Thursday, November 5, 2026
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Pay Commission: पंजाब सरकार मुफ़्त की योजना-विज्ञापनों पर भारी खर्च कर रही है, लेकिन कर्मचारियों के बकाये का भुगतान नहीं कर रही…ऐसा क्यों

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक श्रेणियांपंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026)
संबंधित अदालतपंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय
माननीय न्यायाधीशकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा एवं जस्टिस रोहित कपूर
संबंधित पक्षपंजाब सरकार व PSPCL बनाम राज्य कर्मचारी व पेंशनभोगी
मुख्य विषयमहंगाई भत्ते/राहत (DA/DR) के बकाये का भुगतान न करना
अदालत की मुख्य टिप्पणीविज्ञापनों और ‘फ्रीबीज’ पर ख़र्च करने वाली सरकार कर्मचारियों के हक से मुंह नहीं मोड़ सकती
अंतिम फैसलासरकार की अपील खारिज। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये तुरंत जारी करने का सख्त निर्देश।

Pay Commission: पंजाब सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते / महंगाई राहत (DA/DR) की किस्तों का तुरंत भुगतान करे। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार मुफ़्त की योजनाओं (Freebies) और विज्ञापनों (Advertorial Campaigns) पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन वित्तीय तंगी का बहाना बनाकर अपने ही कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वैध बकाये रोक रही है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक कर्मचारियों के ये बकाये चुकता नहीं हो जाते, तब तक पंजाब सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों जैसे किसी भी गैर-उत्पादक (Unproductive) ख़र्च पर रोक लगाएगी।

मामला क्या था? (Case Background)

  • यह मामला पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा सिंगल-जज के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों से संबंधित था।
  • Pay Commission और केंद्र का पैटर्न: पंजाब सरकार ने 2021 में छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज़ पर अपने कर्मचारियों को DA/DR देने की नीति को मंजूरी दी थी। हालांकि, मंजूरी के बाद भी बकाये का भुगतान नहीं किया गया।
  • भेदभावपूर्ण ‘लिक्विडेशन प्लान’: सरकार ने एक योजना बनाई जिसके तहत पेंशन और DA/DR के भुगतान को 5 वित्तीय वर्षों में फैला दिया गया। 75 वर्ष से कम आयु के पेंशनभोगियों को बिना किसी ब्याज के 42 किस्तों में भुगतान करने का प्रस्ताव दिया गया, जबकि ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS/IPS/IFS) के अधिकारियों को पूरा लाभ मिल रहा था।
  • सिंगल-जज का आदेश (8 अप्रैल): सिंगल जज ने राज्य और PSPCL को ऑल इंडिया सर्विसेज के समान ही 30 जून तक कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के सभी लंबित DA/DR जारी करने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर हक नहीं मारा जा सकता”

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की वित्तीय तंगी की दलील को खारिज करते हुए कहा, राज्य के अपने कर्मचारियों के वैध बकाये को रोकने के लिए वित्तीय तंगी का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य मुफ़्त उपहारों, रेवड़ियों (Freebies, Doles), विज्ञापनों और अन्य ख़र्चों पर भारी मात्रा में धन ख़र्च कर रहा है, जो कल्याणकारी राज्य के आवश्यक ख़र्चों के दायरे में नहीं आते। इस बात को आसानी से नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  1. विज्ञापनों पर ख़र्च की आड़ नहीं: प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान और अन्य अवांछित ख़र्च राज्य के कर्मचारियों के बकाये को रोकने को न्यायोचित नहीं ठहरा सकते।
  2. 5 साल और 42 किस्तों की योजना खारिज: अदालत ने माना कि सरकार को अपनी ही नीति से मुकरने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। 75 वर्ष से कम आयु के पेंशनभोगियों को बिना ब्याज के 42 किस्तों में 5 साल तक भुगतान करने का फैसला भेदभावपूर्ण है।

उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश (Court Directives)

  • पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलों को खारिज (Dismissed) कर दिया।
  • सरकार को निर्देश दिया गया कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित DA/DR का भुगतान तुरंत करे।
  • बकाये क्लियर होने तक विज्ञापनों और मुफ़्त की योजनाओं पर किसी भी तरह का अप्रत्यक्ष/गैर-जरूरी ख़र्च करने से परहेज करने का आदेश दिया।
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