Ladies Coach: भारतीय रेलवे ने महिला यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और निजता को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
19 जून, 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) के अनुसार, ये नए नियम 20 जून, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुके हैं। जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 162 में संशोधन कर कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
मुख्य बदलाव और नए विधिक प्रावधान
ऑन-द-स्पॉट जुर्माने में 5 गुना बढ़ोतरी
यदि कोई पुरुष यात्री जानबूझकर या बिना किसी वैध कानूनी कारण के महिलाओं के लिए आरक्षित बोगी (Ladies Coach), कूपे, बर्थ या सीट पर यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर लगने वाले जुर्माने को सीधे ₹500 से बढ़ाकर ₹2,500 कर दिया गया है।
टिकट की जब्ती और ट्रेन से निष्कासन
आर्थिक दंड के अलावा, दोषी पुरुष यात्री का पास या रेल टिकट तत्काल प्रभाव से जब्त (Forfeit) कर लिया जाएगा। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात कोई भी रेलवे कर्मचारी या रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का जवान उसे तुरंत उस डिब्बे या ट्रेन से बाहर निकाल सकता है।
जुर्माना न भरने पर कोर्ट की सख्त कार्रवाई
यदि कोई पकड़ा गया पुरुष यात्री मौके पर ₹2,500 का जुर्माना भरने से इनकार करता है या असमर्थ रहता है। उसे संबंधित विधिक क्षेत्राधिकार वाली सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। अदालत में दोषसिद्धि (Conviction) होने पर यह जुर्माना बढ़कर ₹5,000 तक हो सकता है। कानून में स्पष्ट है कि यदि अदालत के पास कोई विशेष या पर्याप्त कारण न हो (जिसका उल्लेख फैसले में करना होगा), तो सजा के तौर पर न्यूनतम ₹2,500 का जुर्माना लगाना अनिवार्य होगा।
कुछ विशेष और महत्वपूर्ण अपवाद
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षा: इस नए संशोधन में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान (Proviso) जोड़ा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 2(k) के तहत परिभाषित किसी भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के खिलाफ इस धारा (महिला कोच में प्रवेश) के तहत कोई दंडात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी।
आरपीएफ (RPF) के विशेष अभियान: मुंबई, कोलकाता, सिकंदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरीय उपनगरीय (Local) रूटों पर चलने वाली ‘लेडीज स्पेशल’ ट्रेनों और सामान्य ट्रेनों के महिला कोचों में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल अब नियमित रूप से विशेष जांच अभियान चलाएगा।
विधिक क्विक-मैट्रिक्स (Quick Overview)
| नियम / श्रेणियां | पुराने विधिक प्रावधान | संशोधित नियम 2026 (20 जून से लागू) |
| मूल वैधानिक धारा | रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 162 | जन विश्वास अधिनियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित धारा 162 |
| ऑन-द-स्पॉट जुर्माना | ₹500 | ₹2,500 |
| अदालती कार्यवाही पर अधिकतम जुर्माना | — | ₹5,000 तक (न्यूनतम ₹2,500 अनिवार्य) |
| अतिरिक्त विधिक कार्रवाई | सामान्य जुर्माना | टिकट/पास की जब्ती और बोगी से तुरंत निष्कासन |
| विशेष छूट (Exemption) | नहीं थी | ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को इस दंडात्मक कार्रवाई से बाहर रखा गया है |

