Bar-Bench: कर्नाटक हाई कोर्ट ने अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण और उसके वीडियो के रिकॉर्ड रखने को लेकर बेहद सख्त और दोटूक रुख अपनाया है।
पुराने अदालती वीडियो की मांग करने पर तीखी नाराजगी
हाई कोर्ट के जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने अधिवक्ता अंगद कामथ द्वारा दायर एक अनोखी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। वकील ने अदालती नियमों के तहत पुरानी लाइव स्ट्रीमिंग की वीडियो क्लिप्स (Archival Data) उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट के आईटी विभाग ने पहले ही खारिज कर दिया था। कोर्ट ने एक वकील द्वारा खुद की परफॉर्मेंस का मूल्यांकन (Performance Evaluation) करने के बहाने पुराने अदालती वीडियो की मांग करने पर तीखी नाराजगी जताई। अदालत ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर लाइव स्ट्रीमिंग का इस्तेमाल इस तरह के निजी कामों के लिए किया जाने लगा, तो न्यायपालिका लाइव स्ट्रीमिंग को पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर हो जाएगी।
यूं चला जज-वकील के बीच जिरह
जब वकील ने दलील दी कि उन्हें अपने ‘अकादमिक हित’ और ‘प्रदर्शन की समीक्षा’ के लिए वीडियो चाहिए, तो जस्टिस गोविंदराज ने तल्ख लहजे में पूछा, “किसके प्रदर्शन का मूल्यांकन? जजों के, आपका, या खुद कोर्ट के? … अगर आप यही सब चाहते हैं, तो हम लाइव स्ट्रीमिंग ही बंद कर देंगे।”
मामला क्या था? (अपनी ही बहस का वीडियो रिकॉर्ड मांग रहे थे वकील साहब)
यह कानूनी विवाद ‘कर्नाटक रूल्स ऑन लाइव स्ट्रीमिंग एंड रिकॉर्डिंग ऑफ कोर्ट प्रोसीडिंग्स, 2021’ की व्याख्या और उसकी सीमाओं से जुड़ा हुआ है।
वकील की याचिका: याचिकाकर्ता वकील अंगद कामथ खुद कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से (In-Person) पेश हुए। उन्होंने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार (IT) द्वारा उनके आवेदन को खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
क्या थी मांग?: कामथ ने 11 दिसंबर 2025 को नियमों के फॉर्म-३ (Form III) के तहत एक आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने 13 नवंबर 2025 को कोर्ट हॉल नंबर 15 (CH-15) में एक रिट याचिका (WP 32849/2025) पर हुई सुनवाई की ‘आर्काइवल रिकॉर्डिंग’ (पुरानी वीडियो फाइल) और उससे जुड़े मेटाडेटा की मांग की थी, जिसमें वे खुद बतौर वकील पेश हुए थे।
विभाग ने क्यों किया था खारिज?: हाई कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (IT) ने नियमों की धारा 10(1)(ii) और 10(2)(iv) का हवाला देते हुए वकील को वीडियो देने से साफ मना कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने यह रिट याचिका दायर की।
कोर्ट रूम संवाद: परफॉर्मेंस देखने के लिए कोर्ट की वीडियो नहीं मिलती
सुनवाई के दौरान कोर्ट और वकील के बीच हुई बातचीत ने लाइव स्ट्रीमिंग के उद्देश्य पर एक गंभीर बहस छेड़ दी।
उद्देश्य पर सवाल: जब जस्टिस गोविंदराज ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्हें यह पुराना वीडियो किस खास मकसद के लिए चाहिए, तो वकील ने जवाब दिया कि वह अपने ‘अकादमिक उद्देश्यों’ और ‘आत्म-मूल्यांकन’ (Performance Evaluation) के लिए इसे देखना चाहते हैं ताकि समझ सकें कि उन्होंने कोर्ट में कैसी बहस की थी।
कोर्ट की नाराजगी: इस दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए साफ किया कि लाइव स्ट्रीमिंग न्याय प्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) और जनता की पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी, न कि वकीलों को अपनी रेटिंग या परफॉर्मेंस सुधारने का वीडियो फुटेज देने के लिए। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे मामलों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यों पर विचार करना पसंद करेगी।
विश्लेषण: लाइव स्ट्रीमिंग नियम और हाई कोर्ट का स्टैंड
इस याचिका में वकील ने केवल वीडियो ही नहीं मांगा है, बल्कि कोर्ट से यह भी मांग की है कि वह आर्काइवल रिकॉर्डिंग देने या न देने को लेकर एक विस्तृत गाइडलाइन या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करे।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण और उसके वीडियो के रिकॉर्ड रखने को लेकर बेहद सख्त और दोटूक रुख अपनाया है।
पुराने अदालती वीडियो की मांग करने पर तीखी नाराजगी
