Monday, June 1, 2026
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Road Project: आमचंग अभयारण्य और उसके पास स्थित हाथी गलियारे की रक्षा कैसे होगी….यह जानिए गुवाहाटी रिंग रोड निर्माण से जुड़े इस केस से

Road Project: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 5,730 करोड़ रुपये की लागत वाली गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना (Guwahati Ring Road Project) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण पर्यावरणीय आदेश दिया है।

आमचंग वन्यजीव अभयारण्य के नुकसान को लेकर सुनवाई

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने अर्कासिष चलिहा और महेश डेका द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) को आमचंग वन्यजीव अभयारण्य (Amchang Wildlife Sanctuary) को होने वाले संभावित पारिस्थितिक नुकसान का गहन प्रभाव अध्ययन (Impact Study) करना होगा।

हाई कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights of the Order)

गुवाहाटी वन्यजीव प्रभाग ने इस साल फरवरी में आमचंग अभयारण्य (जिसे राज्य की राजधानी का ‘फेफड़ा’ कहा जाता है) के भीतर सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटने का एक ई-टेंडर जारी किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह ई-टेंडर केवल ठेकेदार चुनने के लिए था, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि प्रभाव अध्ययन (Impact Study) के बिना तुरंत काम शुरू कर दिया जाए। सरकारी वकील ने अदालत को भरोसा दिया है कि जब तक WII की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।

फंड और समय सीमा (Funding & Timeline)

WII की तैयारी: वन्यजीव संस्थान को राज्य सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मिल चुकी है। संस्थान दो सप्ताह के भीतर इस अध्ययन का तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव तैयार करेगा।

90 दिनों में रिपोर्ट: नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा फंड जारी होने के 90 दिनों के भीतर WII को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। NHAI के वकील ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि फंड जारी करने में कोई देरी नहीं की जाएगी।

रात में निर्माण पर रोक: अदालत ने नोट किया कि ‘राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड’ (NBWL) की स्थायी समिति ने इस परियोजना को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी थी, जिसमें पूर्ण प्रभाव अध्ययन और रात के समय निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध (Proscription of night constructions) शामिल हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का रुख: विकास भी जरूरी, पर्यावरण भी

अदालत ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता इस महत्वाकांक्षी रिंग रोड परियोजना के खिलाफ नहीं हैं। गुवाहाटी में ट्रैफिक प्रबंधन और भारी वाहनों की सुचारू आवाजाही के लिए बाईपास सड़क की सख्त जरूरत है। हालांकि, इसके साथ ही आमचंग अभयारण्य और उसके पास स्थित हाथी गलियारे (Elephant Corridor) की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि यह कई दुर्लभ जीवों का घर है। राज्य सरकार और NHAI के इस हलफनामे के बाद कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे, हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका को बंद कर दिया।

क्या है गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना? (Project Details)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में इस 5,730 करोड़ रुपये की परियोजना का शिलान्यास किया था। इस कुल लागत में से 4,530 करोड़ रुपये सड़कों के विकास पर और 1,200 करोड़ रुपये ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाले एक विशाल पुल पर खर्च होंगे। यह पुल दक्षिणी तट पर स्थित नरेंगी को उत्तरी तट पर स्थित कुरुवा से जोड़ेगा। यह 121.43 किलोमीटर लंबी रिंग रोड गुवाहाटी शहर को जाम से मुक्ति दिलाएगी और पश्चिम बंगाल, बिहार व अन्य राज्यों से आने वाले ट्रकों की आवाजाही को आसान बनाएगी।

परियोजना के तीन मुख्य चरण (Three Sections of the Ring Road)

चरण (Section)लंबाई / मार्ग (Route)मुख्य विशेषताएं (Key Features)
पहला चरण55 किमी (बाईहाटा चारियाली से सोनापुर वाया कुरुवा और चंद्रपुर)4-लेन की सड़क, ब्रह्मपुत्र नदी पर 2.9 किमी लंबा कुरुवा-नरेंगी पुल (6-लेन), 5 अन्य पुल, 3 फ्लाईओवर और 3 रेलवे ओवर-ब्रिज।
दूसरा चरणNH-27 पर जयनगर अंडरपास से जोराबाट तकमौजूदा 4-लेन सड़क को 6-लेन में अपग्रेड किया जाएगा; इसमें 2 नए फ्लाईओवर शामिल होंगे।
तीसरा चरणराष्ट्रीय राजमार्ग 27 (NH-27) पर बाईहाटा चारियाली से सोनापुर तकवर्तमान 4 और 6-लेन की सड़कों का व्यापक सुदृढ़ीकरण और अपग्रेडेशन।

निष्कर्ष (Takeaway)

गुवाहाटी हाईकोर्ट का यह आदेश ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) का एक बेहतरीन उदाहरण है। कोर्ट ने बुनियादी ढांचे के विकास (रिंग रोड) के महत्व को स्वीकार करते हुए भी पर्यावरण और वन्यजीवों (विशेषकर आमचंग अभयारण्य और एलीफेंट कॉरिडोर) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) का यह अध्ययन सुनिश्चित करेगा कि गुवाहाटी की प्रगति असम की प्राकृतिक धरोहर की कीमत पर न हो।

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