Sunday, November 1, 2026
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The RTI Queries: देशभर में ई-कोर्ट फीस समेत न्यायिक अदालती शुल्क कितने जमा हुए…यह जवाब देना सरकार के लिए सरदर्द, जानिए केस को

The RTI Queries: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत देश भर में न्यायिक अदालती शुल्क (Judicial Court Fee) संग्रह से जुड़ा डेटा मांगना एक आवेदक के लिए सिरदर्द बन गया।

केंद्रीय सूचना आयोग ने नए सिरे से जवाब देने का आदेश दिया

चार अलग-अलग सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में आवेदन ट्रांसफर होने के बाद भी अधूरी जानकारी मिलने पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने न केवल नए सिरे से संशोधित जवाब देने का आदेश दिया है, बल्कि केंद्रीय कानून मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) भी जारी किया है।

क्या जानकारी मांगी गई थी? (The RTI Queries)

RTI आवेदक ने अखिल भारतीय स्तर (All-India Basis) पर महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं, इनमें ई-कोर्ट फीस (e-court fees) सहित वार्षिक न्यायिक अदालती शुल्क संग्रह का विवरण, 1 जून 2014 से अब तक एकत्र की गई कुल राशि का राज्यवार वार्षिक आंकड़ा, इस प्रकार एकत्र किए गए अदालती शुल्क के उपयोग (Utilisation) और उससे जुड़े आवंटन का ब्यौरा शामिल हैं। मूल रूप से यह आवेदन कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग (Department of Legal Affairs) में दायर किया गया था, लेकिन इसके बाद इसे फुटबॉल की तरह एक विभाग से दूसरे विभाग ट्रांसफर किया जाता रहा।

4 विभागों के बीच घूमता रहा आवेदन (The Transfer Carousel)

कानूनी मामलों का विभाग (कानून मंत्रालय)
│
▼ (ट्रांसफर)
वित्तीय सेवा विभाग (DFS)
│
▼ (ट्रांसफर)
संस्थागत वित्त-I (IF-I) प्रभाग
│
▼ (ट्रांसफर)
भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (IFCI)
│
▼ (ट्रांसफर)
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL)

किसने क्या जवाब दिया?

  • IF-I प्रभाग ने कहा कि उसके पास जानकारी नहीं है और इसे IFCI को भेज दिया।
  • IFCI ने कहा कि मामला SHCIL से संबंधित लग रहा है, इसलिए वहां ट्रांसफर कर दिया।
  • SHCIL ने केवल उन 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ई-कोर्ट शुल्क संग्रह का विवरण दिया जहां वह अपनी सेवाएं देता है। लेकिन जून 2014 से कुल संग्रह और इसके उपयोग (Utilisation) से जुड़े सवालों पर कह दिया कि यह जानकारी ‘उन पर लागू नहीं होती’।

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का सख्त रुख और कार्रवाई

निर्देश: सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि मुख्य जानकारी (विशेषकर कोर्ट फीस के उपयोग से जुड़ी, जो सीधे कानून मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है) गायब है, तो आयोग ने कड़े निर्देश जारी किए।

SHCIL को निर्देश: आयोग ने स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन के CPIO को निर्देश दिया है कि वे अपने जवाब की विसंगतियों को सुधारें और बिंदु संख्या 1 और 2 पर एक संशोधित और संपूर्ण जवाब आवेदक को सौंपें।

कानून मंत्रालय के CPIO को कारण बताओ नोटिस: सीआईसी ने कानूनी मामलों के विभाग के CPIO को RTI अधिनियम की धारा 20 के तहत नोटिस जारी कर पूछा है कि पूरी अर्जी को गलत तरीके से वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को ट्रांसफर करने और बिना किसी पूर्व सूचना के सुनवाई से गायब रहने के लिए उन पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

प्रथम अपीलीय अधिकारी को भी नोटिस: कानून मंत्रालय के ही प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (First Appellate Authority) को भी एक अलग कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, क्योंकि उन्होंने 12 अक्टूबर 2024 को आवेदक द्वारा भेजे गए पत्र का कोई जवाब नहीं दिया था।

मामला एक नज़र में (Case Matrix)

पैरामीटरविवरण
मुख्य विषयपूरे भारत में कोर्ट फीस और ई-कोर्ट फीस संग्रह एवं उसके उपयोग का डेटा।
सुनवाई संस्थाकेंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
लापरवाही का स्तरआवेदन को 4 अलग-अलग विभागों/इकाइयों में घुमाया गया।
दोषी विभाग (प्रथम दृष्टया)कानून और न्याय मंत्रालय का कानूनी मामलों का विभाग।
नियामक कदमगलत ट्रांसफर और अनुपस्थिति के लिए RTI अधिनियम की धारा 20 के तहत शो-कॉज नोटिस।

निष्कर्ष (Takeaway)

यह मामला सरकारी विभागों के भीतर जवाबदेही से बचने और आरटीआई आवेदनों को बिना सोचे-समझे आगे बढ़ाने (Irresponsible Transfers) की प्रवृत्ति को उजागर करता है। सीआईसी के इस कड़े कदम से साफ है कि जनहित से जुड़े वित्तीय और न्यायिक डेटा को दबाया नहीं जा सकता और अधिकारियों को आवेदकों के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा।

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