Friday, September 18, 2026
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Misplace Files: सुप्रीम कोर्ट से गायब हो गईं अति-महत्वपूर्ण फाइलें…सीजेआई की दो टूक-अगर यह सच है तो जिम्मेदार को छोड़ेंगे नहीं

Misplace Files: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री (Registry) को बेहद सख्त विधिक चेतावनी दी है।

सीजेआई ने स्पष्ट किया है कि यदि रजिस्ट्री द्वारा किसी अति-महत्वपूर्ण (Urgent) मामले की फाइल को गुम या मिसप्लेस (Misplace) करने का आरोप सच पाया जाता है, तो वे इसे हल्के में नहीं लेंगे और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही (Accountability) तय की जाएगी। देश की सर्वोच्च अदालत की प्रशासनिक व्यवस्था और मामलों की लिस्टिंग (Listing) में होने वाली देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहाना की पीठ के समक्ष जब एक वकील ने रजिस्ट्री की इस गंभीर लापरवाही को उजागर किया, तो मुख्य न्यायाधीश ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) को आज ही अपने चैंबर या आवास पर सीधे लिखित शिकायत देने का आदेश दिया।

कड़ी प्रशासनिक और विधिक टिप्पणी करते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, अगर हमारी रजिस्ट्री अति-महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें गायब कर रही है, तो क्या आपको लगता है कि मैं इसे सिर्फ लिस्टिंग का आदेश देकर ऐसे ही छोड़ दूंगा? मुझे इस मामले को गंभीरता से उठाना होगा और यह देखना होगा कि इस विधिक अक्षमता और लापरवाही के पीछे वास्तव में कौन दोषी है।

विधिक विवाद क्या था? (9 दिनों से अटकी रही अर्जेंट एसएलपी)

यह पूरा प्रशासनिक विवाद वकील शुभि शिवानी जयदीप द्वारा पीठ के समक्ष एक मामले को मेंशन (Mention) करने के दौरान सामने आया।

वकील की दलील: काउंसिल शुभि शिवानी ने पीठ को सूचित किया कि उन्होंने 8 जून 2026 को एक अति-महत्वपूर्ण विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। हालांकि, 9 दिन बीत जाने के बाद भी रजिस्ट्री द्वारा इसे पंजीकृत (Register) नहीं किया गया।

फाइल गायब होने का आरोप: वकील ने बताया कि रजिस्ट्री के स्तर पर केस की फाइल कहीं मिसप्लेस (गुम) हो गई है और इसी वजह से मामला अदालत के समक्ष लिस्ट नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में रजिस्ट्रार को लिखित प्रतिवेदन (Representation) देने के बावजूद विभाग से कोई जवाब नहीं मिला।

अदालत से गुहार: वकील ने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए रजिस्ट्री को फाइल ढूंढने, उसे तुरंत री-रजिस्टर करने और तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

सीजेआई का कड़ा रुख: ‘आज ही मेरे आवास या चैंबर पर शिकायत दें’

इस विधिक चूक पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक बेहद गंभीर प्रशासनिक विफलता माना। उन्होंने केवल मामले को लिस्ट करने का आदेश देने के बजाय इस विधिक अक्षमता के मूल कारणों की जांच करने का निर्णय लिया।

सीजेआई ने वकील को निर्देश दिया: अपने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) से कहें कि वे आज ही दिन के दौरान मुझे एक औपचारिक शिकायत सौंपें। मैं पूरी तरह उपलब्ध हूं। आप यह शिकायत मुझे अभी चैंबर में दे सकते हैं या शाम को मेरे निवास स्थान पर दे सकते हैं। मुझे इसका पूरा विवरण चाहिए कि यह लापरवाही कैसे हुई।

रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर पहले भी बरस चुके हैं कोर्ट के बेंच

यह पहला मौका नहीं है जब वर्ष 2026 में शीर्ष अदालत ने अपनी ही रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता या नाराजगी व्यक्त की हो। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई विधिक और प्रशासनिक गतिरोध सामने आ चुके हैं।

मई 2026 (‘खुद को सुपर चीफ जस्टिस समझते हैं अफसर’): सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने एक स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक को नोटिस जारी न करने पर रजिस्ट्री को जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने इस कृत्य को “बेहद घिनौना” (Very Nasty) बताते हुए टिप्पणी की थी कि रजिस्ट्री के कई अधिकारियों को लगता है कि वे ‘सुपर चीफ जस्टिस’ हैं। इस मामले में रजिस्ट्रार (जुडिशियल) को फैक्ट-फाइंडिंग (तथ्य-खोज) जांच का आदेश दिया गया था।

फरवरी 2026 (‘चौंकाने वाली अनियमितता’): एक तीन-जजों की पीठ द्वारा खारिज की जा चुकी याचिका रहस्यमय तरीके से दोबारा दूसरी पीठ के सामने लिस्ट हो गई थी। सीजेआई ने इसे “शॉकिंग” बताते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रियाओं की गहरी प्रशासनिक जांच (Deeper Probe) का संकेत दिया था।

प्रक्रियात्मक विसंगतियां: अन्य बेंचों ने भी इस बात पर आपत्ति जताई थी कि एक ही विषय से जुड़े (Connected) मामलों को अलग-अलग बेंचों के सामने लिस्ट कर दिया जाता है, जो कि स्थापित विधिक व्यवस्था और पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ है।

विधिक एवं प्रशासनिक सारांश (Case Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण एवं सीजेआई का तात्कालिक आदेश (17 जून 2026)
शिकायतकर्ता काउंसिलएडवोकेट शुभि शिवानी जयदीप।
शिकायत का विषय8 जून 2026 को दायर SLP की फाइल रजिस्ट्री द्वारा कथित तौर पर गायब करना।
सीजेआई का विधिक निर्देशएडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) आज ही सीजेआई के चैंबर या निवास पर लिखित शिकायत सौंपें।
प्रशासनिक रुखकेवल लिस्टिंग नहीं होगी; अक्षमता और फाइल गायब करने वाले अधिकारियों की पहचान कर जवाबदेही तय होगी।
पुरानी नजीरेंमई 2026 (नोटिस न भेजने पर ‘सुपर चीफ जस्टिस’ टिप्पणी) और फरवरी 2026 (खारिज केस दोबारा लिस्ट होना)।
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