हाई कोर्ट के जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने अधिवक्ता अंगद कामथ द्वारा दायर एक अनोखी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की। वकील ने अदालती नियमों के तहत पुरानी लाइव स्ट्रीमिंग की वीडियो क्लिप्स (Archival Data) उपलब्ध कराने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट के आईटी विभाग ने पहले ही खारिज कर दिया था। कोर्ट ने एक वकील द्वारा खुद की परफॉर्मेंस का मूल्यांकन (Performance Evaluation) करने के बहाने पुराने अदालती वीडियो की मांग करने पर तीखी नाराजगी जताई। अदालत ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर लाइव स्ट्रीमिंग का इस्तेमाल इस तरह के निजी कामों के लिए किया जाने लगा, तो न्यायपालिका लाइव स्ट्रीमिंग को पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर हो जाएगी।
यूं चला जज-वकील के बीच जिरह
जब वकील ने दलील दी कि उन्हें अपने ‘अकादमिक हित’ और ‘प्रदर्शन की समीक्षा’ के लिए वीडियो चाहिए, तो जस्टिस गोविंदराज ने तल्ख लहजे में पूछा, “किसके प्रदर्शन का मूल्यांकन? जजों के, आपका, या खुद कोर्ट के? … अगर आप यही सब चाहते हैं, तो हम लाइव स्ट्रीमिंग ही बंद कर देंगे।”
मामला क्या था? (अपनी ही बहस का वीडियो रिकॉर्ड मांग रहे थे वकील साहब)
यह कानूनी विवाद ‘कर्नाटक रूल्स ऑन लाइव स्ट्रीमिंग एंड रिकॉर्डिंग ऑफ कोर्ट प्रोसीडिंग्स, 2021’ की व्याख्या और उसकी सीमाओं से जुड़ा हुआ है।
वकील की याचिका: याचिकाकर्ता वकील अंगद कामथ खुद कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से (In-Person) पेश हुए। उन्होंने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार (IT) द्वारा उनके आवेदन को खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
क्या थी मांग?: कामथ ने 11 दिसंबर 2025 को नियमों के फॉर्म-3 (Form III) के तहत एक आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने 13 नवंबर 2025 को कोर्ट हॉल नंबर 15 (CH-15) में एक रिट याचिका (WP 32849/2025) पर हुई सुनवाई की ‘आर्काइवल रिकॉर्डिंग’ (पुरानी वीडियो फाइल) और उससे जुड़े मेटाडेटा की मांग की थी, जिसमें वे खुद बतौर वकील पेश हुए थे।
विभाग ने क्यों किया था खारिज?: हाई कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (IT) ने नियमों की धारा 10(1)(ii) और 10(2)(iv) का हवाला देते हुए वकील को वीडियो देने से साफ मना कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने यह रिट याचिका दायर की।
कोर्ट रूम संवाद: परफॉर्मेंस देखने के लिए कोर्ट की वीडियो नहीं मिलती
सुनवाई के दौरान कोर्ट और वकील के बीच हुई बातचीत ने लाइव स्ट्रीमिंग के उद्देश्य पर एक गंभीर बहस छेड़ दी।
उद्देश्य पर सवाल: जब जस्टिस गोविंदराज ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्हें यह पुराना वीडियो किस खास मकसद के लिए चाहिए, तो वकील ने जवाब दिया कि वह अपने ‘अकादमिक उद्देश्यों’ और ‘आत्म-मूल्यांकन’ (Performance Evaluation) के लिए इसे देखना चाहते हैं ताकि समझ सकें कि उन्होंने कोर्ट में कैसी बहस की थी।
कोर्ट की नाराजगी: इस दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए साफ किया कि लाइव स्ट्रीमिंग न्याय प्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) और जनता की पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी, न कि वकीलों को अपनी रेटिंग या परफॉर्मेंस सुधारने का वीडियो फुटेज देने के लिए। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे मामलों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यों पर विचार करना पसंद करेगी।
विश्लेषण: लाइव स्ट्रीमिंग नियम और हाई कोर्ट का स्टैंड
इस याचिका में वकील ने केवल वीडियो ही नहीं मांगा है, बल्कि कोर्ट से यह भी मांग की है कि वह आर्काइवल रिकॉर्डिंग देने या न देने को लेकर एक विस्तृत गाइडलाइन या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करे।
| विवादित कानूनी बिंदु | हाई कोर्ट की विधिक स्थिति और वर्तमान आदेश |
| याचिकाकर्ता | एडवोकेट अंगद कामथ (स्वयं उपस्थित)। |
| प्रतिवादी (Respondents) | 1. कर्नाटक हाई कोर्ट, 2. रजिस्ट्रार (IT), 3. सहायक रजिस्ट्रार (IT)। |
| मुख्य कानूनी मांग | 13 नवंबर 2025 की अदालती कार्यवाही के वीडियो और मेटाडेटा को सुरक्षित (Preserve) रखने और उसे सौंपने का निर्देश। |
| हाई कोर्ट का निर्देश | कोर्ट ने तीनों प्रतिवादियों को इस मामले पर अपना आधिकारिक लिखित विरोध/आपत्ति (Objections) दर्ज कराने का निर्देश दिया है। |
| अगली सुनवाई की तिथि | मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 1 जुलाई 2026 को तय की गई है। |

