Pune Family Court: माता-पिता के बीच कड़वाहट और बच्चे की कस्टडी (Child Custody) के एक मामले में पुणे की फैमिली कोर्ट (Pune Family Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और लीक से हटकर फैसला सुनाया है।
जज गणेश घुले ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पत्नी के व्यवहार को देखते हुए बच्चे का भविष्य उसकी कस्टडी में सुरक्षित नहीं लगता। अदालत ने एक 10 वर्षीय लड़के की अंतरिम कस्टडी उसके पिता को सौंपते हुए टिप्पणी की कि यह मामला समाज की उस अलिखित धारणा को तोड़ने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है, जिसमें माना जाता है कि केवल मां ही ‘स्वाभाविक देखभालकर्ता’ (Natural Caregiver) हो सकती है और पिता सिर्फ एक ‘कमाऊ जरिया’ (Provider) है।
मामला क्या है?: सिंगापुर से भारत लाने और ‘पैरेंटल एलियनेशन’ का विवाद
सिंगापुर से अचानक रवानगी: यह अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद एक सॉफ्टवेयर/कॉर्पोरेट पेशेवर परिवार से जुड़ा है। यह बच्चा 2022 तक पुणे में रहा, जिसके बाद पूरा परिवार सिंगापुर शिफ्ट हो गया। मार्च 2025 में, जब पिता एक बिजनेस ट्रिप पर बाहर थे, तब मां बच्चे को लेकर अचानक भारत (पुणे) लौट आई।
पिता की विधिक गुहार: पिता ने ‘गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट’ के तहत पुणे की फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चे को सिंगापुर से गलत तरीके से (Wrongful Removal) हटाया गया है, जबकि वह पिछले ३ वर्षों से वहां के अंतरराष्ट्रीय स्कूल में पढ़ रहा था।
मां के आरोप: मां ने कस्टडी याचिका का विरोध करते हुए पति पर घरेलू हिंसा, भावनात्मक शोषण और उनके घर की मेड (Maid) के साथ अवैध संबंधों के आरोप लगाए।
कोर्ट का कड़ा रुख: पति को सात पीढ़ियों का दुश्मन मानती है महिला
जज गणेश घुले ने दोनों पक्षों की काउंसिलिंग और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों को देखने के बाद मां के व्यवहार और बच्चे की मानसिक स्थिति पर बेहद सख्त टिप्पणियां कीं:
वैवाहिक और पारिवारिक मूल्यों का अभाव
अदालत ने कहा कि एक पत्नी के रूप में अपने पति के प्रति पवित्र कर्तव्य, घर का पालन-पोषण करना, सम्मान बनाए रखना, पारंपरिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भावनात्मक सहयोग देना और दयालुता से बात करना—ऐसा लगता है कि ये सारे शब्द महिला के लिए “विदेशी शब्द” (Foreign Terms) हैं। कोर्ट ने जोड़ा कि विवाह के वचनों को निभाना, अपने पति की शारीरिक और भावनात्मक देखभाल करना और हर चीज में उसका भला चाहना एक सामान्य अपेक्षा होती है। हालांकि, उसने अपने पति और उसके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वे उसके सात पीढ़ियों पुराने दुश्मन (Seven Generation Enemy) हों। ऐसी महिला की संगति में बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं है।”
10 साल के बच्चे का ‘मौत’ पर लिखना चिंताजनक
कोर्ट ने इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की कि रिकॉर्ड के अनुसार इस 10 वर्षीय मासूम बच्चे ने ‘मौत’ (Death) को लेकर कुछ गाने/शब्दावली लिखी थी। न्यायाधीश ने कहा, “हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि 10 साल का एक बच्चा कथित तौर पर मौत के बारे में लिख रहा है। यह दर्शाता है कि बच्चा अत्यधिक मानसिक तनाव (Emotional Distress) से गुजर रहा है और उसे तुरंत मां के माहौल से दूर करने की जरूरत है।”
बच्चे को पिता के खिलाफ ‘हथियार’ बनाना
अदालत ने पाया कि मां लगातार बच्चे के दिमाग में पिता के प्रति जहर घोल रही थी (Parental Alienation) और उसने पिता को बच्चे से मिलने देने के हर रास्ते को बाधित किया। कोर्ट ने सचेत किया कि यदि बच्चा मां के पास रहा, तो वह उसे पिता के खिलाफ एक कानूनी ‘टूल’ (हथियार) की तरह इस्तेमाल करेगी, जिससे पिता-पुत्र का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
‘मदर ही एकमात्र केयरगिवर’ वाली रूढ़िवादिता को तोड़ना जरूरी
अदालत ने माना कि हालांकि बच्चे को ननिहाल में प्यार मिल रहा है, लेकिन बच्चे के सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए पिता कहीं बेहतर स्थिति में हैं। पिता सिंगापुर में एक वरिष्ठ नेतृत्व पद (Senior Leadership Position) पर हैं, उनकी आय स्थिर है, अच्छा आवास है और वहां बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अदालत ने ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा, यह एक ऐसा उपयुक्त मामला है जहां हमें इस अलिखित धारणा को तोड़ने की आवश्यकता है कि मां ही एकमात्र ‘स्वाभाविक देखभालकर्ता’ होती है, जबकि पिता केवल वित्तीय जरूरतें पूरी करने वाला माध्यम है।
‘अंतरराष्ट्रीय अदालती शिष्टाचार’ (Comity of Courts) का सम्मान
पुणे कोर्ट ने इस बात को भी रेखांकित किया कि सिंगापुर की फैमिली जस्टिस कोर्ट (Singapore Family Justice Court) ने पहले ही बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपने का आदेश जारी किया था, जिसे मां ने चुनौती नहीं दी थी। इसलिए, वैश्विक न्यायिक शिष्टाचार के सिद्धांतों के तहत उस आदेश का सम्मान किया जाना अनिवार्य है।
केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Overview)
| कानूनी बिंदु / श्रेणियां | पुणे फैमिली कोर्ट की विधिक कार्यवाही (2026) |
| संबंधित अदालत | फैमिली कोर्ट, पुणे (महाराष्ट्र) |
| माननीय न्यायाधीश | जज गणेश घुले |
| मुख्य विधिक अधिनियम | गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट (Guardians and Wards Act) |
| पिता की प्रोफाइल | सिंगापुर में सीनियर लीडरशिप पद, स्थिर आय और अंतरराष्ट्रीय संसाधन। |
| कोर्ट का अंतिम आदेश | मां की दलीलें खारिज; 10 वर्षीय बेटे की अंतरिम कस्टडी तुरंत पिता को सौंपने का निर्देश। |

