 109 शाखाओं को सील कर दिया, जिससे बैंक का कामकाज पूरी तरह ठप (Crippled) हो गया।
14 लाख ग्राहक हुए प्रभावित: बैंक ने कोर्ट को बताया कि हरियाणा में उसके लगभग 14 लाख ग्राहक हैं और ₹24,000 करोड़ की कुल जमा राशि (Deposits) है। पुलिस के इस औचक कदम से आम जनता और बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का हस्तक्षेप: बैंक के अनुसार, जब स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव (अरुण गुप्ता) के हस्तक्षेप के बाद एक समझौता हुआ। बैंक ने इस शर्त पर नगर निगम के खाते में ₹127.27 करोड़ जमा कराए कि जब तक खातों का मिलान (Reconciliation) पूरा नहीं हो जाता, इस राशि को छुआ नहीं जाएगा। इसके बाद ही 109 शाखाएं खोली गईं।
बैंक की दलील: नगर निगम पहले ही निकाल चुका है पैसे
कोटक बैंक के वकील ने अदालत में तकनीकी पक्ष रखते हुए दलील दी कि बैंक ने यह ₹127 करोड़ की राशि केवल जांच और मिलान लंबित होने के कारण जमा की है, न कि इस बात की स्वीकारोक्ति के रूप में कि नगर निगम इस पैसे का हकदार है।
बैंक के आंतरिक मिलान (Reconciliation) में यह बात सामने आई है कि नगर निगम द्वारा दिखाई जा रही 16 टर्म डिपॉजिट एडवाइस (TDAs) में से 14 एफडी को साल 2024 में ही समय से पहले (Prematurely) भुनाया (Encash) जा चुका है। इसके बावजूद नगर निगम बैंक से दोबारा ₹158 करोड़ की मांग कर रहा था और दबाव बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर 1 और 2 अप्रैल को इस राशि को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में ट्रांसफर करने के पत्र लिख रहा था।
विश्लेषण: बैंक बनाम नगर निगम (Panchkula FD Scam)
| मुख्य बिंदु | मामले के कानूनी और व्यावहारिक तथ्य |
| बैंक को अंतरिम राहत | बॉम्बे हाई कोर्ट ने पाया कि नगर निगम द्वारा पेश किए गए एफडी के कागजात (TDAs) बैंक के मानक दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे हैं (संदिग्ध हैं)। इसलिए कोर्ट ने नगर निगम द्वारा इस ₹127 करोड़ के इस्तेमाल पर रोक (Freeze) लगा दी है। |
| प्रशासनिक दबाव की पराकाष्ठा | यह मामला दिखाता है कि कैसे एक कॉर्पोरेट फ्रॉड के बाद राज्य की मशीनरी और पुलिस ने ₹127 करोड़ की रिकवरी के लिए एक ही दिन में 109 बैंक शाखाओं को सील कर दबाव बनाने का अभूतपूर्व कदम उठाया। |
| आंतरिक फ्रॉड की चुनौती | कोटक बैंक के लिए यह मामला एक बड़ा सबक है कि कैसे एक सिंगल ब्रांच मैनेजर (पुष्पिंदर सिंह) साल 2018 से लेकर 2026 तक इतने बड़े सरकारी फंड का गबन करता रहा और ऑडिट में यह पकड़ में नहीं आया। |
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
यह मामला बैंकिंग इतिहास के सबसे अजीबोगरीब पुलिस एक्शनों में से एक है। जहां एक कर्मचारी के फ्रॉड की सजा पूरे राज्य में फैले बैंक के 14 लाख निर्दोष ग्राहकों को भुगतनी पड़ी। हरियाणा पुलिस द्वारा 109 शाखाओं को ‘बंधक’ बनाकर ₹127 करोड़ वसूलने के इस तरीके को बैंक ने कोर्ट में पूरी तरह मनमाना बताया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पैसे को फ्रीज करने के बाद अब गेंद हरियाणा पुलिस और विजीलैंस ब्यूरो के पाले में है, जिन्हें यह साबित करना होगा कि असली पैसा कहां गया और इसमें नगर निगम के अधिकारियों की कितनी मिलीभगत थी।

