Sunday, July 5, 2026
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Old Age Homes: बुजुर्गों के लिए नया शब्द…Inmates शब्द नहीं, Residents प्रयोग करें, पटना के एक वृद्धाश्रम से बुजुर्गों के स्थानांतरण केस पर आई यह टिप्पणी

Old Age Homes: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने बिहार के वृद्धाश्रमों (Old Age Homes) में रहने वाले बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की।

हाईकोर्ट करेगा बुजुर्गों के स्थानांतरण से जुड़े मुद्दों की निगरानी बेहतर

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर बुजुर्गों के स्थानांतरण से जुड़े मुद्दों की निगरानी और न्यायनिर्णयन (Adjudication) क्षेत्राधिकार वाले हाई कोर्ट द्वारा अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने इस मामले के स्थानीय कारकों को देखते हुए याचिकाकर्ता को पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) जाने की स्वतंत्रता दी है और पटना हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान (Cognizance) ले। यह याचिका ‘मधुकर आनंद’ नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसमें बिहार सरकार द्वारा वृद्धाश्रमों को लेकर जारी कुछ सरकारी सर्कुलर (Circulars) को चुनौती दी गई थी।

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याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें और गंभीर आरोप

  • दिशानिर्देशों का उल्लंघन: याचिकाकर्ता के वकील गोपाल झा ने दलील दी कि बिहार में कई वृद्धाश्रमों को बंद किया जा रहा है और वहां रहने वाले बुजुर्गों को जबरन दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ‘डॉ. अश्विनी कुमार बनाम भारत संघ’ ऐतिहासिक मामले में जारी दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
  • तस्करी का अंदेशा: वकील ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरपुर वृद्धाश्रम से लगभग 25-30 निवासियों को पटना, पूर्णिया, गया आदि जिलों के ‘सहारा होम’ में स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए ‘अंग तस्करी’ (Organ Trading) जैसे गंभीर आरोप भी लगाए और कहा कि इस संबंध में एक प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है।
  • मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी: इन आरोपों पर सीजेआई सूर्य कांत ने वकील को टोकते हुए कहा, “केवल मीडिया रिपोर्ट्स के भरोसे न रहें। आप अनंत काल तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार करने के बजाय सीधे हाई कोर्ट जाएं। हम हाई कोर्ट से इस मुद्दे की तुरंत जांच करने का अनुरोध करेंगे… हम हाई कोर्ट को मामला सौंपकर आपके हाथ मजबूत कर रहे हैं।”

सीजेआई की वकीलों को सीख: बुजुर्गों के लिए “Inmates” शब्द का प्रयोग न करें

सुनवाई के दौरान एक उल्लेखनीय पल तब आया जब मुख्य न्यायाधीश ने याचिका में बुजुर्गों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ता द्वारा वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को “इनमेट्स” (Inmates – आमतौर पर कैदियों या बंदियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द) कहे जाने पर सीजेआई ने कड़ा रुख अपनाया।
“कृपया उनके लिए ‘Inmates’ शब्द का प्रयोग न करें, वे ‘निवासी’ (Residents) हैं। इस टिप्पणी के जरिए कोर्ट ने समाज के बुजुर्गों के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने का एक बड़ा संदेश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

  • सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को निपटाते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किया।
  • हाई कोर्ट को स्वतंत्रता: याचिकाकर्ता को इस मामले में पटना हाई कोर्ट के समक्ष एक नई जनहित याचिका (PIL) दायर करने की छूट दी गई है।
  • अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश: पटना हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह इस मामले का संज्ञान ले और यह सुनिश्चित करे कि बुजुर्गों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों का बिहार सरकार द्वारा पूरी तरह पालन (Comply) किया जा रहा है या नहीं।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य विवरणसुप्रीम कोर्ट का रुख और निर्देश
माननीय न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची
मूल विवादमुजफ्फरपुर और बिहार के अन्य वृद्धाश्रमों से बुजुर्गों का अंतर-जिला स्थानांतरण।
सुप्रीम कोर्ट का रुखस्थानीय प्रशासनिक और नीतिगत मामलों के कारण पटना हाई कोर्ट को प्रभावी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया।
मानवीय गरिमाबुजुर्गों के लिए सम्मानजनक शब्दावली (‘Residents’) का उपयोग करने की हिदायत।

स्थानीय न्यायपालिका पर भरोसा

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दर्शाता है कि शीर्ष अदालत स्थानीय और राज्य-स्तरीय प्रशासनिक विसंगतियों की त्वरित निगरानी के लिए संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों को सशक्त बनाना चाहती है। पटना हाई कोर्ट अब इस बात की कड़ाई से जांच करेगा कि बिहार के वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनके स्थानांतरण के पीछे प्रशासन की क्या मंशा है।

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