Judicial Infrastructure: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश भर की अदालतों की बुनियादी स्थिति सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
न्यायिक बुनियादी ढांचा सलाहकार समिति गठित
सीजेआई ने एक ‘न्यायिक बुनियादी ढांचा सलाहकार समिति’ (Judicial Infrastructure Advisory Committee) का गठन किया है, जो अदालतों की जरूरतों का आकलन करेगी और सरकार से 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये के फंड की मांग के लिए आधार तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार इस महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता करेंगे। यह समिति देश की अदालतों को आधुनिक बनाने और वहां की कमियों को दूर करने के लिए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट को 31 अगस्त, 2026 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को सौंपा जाएगा।
समिति की संरचना (The Team)
समिति में न्यायपालिका और तकनीकी विशेषज्ञों का एक संतुलित समूह शामिल किया गया है। इसमें अध्यक्ष के रूप में जस्टिस अरविंद कुमार (सुप्रीम कोर्ट) रहेंगेेेेेेे। इसके अलावा सदस्य के तौर पर जस्टिस देबांगसु बसाक (कलकत्ता हाई कोर्ट), जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा (पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट), जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन (बॉम्बे हाई कोर्ट) सहित महानिदेशक, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) व सुप्रीम कोर्ट के महासचिव होंगे।
समिति के 7 प्रमुख लक्ष्य (Mandate)
- समिति केवल भवनों के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि तकनीक और सुविधाओं के तालमेल पर भी ध्यान देगी।
- बाधाओं की पहचान: न्याय वितरण प्रणाली में काम करने वालों को आने वाली दिक्कतों को समझना।
- बेहतर सुविधाएं: न्यायाधीशों, वकीलों, वादियों (Litigants) और आगंतुकों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना।
- तकनीक का उपयोग: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी की सिफारिश करना।
- ई-कोर्ट (E-Courts): अदालतों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण करना ताकि न्याय डिजिटल हो सके।
- डिजिटल गैप को भरना: नागरिकों के लिए ऐसी सेवाएं शुरू करना जिससे तकनीक का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे।
- आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स: सुरक्षा और सुविधाओं से लैस मॉडर्न अदालती परिसरों का निर्माण।
- कार्य दशाओं में सुधार: न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के काम करने के माहौल को बेहतर बनाना।
फंड की आवश्यकता क्यों?
भारत में अक्सर अदालतों में जजों की कमी और भवनों की खराब स्थिति (जैसे बैठने की जगह की कमी, शौचालय और रिकॉर्ड रूम की समस्या) पर चर्चा होती रही है। ₹40,000-₹50,000 करोड़ का यह प्रस्तावित फंड देश की निचली अदालतों (Subordinate Courts) से लेकर हाई कोर्ट तक की सूरत बदलने के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| विवरण | तथ्य |
| प्रस्तावित बजट | ₹40,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़। |
| समिति के अध्यक्ष | जस्टिस अरविंद कुमार। |
| रिपोर्ट की डेडलाइन | 31 अगस्त, 2026। |
| मुख्य उद्देश्य | आधुनिक तकनीक, डिजिटल कोर्ट और बेहतर बुनियादी ढांचा। |
| अगला कदम | पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) को रिपोर्ट सौंपना। |
भविष्य की अदालतें
सीजेआई सूर्यकांत की इस पहल से यह स्पष्ट है कि न्यायपालिका अब केवल ‘न्याय देने’ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘न्याय पाने के अनुभव’ को भी सुलभ और आधुनिक बनाना चाहती है। पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद को इस प्रक्रिया में शामिल करना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका बुनियादी ढांचे को देश की जीडीपी और आर्थिक प्रगति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रही है।

