CURSE ON NATION: तथाकथित सम्मान के नाम पर होने वाली हत्याओं ‘ऑनर किलिंग’ (Honour Killing)और समाज में गहरे तक पैठे जातिवाद पर मद्रास हाई कोर्ट ने बेहद तल्ख और ऐतिहासिक टिप्पणी की है।
27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कविन की सनसनीखेज हत्या
हाई कोर्ट के जस्टिस बी. पुगलेंदी ने तिरुनेलवेली में पिछले साल (2025) हुए 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कविन की सनसनीखेज हत्या के मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर (SI) की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने राज्य में बढ़ रहे जातिगत अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी हत्याओं में कोई ‘ऑनर’ या सम्मान नहीं होता, बल्कि यह समाज के माथे पर एक कलंक और जातिवाद का सबसे वीभत्स व हिंसक रूप है।
यह रही जस्टिस की टिप्पणी
जस्टिस पुगलेंदी ने समाज को आईना दिखाते हुए अपने फैसले में कहा, सूरज सबको समान रूप से रोशनी देता है, बारिश सब पर समान रूप से बरसती है और हवा पर भी सबका साझा अधिकार है। प्रकृति कभी किसी जाति को नहीं पहचानती। जब हमारा समाज जाति की इन कृत्रिम और संकीर्ण दीवारों को तोड़कर आगे बढ़ेगा, तभी वह इस शाश्वत सत्य को समझ पाएगा कि सभी इंसान बराबर हैं। तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ में कोई सम्मान नहीं छिपा है, यह सिर्फ और सिर्फ एक अत्यंत शर्मनाक कृत्य है।
मामला क्या था? (चेन्नई के टेक की ऑनर किलिंग में पुलिसकर्मी दंपत्ति ही निकले आरोपी)
यह पूरा मामला तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले का है, जिसने कानून के रखवालों की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।
जातिगत रंजिश में हत्या: चेन्नई में कार्यरत ‘हिंदू देवेंद्र कुला वेल्लालर’ समुदाय के 27 वर्षीय टेक पेशेवर कविन सेल्वागणेश का एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग था, जो ‘हिंदू मरावर’ समुदाय से ताल्लुक रखती थी। युवती के परिवार को यह अंतर्जातीय रिश्ता मंजूर नहीं था। 27 जुलाई 2025 को युवती के परिवार वालों ने कविन की कुल्हाड़ी/धारदार हथियार से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी थी।
वर्दी पर दाग: इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य आरोपी युवती का भाई था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि साजिश में शामिल युवती के पिता सरवणन और उसकी मां, दोनों वारदात के समय पुलिस विभाग में सब-इस्पेक्टर (Sub-Inspector) के पद पर तैनात थे।
जमानत के लिए चक्कर: हाई कोर्ट और निचली अदालत से पहले जमानत खारिज होने के बाद, पिछले 10 महीनों से जेल में बंद आरोपी पुलिसकर्मी सरवणन ने इस आपराधिक अपील के जरिए दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट रूम एनालिसिस: ‘CURSE ON NATION’ – पिछले 10 साल में 59 ऑनर किलिंग
मद्रास हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल कानूनी पहलुओं बल्कि सामाजिक विकृतियों पर भी विस्तार से चर्चा की।
सिस्टम को खोखला कर रहा जातिवाद: अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘लाला सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए याद दिलाया कि शीर्ष अदालत ने जातिवाद को ‘देश के लिए एक अभिशाप’ (Curse on the nation) माना था। जस्टिस पुगलेंदी ने रिकॉर्ड पेश करते हुए बताया कि अकेले तमिलनाडु में पिछले 10 वर्षों में ऑनर किलिंग की 59 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि यह जहर लोगों के दिमाग में कितना गहरा बैठ चुका है।
SC/ST एक्ट के बेअसर होने पर चिंता: हाई कोर्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989’ जैसे कड़े कानून भी उम्मीद के मुताबिक नतीजे देने में पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं। इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।
स्कूली स्तर पर सुधार की जरूरत: अदालत ने सुझाव दिया कि नई पीढ़ी की मानसिकता को बदलने के लिए स्कूली स्तर से ही शिक्षा व्यवस्था में बड़े प्रशासनिक और वैचारिक सुधार करने होंगे, ताकि बच्चों के मन में बचपन से ही समानता के बीज बोए जा सकें।
देश के सैनिकों का उदाहरण: ‘शहादत का कोई गोत्र या जाति नहीं होती’
अदालत ने जातिगत नफरत फैलाने वालों को देश की सीमा पर खड़े जवानों से सीख लेने की नसीहत दी। कोर्ट ने कहा, देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले हमारे सैनिक बिना किसी जातिगत पूर्वाग्रह के मातृभूमि की रक्षा करते हैं। जब वे दुश्मन की गोलियों का सामना करते हैं, तो न तो उनके बहते हुए खून का कोई रंग-जाति होती है और न ही उनकी देशभक्ति पर किसी जाति का ठप्पा होता है। यदि देश की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले जवान एक साझा मकसद के लिए एकजुट हो सकते हैं, तो उनका यह उदाहरण देश के हर नागरिक को जातिगत पूर्वाग्रहों को त्यागने और एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले।
विश्लेषण: हाई कोर्ट का निर्णय और जमानत की शर्तें
अदालत ने नोट किया कि मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल हो चुकी है और आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगी है। चूंकि आरोपी 10 महीने से जेल में था, इसलिए कोर्ट ने उसे मुकदमे की शुरुआत से पहले अनिश्चितकाल तक जेल में रखने (Pre-trial imprisonment) को अनुचित मानते हुए कुछ बेहद सख्त और असाधारण शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर ली।
| विधिक पैरामीटर | मद्रास हाई कोर्ट का दंडात्मक एवं सुरक्षात्मक आदेश |
| आरोपी का नाम | सरवणन (निलंबित सब-इंस्पेक्टर, मृत कविन का कथित ससुर) |
| जमानत बॉन्ड | ₹1,00,000 (1 लाख रुपये) की मुचलका राशि और इतनी ही राशि के दो जमानती (Sureties)। |
| शहर निर्वासन (Location Restriction) | आरोपी को अपने गृह जिले तिरुनेलवेली में रहने की अनुमति नहीं होगी। उसे कोयम्बटूर (Coimbatore) में रहना होगा। |
| हाजिरी का नियम | कोयम्बटूर में रहते हुए उसे दिन में दो बार स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। |
| अतिरिक्त विधिक हलफनामा | आरोपी को पुलिस के सामने लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वह अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा, किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होगा और ट्रायल के दौरान घटनास्थल (तिरुनेलवेली) के आसपास भी नहीं भटकेगा। |

