Tuesday, June 9, 2026
HomeScam NoseScam Within The Scam: 100 करोड़ की संपत्ति 10 करोड़ में बेच...

Scam Within The Scam: 100 करोड़ की संपत्ति 10 करोड़ में बेच दी…जी हां, NSEL घोटाले में गलत वैल्यूएशन का यह खेला केस पढ़कर जानिए

Scam Within The Scam: देश की शीर्ष अदालत ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) घोटाले से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाया है।

सुनवाई के दौरान जज की टिप्पणी पढ़िए

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने मूल्यांकक के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, हम इस आदेश पर किसी भी तरह की रोक लगाने नहीं जा रहे हैं। आप एक संदिग्ध प्रक्रिया के जरिए 100 करोड़ रुपये की संपत्ति को किसी व्यक्ति को केवल 10 करोड़ रुपये में बेच रहे हैं! खरीदने वाला कोई सरकारी संगठन नहीं है, बल्कि उसी इलाके का एक निजी बिल्डर है, जो पूरी तरह जानता है कि उस जमीन की असली कीमत क्या है। आप इस तरह की पैरवी लेकर यहां कैसे आ सकते हैं?”

सरकारी मूल्यांकक (Valuer) की भूमिका पर तीखे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें हरियाणा की एक बेशकीमती जमीन की नीलामी में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। अदालत ने उस सरकारी मूल्यांकक (Valuer) की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए, जिसके आकलन के आधार पर 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति को कौड़ियों के भाव महज 10 करोड़ रुपये में एक निजी बिल्डर को बेच दिया गया था।

फर्म ने विशेष अनुमति वाली याचिका वापस ले ली

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस पूरे मामले को “घोटाले के भीतर घोटाला” (Scam within the scam) करार दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता फर्म ‘क्विकर रियल्टी’ (Quiker Realty) को कोई भी अंतरिम राहत देने से मना कर दिया, जिसके बाद फर्म ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस ले ली। अब वह हाई कोर्ट में ही पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।

कैसे घटाया गया जमीन का दाम? (The Siphoning Modus)

यह पूरा मामला हरियाणा में स्थित 35 एकड़ भूमि के एक टुकड़े की नीलामी से जुड़ा है, जिसे एनएसईएल घोटाले के तहत कुर्क (Attach) किया गया था।

शुरुआती वैल्यूएशन (₹95 करोड़): शुरुआत में इस जमीन की सरकारी सर्कल रेट वैल्यू 95 करोड़ रुपये और संकटकालीन बिक्री मूल्य (Distress Value) लगभग 56 करोड़ रुपये आंका गया था। इसके बाद 60 करोड़ रुपये की आरक्षित कीमत (Reserve Price) के साथ दो बार नीलामी की गई, लेकिन कोई खरीदार नहीं आया।

साजिश के तहत नया वैल्यूएशन (₹10 करोड़): जून 2020 में एक नया वैल्यूएशन कराया गया। इसमें चालाकी से इस आवासीय सेक्टर (Residential Sector) की जमीन को ‘कृषि भूमि’ (Agricultural Land) घोषित कर दिया गया और इसकी कीमत सीधे गिराकर मात्र 10.41 करोड़ रुपये कर दी गई।

मनपसंद बिल्डर को फायदा: अंततः इस कीमती जमीन को ‘रुद्रवीर्य डेवलपर्स लिमिटेड’ नामक एक निजी बिल्डर को केवल 10.09 करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया गया।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीते 8 मई के अपने फैसले में इस पूरी नीलामी को रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने पाया कि न तो जमीन का कोई भौतिक निरीक्षण (Site Inspection) किया गया था और न ही नियमों का पालन हुआ। हाई कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) और क्विककर रियल्टी के बीच मिलीभगत पाते हुए फर्म को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने और दोषी अधिकारियों को हटाने का आदेश दिया था।

महाराष्ट्र सरकार को भी फटकार…उसे तो जेल में होना चाहिए था

जब अदालत को पता चला कि महाराष्ट्र सरकार हाई कोर्ट द्वारा दोषी अधिकारियों (डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी) को हटाए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी खुद की एसएलपी दायर करने की तैयारी कर रही है, तो सुप्रीम कोर्ट के जज भड़क गए।

सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी: “हाई कोर्ट ने वास्तव में बहुत संयम दिखाया है, अन्यथा उन्हें इस पूरे सौदे में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश देना चाहिए था। यह एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है। जिस अधिकारी ने यह किया, उसे तो अब तक गिरफ्तार किया जाना चाहिए था। राज्य सरकार ऐसे दागी अधिकारी का बचाव क्यों कर रही है?”

जस्टिस जोयमाल्या बागची की चेतावनी: “सक्षम प्राधिकारी का पद एक संस्थागत पद है। अगर वर्तमान अधिकारी पर से भरोसा उठ गया है, तो उसकी जगह कोई दूसरा अधिकारी काम संभाल सकता है। अगर राज्य सरकार लगातार उसका बचाव करेगी, तो यह संदेश जाएगा कि उच्च स्तर पर बैठे लोगों का भी उसे बनाए रखने में कोई निजी हित है।”

विश्लेषण: एमपीआईडी (MPID) अदालतों के कामकाज पर चिंता

चीफ जस्टिस ने महाराष्ट्र के ‘महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट’ (MPID Act) के तहत काम करने वाली विशेष अदालतों के भीतर फैले कथित भ्रष्टाचार पर भी बेहद गंभीर मौखिक टिप्पणियां कीं।

अदालत की टिप्पणियांमुख्य बिंदु और चिंताएं
MPID कोर्ट में भ्रष्टाचारसीजेआई ने एक पुराने मामले को याद करते हुए कहा, “इन अदालतों के लोग इतने दुस्साहसी (Daredevil) हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा संपत्ति की बिक्री पर रोक लगाने और एक पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने के बावजूद, इस कोर्ट ने बैकडेट से सेल डीड (बिक्री दस्तावेज) निष्पादित करना जारी रखा। हमें नहीं पता कि वहां किस तरह का खेल चल रहा है।”
आपराधिक साजिश की बूकोर्ट ने कहा कि आवासीय भूमि को सिर्फ इसलिए कृषि भूमि नहीं माना जा सकता क्योंकि उसका निर्माण लाइसेंस समाप्त हो गया था। बिना साइट विजिट के कीमत को 100 करोड़ से 10 करोड़ पर लाना मूल्यांकक और खरीदार के बीच ‘आपराधिक साजिश’ (Criminal Conspiracy) को दर्शाता है।
जुर्माने की चेतावनीसुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि वे भ्रष्ट अधिकारियों के पक्ष में अदालत का समय बर्बाद करने आएंगे, तो उन पर उदाहरणात्मक हर्जाना (Exemplary Cost) लगाया जाएगा।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
few clouds
42.9 ° C
42.9 °
42.9 °
13 %
3.1kmh
16 %
Tue
46 °
Wed
45 °
Thu
41 °
Fri
41 °
Sat
41 °

Recent Comments