Thursday, June 25, 2026
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Kannada textbook: कक्षा 6 की NCERT पाठ्यपुस्तक पर सवाल…नाम कृष्णा रखने और शाकाहारी दृष्टिकोण थोपने का क्यों लगा आरोप, यहां जानिए

Kannada textbook: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार की गई कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर कर्नाटक में एक नया विधिक और शैक्षणिक विवाद खड़ा हो गया है।

पाठ्यक्रम का ‘भगवाकरण’ करने का आरोप

शिक्षा क्षेत्र के संगठन ‘पीपुल्स एलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन’ (PAFRE) के प्रधान संयोजक निरंजनाराध्य वी.पी. ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पाठ्यपुस्तक को वापस लेने और इसके नाम को बदलने की मांग की है। कर्नाटक के एक प्रमुख शिक्षा अधिकार संगठन ने एनसीईआरटी पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के ढांचे के तहत पाठ्यक्रम का ‘भगवाकरण’ (Saffronisation) करने और राज्य की विविध सांस्कृतिक व भाषाई पहचान को हाशिए पर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है।

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पहला विवाद: किताब का नाम ‘कृष्णा’ रखने पर आपत्ति

संगठन ने सबसे बड़ा सवाल पाठ्यपुस्तक के शीर्षक (Title) पर उठाया है। एनसीईआरटी ने कक्षा 6 की इस कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम ‘कृष्णा’ (Krishna) रखा है।

समूह का तर्क: PAFRE का कहना है कि कर्नाटक की सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक पहचान आदिकवि पंपा, राष्ट्रकवि कुवेम्पू, कोटा शिवराम कारंत और समाज सुधारक बसवेश्वर (बसवन्ना) जैसे महान विचारकों के धर्मनिरपेक्ष और मानवीय विचारों में निहित है।

सांस्कृतिक अनदेखी: समूह ने सवाल किया कि इन महान स्थानीय विभूतियों और कर्नाटक की ऐतिहासिक विरासत को नजरअंदाज करके पाठ्यपुस्तक का नाम पौराणिक या धार्मिक संदर्भ (कृष्णा) पर रखने के पीछे क्या विधिक और तार्किक औचित्य है? संगठन के अनुसार, यह स्कूली शिक्षा में धार्मिक और पौराणिक विषयों को थोपने की एक सोची-समझी कोशिश है।

दूसरा विवाद: खाने की थाली पर ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ और भेदभाव का आरोप

पाठ्यपुस्तक के भीतर पोषण (Nutrition) और संतुलित आहार (Balanced Diet) से जुड़े एक अध्याय को लेकर भी तीखी विधिक व सामाजिक आपत्ति जताई गई है।

केवल शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता: समूह का आरोप है कि संतुलित आहार को दर्शाने वाले पाठ में जो थाली (Plate) दिखाई गई है, उसमें केवल रागी मुद्दे (Ragi Mudde), रोटी, चावल, सब्जियां, दूध और फल शामिल हैं। इस पूरी थाली से अंडे, मछली और मांस को पूरी तरह गायब कर दिया गया है।

भोजन संस्कृति का संकीर्ण प्रतिनिधित्व: PAFRE ने इसे कर्नाटक की वास्तविक खान-पान संस्कृति का बेहद संकीर्ण और पक्षपातपूर्ण प्रदर्शन बताया है। संगठन ने सरकार से तीखा सवाल पूछा, “क्या कर्नाटक का प्रतिनिधित्व केवल रागी मुद्दे और बासारू (एक पारंपरिक दाल की कढ़ी) से ही होता है? क्या कर्नाटक के वे करोड़ों नागरिक जो सूअर का मांस (Pork Curry), मछली (Fish Curry) और कीमा बॉल्स खाते हैं, वे कन्नड़ भाषी (कन्नडिगा) नहीं हैं? बच्चों की खाने की थाली पर इस तरह की राजनीति लाना शिक्षा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आतंकवाद है।”

पूर्वाग्रह का आरोप: समूह का दावा है कि गैर-शाकाहारी आदतों को हीन या हाशिए पर दिखाकर केवल शाकाहारी भोजन को ही ‘संतुलित आहार का एकमात्र पैमाना’ बताने की कोशिश की जा रही है, जो वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से गलत है।

तीसरा विवाद: क्षेत्रीय विविधता और स्थानीय संस्थाओं (DSERT) को दरकिनार करना

संगठन ने पाठ्यपुस्तक के निर्माण की विधिक प्रक्रिया और उसकी सामग्री में क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर भी घेरा है।

क्षेत्रीय विविधता की कमी: आरोप है कि इस पुस्तक में तटीय कर्नाटक (Coastal Karnataka), उत्तर कर्नाटक, मलनाड और पुराने मैसूर क्षेत्र के लोक-साहित्य (Folklore), जीवंत जीवनशैली और विविध संस्कृति को कोई खास जगह नहीं दी गई है।

राज्य की संस्था की अनदेखी: PAFRE ने विधिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस पाठ्यपुस्तक को विकसित करने की प्रक्रिया से कर्नाटक के अपने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण विभाग (DSERT) को पूरी तरह बाहर क्यों रखा गया? शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए राज्य की विधिक संस्थाओं को दरकिनार करना संघीय ढांचे के खिलाफ है।

विवाद मैट्रिक्स और प्रमुख मांगें (Controversy Overview)

विवाद के मुख्य बिंदुसंगठन (PAFRE) के आरोप और तर्कसमूह की विधिक व प्रशासनिक मांगें
किताब का शीर्षक‘कृष्णा’ नाम रखना कर्नाटक के कवियों (पंपा, कुवेम्पू) और बसवन्ना की सांस्कृतिक विरासत की अनदेखी है।एनसीईआरटी लिखित में स्पष्टीकरण दे और पुस्तक का नाम बदलकर कर्नाटक की पहचान के अनुरूप रखे।
संतुलित आहार का पाठअंडे, मांस और मछली को हटाकर केवल शाकाहारी भोजन को ‘संतुलित’ दिखाना भोजन संस्कृति से पक्षपात है।अध्याय में तुरंत संशोधन कर अंडे, मछली और मांस के वैज्ञानिक संदर्भों को शामिल किया जाए।
पाठ्यचर्या का विकासकर्नाटक के शिक्षा विभाग (DSERT) को पुस्तक निर्माण की प्रक्रिया से दूर रखा गया।सीबीएसई (CBSE) चालू शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 के पाठ्यक्रम से इस विवादित पुस्तक को तुरंत वापस (Withdraw) ले।
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