Monday, August 10, 2026
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Daring Work: अगर ईमानदार पुलिस को सजा देंगे तो कोई छापा मारने की हिम्मत नहीं करेगा…आईएएस के फार्महाउस पर रेड से जुड़ा केस, जानिए

Daring Work: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस प्रशासन को सब इंस्पेक्टर के निलंबन आदेश पर कड़ी फटकार लगाई है।

आईएएस अधिकारी के फार्महाउस पर मारा था छापा

जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने इंदौर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक द्वारा 11 मार्च को थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोर के खिलाफ जारी निलंबन आदेश को ‘मनमाना और प्रतिशोधपूर्ण’ करार दिया। अदालत ने उस निलंबन आदेश (Suspension Order) को रद्द कर दिया है, जो एक आईएएस (IAS) अधिकारी के फार्महाउस पर छापा मारने वाले सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ जारी किया गया था। यह मामला मार्च 2026 की एक घटना से जुड़ा है, जब सब-इंस्पेक्टर लोकेंद्र सिंह ने एक गुप्त सूचना के आधार पर ग्राम अवलीपुरा स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी की थी।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
याचिकाकर्तालोकेंद्र सिंह हिहोर (थाना प्रभारी, 2007 बैच SI)।
प्रतिवादीमध्य प्रदेश राज्य और एसपी इंदौर (ग्रामीण)।
विवाद का केंद्रएक आईएएस अधिकारी का फार्महाउस (जुआ अड्डा)।
कोर्ट का फैसलानिलंबन आदेश रद्द; बहाली का आदेश।
मुख्य कानूनी बिंदुनिलंबन “कपटपूर्ण और प्रतिशोधपूर्ण” (Arbitrary & Vindictive) था।

घटना और ‘बाहरी दबाव’

  • छापेमारी: 10 और 11 मार्च की दरमियानी रात को की गई इस रेड में 20 से अधिक लोग जुआ खेलते पकड़े गए थे। मौके से भारी नकद, मोबाइल और वाहन जब्त किए गए थे।
  • आईएएस का कनेक्शन: जांच में पता चला कि वह फार्महाउस मध्य प्रदेश वित्त निगम, इंदौर में प्रबंध निदेशक (MD) के पद पर तैनात एक आईएएस अधिकारी का है।
  • दबाव: हिहोर ने आरोप लगाया कि उन पर अपराध स्थल (Crime Scene) की पहचान छिपाने और आईएएस अधिकारी को बचाने के लिए “अत्यधिक बाहरी दबाव” डाला गया था। जब उन्होंने सही तथ्यों के साथ FIR दर्ज की, तो उसी दिन उन्हें निलंबित कर दिया गया।

हाई कोर्ट के कड़े सवाल और टिप्पणियां

  • अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं।
  • तर्कहीन निलंबन: सरकार ने तर्क दिया कि हिहोर को “खुफिया जानकारी जुटाने में विफल रहने” के कारण निलंबित किया गया। कोर्ट ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर ही तो सफल छापा मारा गया था, फिर यह विफलता कैसी?
  • मनमानी नीति (Pick and Choose): कोर्ट ने नोट किया कि एक अन्य SHO, जिसने इसी तरह का छापा मारा था, उसे निलंबित नहीं किया गया। यहां तक कि एक ASI जो बीमार चल रहा था (Sick Leave पर था), उसे भी निलंबित कर दिया गया। यह विभाग की ‘चुनने और सजा देने’ की प्रतिशोधपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
  • कर्तव्यपरायणता को सजा: कोर्ट ने कहा, “एक अधिकारी को उसकी त्वरित और कुशल ड्यूटी के लिए दंडित करना ‘गंभीर कदाचार’ की अवधारणा के विपरीत है और यह अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देता है।”

भविष्य के लिए चेतावनी

जस्टिस पिल्लई ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि यदि इस तरह के निलंबन आदेशों को जारी रहने दिया गया, तो भविष्य में कोई भी पुलिस अधिकारी निलंबन के डर से किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति के परिसर में छापा मारने की हिम्मत नहीं करेगा। कोर्ट ने माना कि हिहोर ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी सत्यनिष्ठा (Integrity) बनाए रखी।

कानून के सामने सब बराबर

यह फैसला कार्यपालिका के लिए एक बड़ा सबक है कि प्रशासनिक शक्तियों का उपयोग ईमानदार अधिकारियों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि चाहे फार्महाउस किसी आईएएस अधिकारी का हो या किसी प्रभावशाली नेता का, पुलिस का कर्तव्य कानून को लागू करना है और न्यायपालिका ऐसे अधिकारियों के साथ खड़ी रहेगी।

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