Friday, June 26, 2026
HomeSupreme CourtNoida violence: 93,000 मामले लंबित हैं, हर कोई सीधे यहां क्यों चला...

Noida violence: 93,000 मामले लंबित हैं, हर कोई सीधे यहां क्यों चला आता है?…आरोपी छात्रा के सामने क्यूं तल्ख टिप्पणी की गई, पढ़ें

Noida violence: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में पिछले महीने हुई औद्योगिक हिंसा के मामले में गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों के भारी बोझ पर चिंता व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने स्पष्ट किया कि सीधे सर्वोच्च न्यायालय आने के बजाय पहले संबंधित उच्च न्यायालय के पास जाना चाहिए। कोर्ट ने आरोपी को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों के भारी बोझ पर चिंता व्यक्त की। यह मामला 13 अप्रैल को नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी पर हिंसा भड़काने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ता बोझ

  • सुनवाई के दौरान जब आकृति के वकील ने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचार का अधिकार) के तहत जमानत की गुहार लगाई, तो पीठ ने टिप्पणी की।
  • लंबित मामले: “आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके सीधे यहाँ आ जाता है। क्या आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में 93,000 मामले लंबित हैं?”
  • प्रक्रिया का पालन: कोर्ट ने संकेत दिया कि असाधारण परिस्थितियों के बिना सीधे शीर्ष अदालत आना उचित नहीं है, जब तक कि निचली अदालतों के विकल्पों का उपयोग न कर लिया गया हो।

आरोपी पक्ष की दलीलें

  • आकृति चौधरी के वकील ने कोर्ट के सामने अपने तर्क दिए।
  • गिरफ्तारी के आधार: पुलिस ने गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के ठोस आधार (Grounds of Arrest) नहीं बताए थे।
  • शैक्षणिक पृष्ठभूमि: वह दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर (Masters) की छात्रा है और उसकी उम्र 20-25 वर्ष के बीच है।
  • पुलिस प्रताड़ना: इसी मामले में एक अन्य आरोपी केशव आनंद की ओर से उत्तर प्रदेश पुलिस पर ‘टॉर्चर’ (प्रताड़ना) के आरोप लगाए गए हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

नोएडा हिंसा की पृष्ठभूमि

  • घटना: 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हजारों श्रमिक प्रदर्शन कर रहे थे।
  • हिंसा: यह विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब भीड़ ने कथित तौर पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा दी और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की।
  • गिरफ्तारियां: पुलिस ने आकृति चौधरी के साथ मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता को भी हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था। नोएडा की एक अदालत ने पहले ही इन तीनों को पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दे दी थी।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
मुख्य आरोपीआकृति चौधरी (DU की छात्रा)।
घटना13 अप्रैल, नोएडा औद्योगिक हिंसा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेशजमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार, इलाहाबाद HC जाने का निर्देश।
लंबित मामलेसुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 93,000 केस पेंडिंग हैं।
अन्य कार्रवाईपुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर यूपी पुलिस को नोटिस।

न्यायिक पदानुक्रम (Judicial Hierarchy) का महत्व

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि गंभीर आरोपों के मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया और पदानुक्रम का पालन करना जरूरी है। 93,000 लंबित मामलों का आंकड़ा यह दर्शाता है कि शीर्ष अदालत अब उन याचिकाओं को सीधे सुनने से बच रही है जिन्हें हाई कोर्ट स्तर पर सुलझाया जा सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
35.4 ° C
35.4 °
35.4 °
38 %
4.9kmh
100 %
Fri
44 °
Sat
44 °
Sun
45 °
Mon
43 °
Tue
36 °

Recent Comments