Thursday, August 20, 2026
HomeHigh CourtFMGE Case: देश में सरकारी नौकरियां जितनी उपलब्ध हैं, खरीदार (उम्मीदवार) कहीं...

FMGE Case: देश में सरकारी नौकरियां जितनी उपलब्ध हैं, खरीदार (उम्मीदवार) कहीं अधिक…फर्जी मेडिकल पार्सिंग प्रमाण पत्र मामले में यह टिप्पणी जरूर पढ़ें

FMGE Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

हाईकोर्ट के जस्टिस प्रवीर भटनागर (Justice Praveer Bhatnagar) की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनने या सरकारी नौकरियां पाने की बढ़ती प्रवृत्ति से योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन होता है और संस्थागत प्रणालियों पर से जनता का विश्वास उठता है। हाई कोर्ट ने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आए छात्रों के लिए होने वाली ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन’ (FMGE) का फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट बनवाने और उसका उपयोग करने के दो आरोपियों की जमानत याचिका (Bail Plea) को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

निचली अदालत के फैसले को दी गई थी चुनौती

यह मामला ‘पीयूष कुमार त्रिवेदी बनाम राजस्थान राज्य’ का है, जिसमें मुख्य आरोपी पीयूष कुमार त्रिवेदी और सह-आरोपी शुभम गुर्जर ने निचली अदालत द्वारा जमानत न दिए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

क्या है पूरा मामला? (Case Background)

  • बार-बार फेल होने पर साजिश: अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, आरोपी पीयूष कुमार त्रिवेदी विदेश से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी FMGE परीक्षा में कई बार फेल हो चुका था।
  • फर्जी रोल नंबर और सर्टिफिकेट: इसके बाद उसने सह-आरोपी शुभम गुर्जर, देवेंद्र सिंह गुर्जर और भाना राम सैनी उर्फ भानू के साथ मिलकर पैसों के दम पर एक फर्जी FMGE पासिंग सर्टिफिकेट और फर्जी रोल नंबर हासिल किया।
  • इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन: इस फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर पीयूष ने ‘राजस्थान मेडिकल काउंसिल’ (RMC) में इंटर्नशिप काउंसलिंग के लिए आवेदन किया और अपनी इंटर्नशिप भी पूरी कर ली।
  • NBEMS की जांच में खुलासा: जब नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने इस सर्टिफिकेट की जांच की, तो पता चला कि पीयूष द्वारा इस्तेमाल किया गया रोल नंबर असल में किसी अन्य वास्तविक और योग्य उम्मीदवार का था। इसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery), आपराधिक साजिश और प्रतिरूपण (Impersonation) के तहत चार्जशीट दाखिल की।

हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण और तल्ख टिप्पणियां

  • जमानत याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस प्रवीर भटनागर ने भारत में नौकरियों की स्थिति और फर्जीवाड़े के बड़े सामाजिक असर पर गहरी चिंता जताई।
  • योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर कुठाराघात: कोर्ट ने कहा, “ऐसी हरकतें न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता की जड़ पर प्रहार करती हैं, बल्कि उन वास्तविक और मेधावी उम्मीदवारों के अधिकारों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं जो कानूनी और ईमानदारी के रास्ते से प्रतिस्पर्धा करते हैं।”
  • भारत में नौकरियों की कड़वी सच्चाई: कोर्ट ने देश की जमीनी हकीकत को रेखांकित करते हुए कहा, भारत में वास्तविकता यह है कि सरकारी नौकरियां जितनी उपलब्ध हैं, उनके खरीदार (उम्मीदवार) उससे कहीं अधिक हैं। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पेशेवर अवसर हथियाने के चलन के प्रति अदालतें मूकदर्शक या उदासीन नहीं बनी रह सकतीं।

आरोपियों की दलीलें कोर्ट ने की खारिज

अदालत में आरोपियों के वकीलों ने तर्क दिया था कि पीयूष के परिवार और शिकायतकर्ता के बीच व्यक्तिगत विवाद के कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि शुभम गुर्जर का नाम केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर शामिल किया गया है और उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को अमान्य करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की संगठित धोखाधड़ी की गतिविधियों का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है, इसलिए आरोपियों को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य कानूनी बिंदुराजस्थान उच्च न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस प्रवीर भटनागर
आरोपीपीयूष कुमार त्रिवेदी और शुभम गुर्जर
संबद्ध संस्थानराजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBEMS)
मुख्य चिंताबिना योग्यता के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर देश में चिकित्सा (Doctor) कार्य करने का प्रयास।
अंतिम आदेशगंभीर अपराध और व्यापक सामाजिक प्रभाव को देखते हुए नियमित जमानत देने से साफ इनकार।

जन-स्वास्थ्य और न्याय प्रणाली के लिए बड़ा संदेश

राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जी डिग्री या प्रमाणपत्रों के जरिए चिकित्सा जैसे संवेदनशील पेशे में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। चूंकि यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा मामला है, इसलिए अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे संगठित अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को कोई कानूनी राहत नहीं दी जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
28 ° C
28 °
28 °
89 %
4.6kmh
89 %
Thu
35 °
Fri
38 °
Sat
37 °
Sun
36 °
Mon
35 °

Recent Comments