Tuesday, September 8, 2026
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Celebratory Firing: बिहार के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह दोषी करार…फॉर्म हाउस में नव वर्ष पार्टी में चली थी गोली, पढ़िए मामला

Celebratory Firing: देश में शादियों और पार्टियों के दौरान होने वाली हर्ष फायरिंग (Celebratory Firing) को एक गंभीर सामाजिक नासूर बताते हुए दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शनिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

9 जून 2026 को होगी सजा पर बहस

कोर्ट ने बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह (Raju Kumar Singh) को साल 2018 के एक न्यू ईयर पार्टी मामले में गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का दोषी करार दिया है। इस घटना में एक महिला की मौत हो गई थी। स्पेशल जज विशाल गोगने ने 56 वर्षीय विधायक राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 पार्ट-II (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) और आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया है। अदालत इस मामले में सजा की अवधि (Quantum of Sentence) पर 9 जून को बहस सुनेगी। हालांकि, कोर्ट ने सबूतों के अभाव में विधायक की पत्नी और दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है।

क्या था पूरा मामला? (2018 की वो खूनी न्यू ईयर पार्टी)

फतेहपुर बेरी का फार्महाउस: यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की दरमियानी रात की है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित एक फार्महाउस में न्यू ईयर (नए साल) की पार्टी चल रही थी।

भीड़ के बीच अंधाधुंध फायरिंग: पार्टी में लोग डांस फ्लोर पर नाच रहे थे और एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे। इसी दौरान बिहार से कई बार विधायक रह चुके राजू कुमार सिंह ने अपनी .22 बोर की लाइसेंसी पिस्तौल से हवा में कई राउंड गोलियां दागनी शुरू कर दीं।

अर्चना गुप्ता की मौत: विधायक की पिस्तौल से निकली एक घातक गोली वहां मौजूद एक मेहमान महिला अर्चना गुप्ता को जा लगी। गंभीर रूप से घायल अर्चना गुप्ता ने बाद में दम तोड़ दिया।

भीड़भाड़ वाली जगह पर गोली चलाना साफ तौर पर एक खतरनाक कृत्य: कोर्ट

विशेष अदालत ने अपने 97 पन्नों के विस्तृत आदेश में हर्ष फायरिंग की इस कुप्रथा पर बेहद तल्ख टिप्पणियां की हैं। कहा, “त्योहारों या उत्सवों के दौरान हर्ष फायरिंग की हरकतें हमारे देश में एक ऐसी लानत (Scourge) बन चुकी हैं, जो अक्सर लोगों की जान ले लेती हैं। यह मामला भी इसी तरह की त्रासदी को दर्शाता है।”

अदालत ने विधायक को दोषी ठहराते हुए प्रमुख बिंदु रेखांकित किए

यह जानते हुए चलाई गोली: कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आधी रात को लोगों से खचाखच भरे डांस फ्लोर के पास घातक हथियार (पिस्तौल) से कई राउंड फायर करता है, तो उसे इस बात का पूरा ज्ञान (Knowledge) होना चाहिए कि उसकी इस हरकत से वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती है या वह गंभीर रूप से घायल हो सकता है।

हथियार के लाइसेंस का खुला उल्लंघन: अदालत ने पाया कि राजू कुमार सिंह को .22 बोर की पिस्तौल का लाइसेंस केवल खेल (Sports), आत्मरक्षा (Protection) या नुमाइश (Display) के लिए दिया गया था। किसी भी पार्टी में हर्ष फायरिंग करना लाइसेंस की शर्तों में शामिल नहीं था। विधायक ने आर्म्स लाइसेंस की शर्तों का घोर उल्लंघन किया है।

सबूत मिटाने के आरोप में पत्नी समेत 3 बरी

इस मामले में पुलिस ने विधायक की पत्नी रेणु सिंह और दो अन्य सहयोगियों (रामेंद्र सिंह और राणा राजेश सिंह) को भी आरोपी बनाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपराध के बाद डांस फ्लोर से पीड़िता के खून को साफ किया, कारतूस के खोखे छिपाए और विधायक को मौके से भागने में मदद की ताकि सबूत मिटाए (Destruction of Evidence) जा सकें। हालांकि, अदालत ने इन तीनों को बरी (Acquit) कर दिया। कोर्ट ने नोट किया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) इन तीनों के खिलाफ अदालत में कोई भी पुख्ता या पुष्टीकरण करने वाले सबूत पेश करने में नाकाम रहा।

विश्लेषण: हर्ष फायरिंग के खिलाफ कानूनी कड़ाई और विधायक का राजनीतिक सफर

पहलूविवरण और कानूनी प्रभाव
राजनीतिक बैकग्राउंड५६ वर्षीय राजू कुमार सिंह बिहार की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं। भाजपा में आने से पहले वे जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के सदस्य भी रह चुके हैं।
आईपीसी धारा 304 पार्ट-II के मायनेइस धारा के तहत अधिकतम 10 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। ९ जून को आने वाला फैसला तय करेगा कि विधायक को कितने साल जेल में बिताने होंगे।
विधायकी पर खतरासुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (लिली थॉमस केस) के अनुसार, यदि किसी मौजूदा सांसद या विधायक को २ साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी सदन की सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है और वे जेल से छूटने के बाद अगले ६ साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

दिल्ली की अदालत का यह फैसला समाज के उन ‘रसूखदार’ और ‘वीआईपी’ लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो अपनी बंदूकों और रसूख के प्रदर्शन को शान का प्रतीक समझते हैं। शादी-ब्याह या जश्न का माहौल किसी को भी दूसरों की जिंदगी से खेलने का लाइसेंस नहीं देता। कानून की नजर में एक आम नागरिक और कई बार का विधायक बराबर हैं, और अदालत ने साफ कर दिया है कि ऐसे लापरवाह और जानलेवा कृत्यों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। अब 9 जून 2026 को तय होगा कि साहेबगंज के इस माननीय को अपने इस ‘manifestly dangerous’ (स्पष्ट रूप से खतरनाक) कृत्य के लिए कितने साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे।

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