Tuesday, October 27, 2026
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Women Advocate Safety: महिला वकीलों का देर रात अपहरण, डकैती और पुलिस हिरासत में प्रताड़ना का आरोप; CBI या न्यायिक जांच की मांग

याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

  • आधी रात को छापेमारी (17 जून 2026): याचिका के अनुसार, 17 जून 2026 को रात करीब 1:40 बजे लगभग 200 पुलिसकर्मी (बिना नामपट्टिका के सिविल कपड़ों में) प्राइवेट गाड़ियों और पुलिस वैन में गैस कटर और लाठियों के साथ एडवोकेट कीर्ति आहूजा के पुणे स्थित आवास में जबरन घुसे।
  • अवैध हिरासत और शारीरिक उत्पीड़न: घर में मौजूद मेहमानों, किरायेदारों, एक बुजुर्ग महिला और एक शिशु सहित 24 लोगों को बिना किसी सर्च वारंट के अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। महिला वकील ने आरोप लगाया कि पुरुष अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की, कपड़े फाड़े और गंभीर चोटें पहुंचाईं।
  • बिल्डर लॉबी से मिलीभगत का आरोप: वकीलों का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई एक प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर के खिलाफ उनके द्वारा लड़े जा रहे बहु-करोड़ रुपये के दीवानी मामले (Civil Litigation) को कमजोर करने के इरादे से की गई थी। पुलिस पर सीसीटीवी बंद करने, नकदी, गहने और मूल अदालती फाइलें लूटने का आरोप है।
  • एफआईआर (FIR) के रिकॉर्ड में गड़बड़ी: पुलिस का दावा था कि कार्रवाई एफआईआर के आधार पर हुई, जबकि स्टेशन रिकॉर्ड से पता चला कि एफआईआर सुबह 4:12 बजे दर्ज की गई थी—यानी उन्हें हिरासत में लिए जाने के कई घंटों बाद।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दो महिला अधिवक्ताओं के कथित अपहरण, मारपीट, डकैती और हिरासत में प्रताड़ना (Custodial Torture) के बेहद गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है।

न्यायमूर्ति सारंग वी. कोतवाल और न्यायमूर्ति रणजीतसिन्हा आर. भोंसले की खंडपीठ ने अधिवक्ता कीर्ति आहूजा और कनिका आहूजा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पुणे के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है [कीर्ति आहूजा और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य]।

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याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

1. मध्यरात्रि की छापेमारी और अवैध हिरासत (17 जून 2026)

  • याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 जून 2026 को तड़के लगभग 1:40 बजे करीब 200 पुलिसकर्मी निजी एसयूवी और पुलिस वाहनों में गैस कटर व लाठियों से लैस होकर पुणे स्थित उनके आवासीय परिसर में जबरन घुसे।
  • अधिकांश पुलिसकर्मी बिना नेमप्लेट के सादे कपड़ों (Civil Clothes) में थे। बिना किसी सर्च वारंट के एक बुजुर्ग महिला और एक नवजात शिशु सहित कुल 24 लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया।

2. महिला वकील के साथ मारपीट और क्रूरता

  • अधिवक्ता कनिका आहूजा ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ शारीरिक मारपीट की, उनके कपड़े फाड़े और उनकी छाती व पीठ पर गंभीर चोटें पहुंचाईं।
  • आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिजली के तार काट दिए, सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और घर से कीमती सामान, नकदी व मुकदमों की मूल कानूनी फाइलें (Original Legal Case Files) लूट लीं।

3. रियल एस्टेट बिल्डरों के इशारे पर कार्रवाई का दावा

  • महिला वकीलों ने दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स के इशारे पर की गई थी, ताकि उन बिल्डरों के खिलाफ चल रहे करोड़ों रुपये के दीवानी मुकदमों (Civil Litigation) को कमजोर और नष्ट किया जा सके।

पुलिस रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां

याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के समय पर गंभीर विसंगतियों को उजागर किया:

  • हिरासत के घंटों बाद FIR: पुलिस का दावा था कि यह छापेमारी एक एफआईआर के आधार पर की गई थी, लेकिन थाने के रिकॉर्ड से पता चला कि कथित एफआईआर तड़के 4:12 बजे दर्ज की गई थी—यानी उन्हें घर से हिरासत में लेने के कई घंटे बाद।
  • डीजीपी कार्यालय का उदासीन रवैया: वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्होंने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) से प्रशासनिक शिकायत की थी, लेकिन उस शिकायत को जांच के लिए सीधे उन्हीं आरोपी अधिकारियों को वापस भेज दिया गया।

पक्षकार और याचिका में की गई प्रमुख मांगें

  • प्रतिवादी बनाए गए अधिकारी: याचिका में महाराष्ट्र राज्य और सीबीआई के अलावा पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त तेजस्वी सातपुते सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
  • याचिकाकर्ताओं की मुख्य प्रार्थनाएं:
    1. उच्च न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र न्यायिक जांच या CBI जांच कराई जाए।
    2. सत्ता के दुरुपयोग, अवैध हिरासत और हमले के दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

Women Advocate Safety:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठन्यायमूर्ति सारंग वी. कोटवाल एवं न्यायमूर्ति रणजीतसिंह आर. भोसले
याचिकाकर्ताएडवोकेट कीर्ति आहूजा और एडवोकेट कनिका आहूजा
मुख्य प्रतिवादीमहाराष्ट्र सरकार, सीबीआई, पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार, अतिरिक्त आयुक्त तेजस्वी सातपुते
मुख्य मांगउच्च न्यायालय के जज द्वारा स्वतंत्र न्यायिक जांच या सीबीआई (CBI) जांच की मांग।
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