केस मैट्रिक्स एवं विवरण (Case Matrix Overview)
| श्रेणियां / बिंदु | उपभोक्ता आयोग का फैसला |
| मामले का नाम | दागेश्वर यादव बनाम अशोक निर्मलकर (Dageshwar Yadav v. Ashok Nirmalkar) |
| संबंधित मंच | जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रायपुर (छत्तीसगढ़) |
| अदालत का आदेश तिथि | 1 जुलाई 2026 |
| विधिक सिद्धांत | ड्राई क्लीनिंग के दौरान कपड़ों को नुकसान पहुंचाना सेवाओं में कमी (Deficiency in Service) है |
| कुल मुआवजा राशि | ₹6,000 (मूल्य + 6% ब्याज) + ₹3,000 (मुआवजा) + ₹5,000 (कानूनी खर्च) |
Burning Wedding Sherwani: ग्राहक की बहुमूल्य शेरवानी प्रेस करते समय जला देने के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है।
उपभोक्ता आयोग ने 1 जुलाई 2026 को पारित अपने आदेश में ड्राई क्लीनर मालिक को ग्राहक की जली हुई शेरवानी की कीमत, ब्याज, मानसिक संताप के लिए मुआवजा और कानूनी खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता आयोग ने माना कि ग्राहक के कपड़ों को नुकसान पहुंचाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत सेवाओं में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह मामला ‘दागेश्वर यादव बनाम अशोक निर्मलकर’ से संबंधित है।
- घटना: सितंबर 2019 में शिकायतकर्ता दागेश्वर यादव ने रायपुर के पास चंदखुरी गांव में स्थित एक ड्राई क्लीनिंग शॉप पर अपनी शादी की शेरवानी सहित 4 कपड़े ड्राई क्लीन व प्रेस के लिए दिए थे।
- शेरवानी का जलना: जब ग्राहक कपड़े वापस लेने गया, तो उसने देखा कि शेरवानी के दूसरे बटन के पास का हिस्सा गर्म प्रेस से बुरी तरह जलकर छेद हो गया था।
- दुकानदार का इनकार: जब ग्राहक ने हर्जाना मांगा, तो दुकान मालिक अशोक निर्मलकर ने टालमटोल किया और अंततः पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।
- पुलिस और कोर्ट का रुख: ग्राहक ने उसी दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इसे गैर-संज्ञेय (Non-cognizable) मामला बताकर अदालत जाने की सलाह दी। इसके बाद नवंबर 2019 में उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की गई।
उपभोक्ता आयोग का निष्कर्ष और निर्णय
मामले की सुनवाई के दौरान अनावेदक (ड्राई क्लीनर) नोटिस तामील होने के बावजूद कभी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और न ही कोई लिखित जवाब प्रस्तुत किया। इस वजह से शिकायतकर्ता के साक्ष्य (पुलिस शिकायत, जली शेरवानी की तस्वीरें, लीगल नोटिस) एकतरफा और असंदिग्ध रहे।
सेवाओं में कमी
आयोग ने कहा, अनावेदक द्वारा प्रेस करते समय शिकायतकर्ता की शेरवानी को जलाकर बर्बाद कर देना और उसकी कीमत का भुगतान न करना सेवाओं में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
मुआवजे की गणना
शिकायतकर्ता ने शेरवानी का बिल ₹12,000 का प्रस्तुत किया था, लेकिन आयोग ने घटना के 7 साल बाद पेश किए गए इस बिल को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना। आयोग ने शेरवानी का अनुमानित मूल्य ₹6,000 तय किया।
उपभोक्ता अदालत का आदेश (Directives & Compensation)
रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने ड्राई क्लीनर अशोक निर्मलकर को 45 दिनों के भीतर निम्नलिखित राशियों का भुगतान करने का आदेश दिया:
- शेरवानी का मूल्य: ₹6,000 (वर्ष 2019 में शिकायत दर्ज करने की तिथि से 6% वार्षिक ब्याज के साथ)।
- मानसिक व वित्तीय क्षतिपूर्ति: ₹3,000 का मुआवजा।
- वाद व्यय (Litigation Costs): ₹5,000 का कानूनी खर्च।

