Sunday, June 28, 2026
HomeSupreme CourtCruelty Case: पत्नी का करियर पति के वीटो का मोहताज नहीं, उसके...

Cruelty Case: पत्नी का करियर पति के वीटो का मोहताज नहीं, उसके स्वतंत्र पहचान का अधिकार; तलाक में शादी व करियर को लेकर यह खबर जरूर पढ़ें

Cruelty Case: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक अधिकारों और महिला स्वायत्तता पर एक दूरगामी फैसला सुनाया है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निष्कर्ष / टिप्पणी
मुख्य मुद्दाक्या करियर चुनना और बच्चे के लिए अलग शहर में रहना ‘क्रूरता’ है?
कोर्ट का जवाबबिल्कुल नहीं; यह महिला की गरिमा और स्वायत्तता का हिस्सा है।
सामाजिक संदेशपत्नियों को पति के घर का केवल “सहयोगी” (Appendage) नहीं माना जा सकता।
कानूनी बदलावक्रूरता और परित्याग के आरोप रद्द; तलाक अपरिवर्तनीय टूटन के आधार पर बहाल।

आर्मी ऑफिसर और उनकी डेंटिस्ट पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि 21वीं सदी में एक शिक्षित महिला से यह उम्मीद करना कि वह अपनी पहचान पूरी तरह पति के अधीन कर दे, एक “प्रतिगामी” (Regressive) सोच है। अदालत ने उस डेंटिस्ट पत्नी के खिलाफ ‘क्रूरता’ (Cruelty) और ‘परित्याग’ (Desertion) के आरोपों को पूरी तरह से हटा दिया, जिसने अपने पति की करगिल पोस्टिंग के बजाय अपने करियर और बच्चे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी थी। यह मामला एक आर्मी ऑफिसर और उनकी डेंटिस्ट पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट और फैमिली कोर्ट के फैसलों को संशोधित करते हुए महिला के चरित्र पर लगे ‘क्रूरता’ के दाग को धो दिया।

Also Read; Divorce Settlement: 3 साल की बेटी के भविष्य के लिए तलाक का समझौता खारिज…जानें क्या थी शर्त, सुप्रीम अदालत भी हो गया विचलित

मामले की पृष्ठभूमि और संघर्ष

  • विवाह (2009): शादी के बाद पत्नी ने पुणे में अपनी प्रैक्टिस शुरू की, लेकिन पति की करगिल पोस्टिंग होने पर उसे अपना करियर छोड़कर वहां जाना पड़ा।
  • बच्चे का स्वास्थ्य: 2012 में करगिल की कठिन परिस्थितियों और सुविधाओं की कमी के कारण बच्चा बीमार रहने लगा (Seizure episodes)। बेहतर इलाज और सुरक्षित वातावरण के लिए पत्नी वापस अहमदाबाद आ गई और वहां अपना क्लीनिक शुरू किया।
  • निचली अदालतों का फैसला: फैमिली कोर्ट ने इसे ‘क्रूरता’ माना कि पत्नी ने पति के साथ रहने के बजाय करियर चुना और बिना बताए क्लीनिक खोला।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

  • अदालत ने पति और ससुराल वालों के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।
  • गर्व का विषय: “पति को इस बात पर गर्व होना चाहिए था कि उसकी पत्नी अपने करियर के लक्ष्यों को पूरा कर रही है, न कि उसे शादी टूटने के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए था।”
  • डोमिनेरिंग रवैया: कोर्ट ने नोट किया कि पति का स्वभाव “नियंत्रण और प्रभुत्व” (Domineering and Control) वाला था, जिसके कारण पत्नी को अपनी स्वतंत्रता और करियर के लिए कदम उठाने पड़े।
  • अमानवीय निष्कर्ष: कोर्ट ने कहा कि अपनी डेंटिस्ट्री प्रैक्टिस जारी रखने और बच्चे की सेहत के लिए अलग रहने को ‘क्रूरता’ कहना “अत्याचारी” (Atrocious) है।

तलाक का नया आधार: ‘इरिट्रिवेबल ब्रेकडाउन’

  • सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को बरकरार रखा लेकिन उसके आधार बदल दिए।
  • आरोप हटाए गए: पत्नी पर लगे ‘क्रूरता’ और ‘परित्याग’ के कानूनी आधारों को एक्सपंज (Expunge) यानी रिकॉर्ड से हटा दिया गया।
  • नया आधार: चूंकि पति ने दूसरी शादी कर ली थी और पत्नी भी वापस नहीं जाना चाहती थी, इसलिए तलाक को ‘शादी के अपरिवर्तनीय टूटने’ (Irretrievable breakdown of marriage) के आधार पर मंजूर किया गया।

21वीं सदी की न्यायशास्त्र

यह फैसला भारतीय न्यायपालिका में एक मील का पत्थर है, जो स्पष्ट करता है कि कानून अब “आज्ञाकारी पत्नी” के पुराने सामंती ढांचे को स्वीकार नहीं करता। अदालत ने माना है कि महिला की पेशेवर आकांक्षाएं और उसकी गरिमा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि वैवाहिक दायित्व।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
39 ° C
39 °
39 °
31 %
1.9kmh
0 %
Sun
39 °
Mon
42 °
Tue
38 °
Wed
29 °
Thu
31 °

Recent Comments