Inter-Country: सुप्रीम कोर्ट ने अंतर-देशीय पारिवारिक गोद लेने की जटिलताओं और प्रशासनिक अड़चनों को लेकर केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नकारात्मक रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
विभाग को नौकरशाही की लालफीताशाही के आड़े नहीं लाएं: अदालत
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की खंडपीठ ने एक 13 वर्षीय बच्ची और उसके दत्तक माता-पिता (Adoptive Parents) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब परिवार के ही सदस्य किसी बच्चे को अपनाना चाहते हैं, तो विभाग को ‘नौकरशाही की लालफीताशाही’ (Bureaucratic Red Tape) के साथ आड़े नहीं आना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि: भारत और अमेरिका के कानूनों का टकराव
सगाई और गोद लेना: यह मामला एक अनाथ बच्ची के भविष्य और उसके परिवार से पुनर्मिलन की विधिक लड़ाई से जुड़ा है। जुलाई 2024 में बच्ची की मां के निधन के बाद, उसकी सगी बड़ी मौसी और मौसा (जो अमेरिका के निवासी हैं और प्रवासी भारतीय/OCI कार्ड धारक हैं) ने बच्ची को हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम, 1956 (HAMA) के तहत एक पंजीकृत विलेख (Registered Adoption Deed) के जरिए गोद ले लिया।
CARA का कार्यालय ज्ञापन (OM): इसके बाद माता-पिता ने ‘Adoption Regulations, 2022’ के अध्याय VII के तहत अंतर-देशीय रिश्तेदार गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की। प्रक्रिया अंतिम चरण में थी, तभी CARA ने 9 फरवरी, 2026 को एक स्पष्टीकरण पत्र (Office Memorandum) जारी कर दिया। CARA ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, 2015 की धारा 56(3) और 56(4) के तहत, यदि कोई बच्चा एक बार HAMA के तहत गोद ले लिया गया है, तो उसकी फाइल को जेजे एक्ट या कारा के नियमों के तहत दोबारा प्रोसेस नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर 15 अप्रैल, 2026 को जिला बाल संरक्षण इकाई ने उनका आवेदन खारिज कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय संकट: सितंबर 2025 में, अमेरिकी सरकार ने यह घोषणा कर दी कि वे HAMA के तहत किए गए एडॉप्शन पर ‘हेग एडॉप्शन सर्टिफिकेट’ (Hague Adoption Certificate) जारी नहीं करेंगे, क्योंकि HAMA में हेग कन्वेंशन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक मौजूद नहीं हैं।
विधिक विडंबना: इस स्थिति के कारण याचिकाकर्ता पूरी तरह फंस गए। अमेरिका ने HAMA के तहत क्लीयरेंस देने से मना कर दिया, और CARA ने जेजे एक्ट का हवाला देकर उनका रास्ता बंद कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह उनके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 21) का सीधा उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: नकारात्मक रवैया छोड़ें
सुनवाई के दौरान जब CARA के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए गर्मियों की छुट्टियों के बाद तक का समय मांगा, तो याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एड्वोकेट नूर शेरगिल ने अत्यधिक तत्परता (Urgency) का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार द्वारा दी गई एडॉप्शन की अनुमति 20 जुलाई, 2026 को समाप्त हो जाएगी। इस पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने विभाग को आड़े हाथों लिया, आप परिवार के सदस्यों द्वारा गोद लेने का विरोध क्यों कर रहे हैं? परिवार बच्चे को अपने पास रखना चाहता है, लेकिन विभाग का रवैया बेहद नकारात्मक है। हम पहली बार ऐसा मामला नहीं देख रहे हैं। यदि जेजे एक्ट का फ्रेमवर्क HAMA के साथ मेल नहीं खा रहा, तो इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को बेसहारा छोड़ दिया जाए।
अंतरिम राहत और अदालती निर्देश
प्रक्रिया जारी रखने का आदेश: कोर्ट ने CARA को सख्त निर्देश दिया कि वे इस याचिका के अंतिम फैसले का इंतजार किए बिना, बैकग्राउंड में आवेदन को प्रोसेस करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं, ताकि यदि याचिकाकर्ताओं की जीत होती है, तो अमेरिकी अनुमति समाप्त होने से पहले तुरंत पत्र जारी किया जा सके।
COUNTER की समय-सीमा: कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई, 2026 तय की है। कोर्ट ने साफ किया कि यदि CARA तब तक अपना जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल नहीं करता, तो कोर्ट उनके जवाब के बिना ही मामले में आगे बढ़ जाएगा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि CARA की देरी के कारण अमेरिकी अथॉरिटी से मिली अनुमति को बेकार नहीं होने दिया जा सकता।
केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix)
| कानूनी बिंदु / श्रेणियां | उच्चतम न्यायालय की विधिक कार्यवाही (जून 2026) |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची (खंडपीठ) |
| याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व | एड्वोकेट नूर शेरगिल, एओआर (AoR) अनुजा पेथिया, एड्वोकेट ऋषभ निगम और अमीषा अग्रवाल |
| चुनौती के अधीन दस्तावेज | CARA का 9 फरवरी 2026 का कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) और जिला बाल संरक्षण इकाई का अस्वीकृति आदेश |
| प्रासंगिक वैधानिक कानून | हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम (HAMA), 1956 और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, 2015 की धारा 56(3) व 56(4) |
| अदालत का अंतरिम आदेश | CARA को बिना किसी पूर्वाग्रह (Without Prejudice) के गोद लेने के आवेदन को प्रोसेस करने की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश। अगली सुनवाई 16 जुलाई, 2026। |

