Tenant’s Theft: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मकान मालिकों के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है।
मकान मालिक को नया कनेक्शन देने से मना करने का मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि बिजली विभाग की अक्षमता का खामियाजा निर्दोष मकान मालिक को नहीं भुगतना चाहिए। अदालत ने व्यवस्था दी है कि यदि कोई किराएदार बिजली चोरी का दोषी पाया जाता है, तो उसके बकाये की वसूली के लिए मकान मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और न ही उसका नया बिजली कनेक्शन रोका जा सकता है। यह मामला एक मकान मालिक की याचिका पर आधारित है, जिसे उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने नया कनेक्शन देने से मना कर दिया था। विभाग का तर्क था कि परिसर के भूतल (Ground Floor) पर रहने वाले किराएदार ने बिजली चोरी की है, और जब तक वह जुर्माना नहीं भरा जाता, मकान मालिक को (जो ऊपरी मंजिल पर रहता है) कनेक्शन नहीं मिलेगा।
चोर और मकान मालिक के बीच अंतर
- अदालत ने बिजली विभाग की कुछ दलील को खारिज कर दिया।
- स्वत: उत्तरदायित्व नहीं: “ऐसे किराएदार को रखना जो बिजली चोरी करता है, स्वचालित रूप से मकान मालिक को उत्तरदायी नहीं बनाता।”
- वसूली का दायित्व: सप्लाई कंपनी को चोरी करने वाले व्यक्ति (चोर) के खिलाफ कानूनी उपाय ढूंढना चाहिए। यदि विभाग उस व्यक्ति से पैसे वसूलने में विफल रहता है, तो उसे यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह वह राशि मकान मालिक से वसूल करे।
- सेटल पजेशन (Settled Possession): चूंकि मकान मालिक अपने हिस्से के परिसर पर कानूनी कब्जा रखता है, इसलिए वह कलकत्ता हाई कोर्ट (अभिमन्यु मजुमदार बनाम सुपरिटेंडिंग इंजीनियर) के मिसाल के अनुसार बिजली कनेक्शन पाने का हकदार है।
दिल्ली हाई कोर्ट: बिजली जीवन के अधिकार का हिस्सा
- इसी विषय पर दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस मिनी पुष्करणा ने भी एक ऐतिहासिक टिप्पणी की।
- अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: कोर्ट ने माना कि बिजली तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का एक अनिवार्य हिस्सा है।
- NOC की बाधा नहीं: कोर्ट ने आदेश दिया कि मकान मालिक-किराएदार के बीच किसी विवाद के कारण बिजली प्रदाता को ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) पर जोर नहीं देना चाहिए। जब तक व्यक्ति के पास संपत्ति का कब्जा है, उसे इस बुनियादी जरूरत से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का सख्त निर्देश
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी बिजली विभाग को अहम आदेश जारी किया।
- समय सीमा: आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता का आवेदन स्वीकार कर उसे नया कनेक्शन प्रदान किया जाए।
- केवल नया शुल्क: याचिकाकर्ता से केवल नए कनेक्शन का निर्धारित शुल्क ही लिया जाएगा, न कि किराएदार द्वारा की गई चोरी का कोई बकाया।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| विवाद | किराएदार की चोरी के कारण मकान मालिक का नया कनेक्शन रोका गया। |
| कोर्ट का रुख | चोरी करने वाला व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार है, मकान मालिक नहीं। |
| संबंधित कानून | यूपी बिजली संहिता, 2005 और संविधान का अनुच्छेद 21। |
| समय सीमा | विभाग को 14 दिनों के भीतर कनेक्शन देने का आदेश। |
मकान मालिकों के लिए सुरक्षा
यह फैसला बिजली कंपनियों की उस ‘शॉर्टकट’ कार्यप्रणाली पर रोक लगाता है जिसमें वे असली अपराधी (चोर) को पकड़ने के बजाय मकान मालिक का कनेक्शन काटकर उसे पैसे भरने के लिए मजबूर करती थीं। अब यह स्पष्ट है कि बिजली विभाग को अपनी बकाया वसूली के लिए ‘चोर’ के खिलाफ कार्यवाही करनी होगी, न कि संपत्ति के अन्य कानूनी निवासियों के अधिकारों का हनन करना होगा।

