Thursday, September 17, 2026
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Scanning Error: मॉल में बादाम की कीमत MRP से ₹82 ज्यादा वसूला…फोरम का यूं चला चाबुक, स्कैनिंग में गलती का बहाना भी नहीं माना

Scanning Error: उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, प्रकाशम (आंध्र प्रदेश) ने मॉल और बड़े रिटेल स्टोर्स द्वारा बिलिंग के समय एमआरपी (MRP – अधिकतम खुदरा मूल्य) से अधिक पैसे वसूलने की बढ़ती शिकायतों पर कड़ा फैसला सुनाया है।

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ग्राहक से 100 ग्राम बादाम पर ₹82 अतिरिक्त वसूलने का दोषी पाया

आयोग की अध्यक्ष डी. श्रीदेवी, और सदस्य वाई. सुंदरा राव व डॉ. एस.ए. समीरा की खंडपीठ ने 30 मई 2026 को यह आदेश जारी करते हुए कहा, एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान बेचना सीधे तौर पर विपक्षी दल (रिटेलर) द्वारा अपनाए जा रहे ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) को दर्शाता है। वे शिकायतकर्ता को ब्याज और मुआवजे के साथ अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस करने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी हैं। फोरम ने ‘मोर रिटेल प्राइवेट लिमिटेड’ (More Retail Pvt Ltd) को एक ग्राहक से 100 ग्राम बादाम पर ₹82 अतिरिक्त वसूलने का दोषी पाया है। अदालत ने मॉल को वह अतिरिक्त राशि 12% ब्याज के साथ लौटाने और ग्राहक को ₹7,000 का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है।

मामला क्या था? (₹190 के बादाम का बिल बना दिया ₹272)

यह मामला एक आम उपभोक्ता के सजग होने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की बानगी है।

अतिरिक्त वसूली: 7 फरवरी 2025 को शिकायतकर्ता ने ‘मोर रिटेल’ के स्टोर से घर का राशन खरीदा। इस दौरान उन्होंने 100 ग्राम का “More Choice Almond Mamra” (मामरा बादाम) का एक पैकेट भी लिया। इस पैकेट पर प्रिंटेड एमआरपी ₹190 थी, लेकिन बिलिंग काउंटर पर उनसे इसके लिए ₹272 वसूल लिए गए—यानी सीधे-सीधे ₹82 ज्यादा।

मॉल की दलील (Discounts का बहाना): उपभोक्ता द्वारा कोर्ट जाने पर रिटेल कंपनी ने अपना बचाव करते हुए कुतर्क दिया कि ग्राहक ने कुल 1564 रुपये के 7 सामान खरीदे थे, जिस पर उन्हें 440 रुपये का डिस्काउंट और लॉयल्टी पॉइंट्स दिए गए थे, जिससे अंतिम बिल 1124 रुपये रह गया था। मॉल ने दावा किया कि उन्होंने कुल बिल से ज्यादा पैसे नहीं लिए और ग्राहक उन्हें केवल परेशान करने के लिए कोर्ट आया है।

कोर्ट रूम एनालिसिस: ‘स्कैनिंग एरर’ की बात मानकर फंसा मॉल

उपभोक्ता फोरम ने मॉल के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मामले में मोड़ तब आया जब कोर्ट ने उपभोक्ता द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस पर मॉल के पुराने जवाब को देखा:

नोटिस में गलती मानी, कोर्ट में पलटे: मॉल ने उपभोक्ता के कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए पहले यह स्वीकार किया था कि ‘प्रोडक्ट को स्कैन करते समय कीमत में तकनीकी चूक (Scanning Error) हुई थी और यह गलती जानबूझकर नहीं की गई थी।’

कोर्ट ने कहा—लापरवाही ही सेवा में कमी है: फोरम ने नोट किया कि नोटिस के जवाब में गलती मानने के बाद मॉल ने अपने लिखित अदालती बयान में इस बात से इनकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि रिटेलर की इस चुप्पी को उसकी गलती का कबूलनामा माना जाएगा। चाहे यह जानबूझकर किया गया हो या अनजाने में, बिलिंग सिस्टम और कर्मचारियों की ऐसी ‘लापरवाही और लापरवाही भरा रवैया’ उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में गंभीर कमी (Deficiency of Service) है।

विश्लेषण: रिफंड और हर्जाना मैट्रिक्स

अदालत ने ‘मोर रिटेल’ और उसके प्रबंध निदेशक (Managing Director) को संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से 45 दिनों के भीतर निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया।

आदेश के मुख्य बिंदुउपभोक्ता फोरम द्वारा तय की गई वित्तीय देनदारी
अतिरिक्त राशि का रिफंडवसूले गए अतिरिक्त ₹82 की वापसी, जिस पर खरीद की तारीख (फरवरी 2025) से भुगतान के दिन तक 12% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मानसिक व शारीरिक प्रताड़नाग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और कड़े संघर्ष के एवज में ₹5,000 का मुआवजा।
मुकदमेबाजी का खर्चउपभोक्ता को कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में ₹2,000 का भुगतान।
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