Public Transport Safety: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में सड़क सुरक्षा और यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| मुख्य निर्देश | विवरण |
| VLTD और पैनिक बटन | सभी टैक्सियों और सार्वजनिक वाहनों के लिए अनिवार्य। |
| फिटनेस सर्टिफिकेट | सुरक्षा उपकरणों के बिना फिटनेस या परमिट जारी नहीं होगा। |
| ट्रैकिंग | ‘वाहन’ पोर्टल के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी। |
| स्पीड गवर्नर | निर्माताओं को वाहनों में अनिवार्य रूप से SLD फिट करना होगा। |
| रोड सेफ्टी बोर्ड | 3 महीने के भीतर अनिवार्य गठन। |
एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले में हुई सुनवाई
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि वर्तमान में 1% से भी कम परिवहन वाहनों में ये सुरक्षा उपकरण लगे हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे टैक्सियों और सभी सार्वजनिक सेवा वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से स्थापित करना सुनिश्चित करें। यह आदेश एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले में आया है, जो 2012 से सड़क सुरक्षा सुधारों के लिए लंबित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी।
सख्त प्रवर्तन और नियम 125H
- अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 125H को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
- अनिवार्य शर्त: अब किसी भी सार्वजनिक सेवा वाहन (बस, टैक्सी आदि) को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट (FC) या परिवहन परमिट नहीं दिया जाएगा, जब तक कि उसमें VLTD और इमरजेंसी पैनिक बटन न लगा हो।
- Vahan ऐप से एकीकरण: इन उपकरणों की कार्यक्षमता को ‘वाहन’ (Vahan) डेटाबेस के साथ जोड़ा जाना अनिवार्य है ताकि रीयल-टाइम निगरानी की जा सके।
- पुराने वाहनों के लिए: 21 दिसंबर 2018 से पहले पंजीकृत वाहनों में भी इन उपकरणों को रेट्रोफिट (बाद में लगवाना) करना अनिवार्य कर दिया गया है।
निर्माताओं की जिम्मेदारी और स्पीड गवर्नर
- अदालत ने सड़क सुरक्षा के अन्य पहलुओं पर भी कड़ा रुख अपनाया।
- प्री-इंस्टॉल्ड डिवाइस: कोर्ट ने सुझाव दिया कि वाहन निर्माताओं को वाहन बेचते समय ही ये डिवाइस पहले से फिट करके देने चाहिए। केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्माताओं से बात कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
- स्पीड गवर्नर (SLD): गति सीमा उपकरणों के प्रवर्तन पर रिपोर्ट न देने के लिए राज्यों की आलोचना की गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी निर्माताओं के लिए वाहनों में स्पीड-लिमिटिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य है।
नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड (NRSB)
- कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पिछले आदेशों के बावजूद अभी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन नहीं हुआ है।
- अंतिम अवसर: कोर्ट ने बोर्ड के गठन के लिए 3 महीने का अंतिम अवसर दिया है।
उत्तर प्रदेश में दुर्घटना मामलों की बहाली
यूपी सरकार ने बैकलॉग कम करने के लिए पुराने सड़क दुर्घटना मामलों को बंद करने का संशोधन किया था। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य ने अप्रैल में एक अध्यादेश पारित किया ताकि गंभीर अपराधों वाले मामलों को बंद न किया जाए। कोर्ट अब इस पर विचार करेगा कि कितने मामले बहाल होंगे और उनकी प्रक्रिया क्या होगी।
सुरक्षित यात्रा की दिशा में बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही तय करने वाला है। VLTD और पैनिक बटन के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में वाहन की सटीक लोकेशन का पता चल सकेगा, जिससे अपराधियों में भय पैदा होगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

