Saturday, August 15, 2026
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Yamuna Sur Ghat: दिल्ली निवासियों ध्यान दें…भक्तों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करें, लेकिन यमुना नदी तट को न छुएं, पढ़ें नया निर्देश

Yamuna Sur Ghat: दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना नदी के पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए एक कड़ा फैसला सुनाते हुए यमुना खादर (Floodplains) क्षेत्र में सभी प्रकार की व्यावसायिक और धार्मिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

सुरेश कुमार की ओर से याचिका दायर

जस्टिस जसमीत सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि है और इस संवेदनशील क्षेत्र का उपयोग किसी भी ऐसे उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता जो इसकी प्राकृतिक स्थिति को नुकसान पहुँचाए। यह आदेश सुरेश कुमार नामक एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर आया है, जिसने यमुना सुर घाट पर पार्किंग स्थल के रखरखाव के लिए 2022 के एक टेंडर को बहाल करने की मांग की थी।

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व्यावसायिक लाभ से ऊपर पर्यावरण

  • पूर्ण प्रतिबंध: “पर्यावरण संरक्षण के हित में और क्षेत्र के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील होने के कारण, किसी भी उद्देश्य के लिए सभी प्रकार की व्यावसायिक या धार्मिक गतिविधियों को उक्त क्षेत्र में प्रतिबंधित किया जाएगा।”
  • पार्किंग पर भी रोक: कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस जमीन पर किसी भी प्रकार के वाहन की पार्किंग की अनुमति नहीं दी जाएगी, भले ही वह शुभ अवसरों पर नदी को श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए ही क्यों न हो।

DDA और MCD की भूमिका

  • यह मामला दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के बीच एक समझौता ज्ञापन से जुड़ा था।
  • टेंडर रद्दीकरण: याचिकाकर्ता ने टेंडर रद्द होने के खिलाफ गुहार लगाई थी, लेकिन DDA ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह जमीन ‘यमुना फ्लडप्लेन’ का हिस्सा है और इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता।
  • अदालत का रुख: कोर्ट ने टेंडर बहाली की याचिका खारिज कर दी। साथ ही कहा कि यदि याचिकाकर्ता टेंडर रद्द होने पर मुआवजा चाहता है, तो उसे रिट याचिका के बजाय सिविल सूट (Civil Suit) दाखिल करना चाहिए।

भक्तों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

  • अदालत ने धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए निर्देश दिया।
  • वैकल्पिक स्थल: यदि DDA को लगता है कि विशेष अवसरों पर पूजा के लिए आने वाले लोगों को पार्किंग की आवश्यकता है, तो वह यमुना खादर से दूर कहीं और वैकल्पिक व्यवस्था करे।
  • संवेदनशीलता: मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यमुना घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य/आदेश
संबंधित क्षेत्रयमुना फ्लडप्लेन (Yamuna Floodplains)।
प्रतिबंधित गतिविधियाँव्यावसायिक (जैसे पार्किंग) और धार्मिक आयोजन।
मुख्य एजेंसीDDA (लागू करने की जिम्मेदारी)।
कोर्ट की प्राथमिकतापारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) और नदी का संरक्षण।

यमुना का भविष्य

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला यमुना के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वर्षों से यमुना तट पर अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँचा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब “सुविधा” के नाम पर पर्यावरण के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CORAM: HON’BLE MR. JUSTICE JASMEET SINGH
W.P.(C) 5894/2026& CM APPL. 28920/2026, CM APPL. 28921/2026
SURESH KUMAR versus DELHI DEVELOPMENT AUTHORITY & ANR.

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