Thursday, October 1, 2026
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Hair Transplant: ट्रीटमेंट के बाद बाल न उगना डॉक्टरी लापरवाही नहीं है… नतीजे मनमुताबिक न मिलने का मतलब सेवा में कमी नहीं, यह फैसला पढ़ें

Hair Transplant: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि Platelet Rich Plasma (PRP) उपचार के बाद किसी मरीज के बाल नहीं उगते हैं, तो इसे ‘चिकित्सा लापरवाही’ (Medical Negligence) नहीं माना जा सकता।

मुंबई के वकील सुशील मुकेश गगलानी ने शिकायत की थी

आयोग ने कहा, हर चिकित्सा प्रक्रिया का परिणाम शत-प्रतिशत सफल होना अनिवार्य नहीं है, और उपचार का लाभ न मिलना डॉक्टर की योग्यता पर सवाल नहीं उठाता। यह मामला मुंबई के एक वकील सुशील मुकेश गगलानी की शिकायत से शुरू हुआ था, जिन्होंने 2013 में बालों की ग्रोथ के लिए तीन PRP सेशन लिए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें सकारात्मक परिणामों का आश्वासन दिया गया था, लेकिन प्रक्रिया के दौरान दर्द और रक्तस्राव हुआ और कोई सुधार नहीं हुआ।

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उपचार की प्रभावशीलता और डॉक्टर की भूमिका

  • आयोग के सदस्य जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता और एवीएम जे. राजेंद्र की पीठ ने जिला और राज्य उपभोक्ता मंचों के आदेशों को पलट दिया।
  • समान परिणाम संभव नहीं: “यह अच्छी तरह से स्थापित है कि सभी मरीजों को PRP जैसे हेयर ग्रोथ फैक्टर उपचारों से समान रूप से लाभ नहीं होता है। कुछ मरीजों को कोई लाभ नहीं हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर अक्षम है।”
  • प्रक्रिया की समझ: NCDRC ने स्पष्ट किया कि PRP में मरीज का अपना रक्त निकाला जाता है, उसे प्रोसेस किया जाता है और प्लाज्मा को स्कैल्प में इंजेक्ट किया जाता है। इसे ‘ब्लड बैंक’ में रक्त जमा करने या व्यावसायिक बिक्री जैसा नहीं माना जा सकता।

स्टेम सेल और PRP के बीच भ्रम

  • आयोग ने नोट किया कि निचली अदालतों (जिला और राज्य आयोग) ने गलती से PRP थेरेपी और स्टेम सेल थेरेपी को एक ही समझ लिया था।
  • योग्यता: आयोग ने माना कि डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) और प्लास्टिक सर्जन PRP उपचार देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
  • साक्ष्य का अभाव: कोर्ट ने पाया कि यह साबित करने के लिए कोई ‘विशेषज्ञ साक्ष्य’ (Expert Evidence) नहीं था कि डॉक्टरों ने लापरवाही से काम किया।

मरीज की जागरूकता पर टिप्पणी

  • याचिकाकर्ता खुद एक वकील थे, जिस पर आयोग ने विशेष टिप्पणी की।
  • सहमति और जानकारी: गगलानी ने उपचार से पहले ‘सहमति फॉर्म’ (Consent Form) पर हस्ताक्षर किए थे और उनके पास कंपनी के ब्रोशर और वेबसाइट की जानकारी उपलब्ध थी।
  • कोई गुमराह नहीं: आयोग ने कहा कि यह मानने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि शिकायतकर्ता को गुमराह किया गया था। वांछित परिणाम न मिलना ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) के बराबर नहीं है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

पक्षविवरण
शिकायतकर्तासुशील मुकेश गगलानी (मुंबई के वकील)।
प्रतिवादीलाइफसेल इंटरनेशनल, डॉ. माधुरी अग्रवाल और डॉ. सतीश अरोलकर।
निचली अदालत का फैसला6 लाख से 10 लाख रुपये तक मुआवजे का आदेश दिया था।
NCDRC का आदेशमुआवजे के आदेश रद्द; डॉक्टरों और कंपनी को क्लीन चिट।
कानूनी सिद्धांतवांछित परिणाम न मिलना लापरवाही नहीं है, यदि मानक प्रक्रिया का पालन किया गया हो।

डॉक्टरों के लिए सुरक्षा कवच

यह फैसला चिकित्सा बिरादरी के लिए एक बड़ी राहत है, खासकर कॉस्मेटिक और वैकल्पिक उपचारों के क्षेत्र में। यह स्पष्ट करता है कि डॉक्टर केवल प्रक्रिया के सही निष्पादन के लिए जिम्मेदार हैं, उसके अंतिम ‘सौंदर्यपरक परिणाम’ (Aesthetic Result) की गारंटी के लिए नहीं, क्योंकि मानव शरीर हर उपचार पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है।

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