Tuesday, September 29, 2026
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Kapur’s Estate: हम सब खाली हाथ आए थे, खाली हाथ ही जाएंगे…संजय कपूर व उसके कपूर परिवार के संपत्ति विवाद का यह रोचक केस पढ़ें

Kapur’s Estate: सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध उद्योगपति स्वर्गीय संजय कपूर के पारिवारिक ट्रस्ट और संपत्ति विवाद पर सुनवाई करते हुए बेहद भावुक लेकिन सख्त टिप्पणी की है।

सोना ग्रुप की संपत्तियों व रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट पर नियंत्रण का मामला

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने कपूर परिवार से विवाद को और न बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे। हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा ले जाते हैं। अदालत ने संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया सचदेव कपूर के बीच चल रहे इस हाई-प्रोफाइल विवाद में ‘रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ (RIPL) की बोर्ड बैठक पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन बैठक के एजेंडे में कुछ बड़े बदलाव जरूर किए हैं। यह विवाद सोना ग्रुप (Sona Group) की बेशकीमती संपत्तियों और ‘रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट’ पर नियंत्रण को लेकर है। 7 मई, 2026 को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे पारिवारिक कलह को देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ के समक्ष मध्यस्थता (Mediation) के लिए भेजा था।

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बोर्ड बैठक पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

  • रानी कपूर की ओर से याचिका दायर कर 18 मई को होने वाली RIPL की बोर्ड बैठक के नोटिस को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए आदेश दिया।
  • सीमित एजेंडा: बोर्ड बैठक तो होगी, लेकिन इसमें दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और बैंक खातों के हस्ताक्षरकर्ताओं (Signatory) को बदलने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।
  • RBI के नियमों पर छूट: प्रतिवादी पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशानुसार 21 मई तक दो स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करना अनिवार्य है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के इस आदेश के कारण आरबीआई या अन्य वैधानिक प्राधिकरण इस अनुपालन के लिए दबाव नहीं बनाएंगे।

भारी मन से मध्यस्थता में न जाएं

जस्टिस पारदीवाला ने रानी कपूर की ढलती उम्र का हवाला देते हुए दोनों पक्षों को समझाया। कहा, मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। मध्यस्थ (Mediator) के सामने भारी मन से सिर्फ इसलिए मत बैठिए क्योंकि कोर्ट ने आपको ऐसा करने के लिए मजबूर किया है। आप में से हर एक को अपनी तरफ से ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए, अन्यथा यह एक लंबी खिंचने वाली कानूनी लड़ाई बन जाएगी।

यह है पूरा विवाद? (धोखाधड़ी और वसीयत के आरोप)

  • मूल आरोप: स्वर्गीय डॉ. सुरिंदर कपूर की विधवा रानी कपूर का आरोप है कि 2017 में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक (लकवा) आने के बाद, उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर ने उनकी शारीरिक स्थिति का फायदा उठाया। उनसे कथित तौर पर प्रशासनिक काम के बहाने खाली कागजों पर दस्तखत कराकर उनकी सारी हिस्सेदारी एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी गई।
  • संजय कपूर की मौत के बाद बढ़ा विवाद: जून 2025 में संजय कपूर के आकस्मिक निधन के बाद यह विवाद और गहरा गया। रानी कपूर का आरोप है कि उनकी बहू प्रिया ने तेजी से सोना ग्रुप की संस्थाओं पर नियंत्रण कर लिया और उन्हें उनकी ही विरासत और घर से बेदखल कर दिया।

मामले से जुड़ा एक और दिलचस्प पहलू (करिश्मा कपूर के बच्चों का संदर्भ)

यह विवाद केवल सुप्रीम कोर्ट तक सीमित नहीं है। इससे पहले 30 अप्रैल, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने संजय कपूर की पूर्व पत्नी और बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों द्वारा दायर एक याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट ने उनकी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर को संजय कपूर द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का तीसरा पक्ष अधिकार (Third-party rights) बनाने से रोक दिया था।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य / कोर्ट का रुख
पक्षकाररानी कपूर (80 वर्षीय मां) बनाम प्रिया सचदेव कपूर (बहू)।
मुख्य विवादकरोड़ों रुपये के ‘कपूर फैमिली ट्रस्ट’ और कंपनियों के शेयरों पर नियंत्रण।
मध्यस्थ (Mediator)पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़।
कोर्ट का अंतरिम निर्देशबोर्ड बैठक होगी, लेकिन स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और बैंक साइनिंग राइट्स नहीं बदलेंगे।

अदालत की मानवीय संवेदनशीलता

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि कई बार कानूनी पेचीदगियों से ऊपर उठकर पारिवारिक रिश्तों को बचाना और बुजुर्गों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में मानसिक शांति देना अधिक महत्वपूर्ण होता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मध्यस्थता की प्रगति पर कड़ी नजर रखेंगे ताकि कोई भी पक्ष कानून का फायदा उठाकर दूसरे को पूरी तरह दरकिनार न कर सके।

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