Tuesday, October 27, 2026
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Parsvnath Developers: पार्श्वनाथ डेवलपर्स को सुप्रीम अल्टीमेटम…एक हफ्ते में HRERA के आदेश का पालन करो वरना जेल जाओ, गुरुग्राम का है केस

Parsvnath Developers: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आदेशों का लगातार उल्लंघन करने पर पार्श्वनाथ डेवलपर्स (Parsvnath Developers) पर सख्त रुख अपनाया है।

शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बिल्डर को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसने एक सप्ताह के भीतर 12% वार्षिक ब्याज के साथ पूरी बकाया राशि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा नहीं कराई, तो कंपनी के निदेशकों को जेल भेजा जाएगा।

मामला क्या था?: पार्श्वनाथ एग्जोटिका (गुरुग्राम) प्रोजेक्ट

2006 का आवंटन: याचिकाकर्ता रीता टिक्कू (कैंसर सर्वाइवर) और लोकेश टिक्कू को गुरुग्राम के सेक्टर 53 स्थित पार्श्वनाथ एग्जोटिका प्रोजेक्ट में 2006 में फ्लैट आवंटित हुआ था और 2007 में एग्रीमेंट साइन हुआ था।

पूरा भुगतान, पर कब्जा नहीं: खरीदारों ने ₹1.78 करोड़ की पूरी राशि का भुगतान कर दिया था। 2013 में फ्लैट का पजेशन दिया जाना था, जो 2026 तक भी नहीं मिला।

HRERA का आदेश और अनदेखी: HRERA ने 2021 में होमबॉयर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजे का आदेश दिया था। बिल्डर ने न तो इस आदेश को चुनौती दी और न ही इसका पालन किया। यहां तक कि HRERA द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंटों पर भी अमल नहीं होने दिया गया (पुलिस सहायता न मिलने के कारण बेलिफ को बिल्डर के परिसर में घुसने से रोका गया था)।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां एवं रुख

“पूरे देश को ठगा गया है”

सुनवाई के दौरान जब बिल्डर के वकील ने कहा कि उनके पास एक “प्लान” है, तो CJI सूर्यकांत ने तल्ख लहजे में टिप्पणी की।

अदालत की मुख्य अवलोकन: “कोई प्लान नहीं। पहले पैसे जमा कराओ, फिर बात करो। हम संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत सुनवाई कर रहे हैं, हमें IBC या इंसॉल्वेंसी से कोई मतलब नहीं है। इन्होंने पूरे देश को ठगा है और व्यवस्था का मजाक बना रखा है। इनके साथ भी वही होगा जो यूनीटेक (Unitech) के साथ हुआ था।”

जेल भेजने की चेतावनी

अदालत ने कहा कि नॉन-बेलेबल वारंट (गैर-जमानती वारंट) तामील करने से पहले वह बिल्डर को एक अंतिम मौका दे रही है। अगली सुनवाई (आगामी सोमवार) तक कंपनी के सभी बैंक खाते और निदेशकों के व्यक्तिगत खाते फ्रीज ही रहेंगे। यदि एक सप्ताह में 12% ब्याज के साथ पूरी रकम जमा नहीं की गई, तो अगला कदम सीधे जेल होगा।

अदालत के मुख्य आदेश

अंतिम अवसर: 1 सप्ताह के भीतर पूरी बकाया राशि + 12% प्रति वर्ष ब्याज सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश।

खाते फ्रीज रहेंगे: पार्श्वनाथ डेवलपर्स, पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स और निदेशकों के व्यक्तिगत बैंक खातों पर लगा फ्रीज जारी रहेगा।

हरियाणा सरकार को निर्देश: हरियाणा सरकार द्वारा दाखिल अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) की कमियों को तुरंत दुरुस्त करने का निर्देश।

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Order on Parsvnath Developers

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
प्रभावित प्रोजेक्टपार्श्वनाथ एग्जोटिका (Sector 53, Gurugram)
मूल विवाद₹1.78 करोड़ का पूर्ण भुगतान करने के बावजूद 13 वर्षों से पजेशन न मिलना
लागू अधिकार क्षेत्रसंविधान का अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय प्रदान करने की विशेष शक्ति)
अदालत की सख्त शर्त1 सप्ताह के भीतर 12% ब्याज के साथ पूरी रकम जमा करें, अन्यथा निदेशकों को गैर-जमानती वारंट पर सीधे जेल भेजा जाएगा।
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