Adani Group: भारतीय उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को औपचारिक रूप से खारिज (Dismiss) करने का आग्रह किया है।
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत में चल रहा मामला
अडानी के मुख्य वकील रॉबर्ट गिउफ्रा (Robert Giuffra) ने ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत के न्यायाधीश निकोलस गाराउफिस (Judge Nicholas Garaufis) को एक पत्र भेजकर मामले को पूरी तरह बंद करने की विधिक औपचारिकताएं पूरी करने की अपील की। यह कदम तब उठाया गया है जब पिछले महीने अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अपने ‘अभियोजकीय विवेक’ (Prosecutorial Discretion) का इस्तेमाल करते हुए इस मुकदमे को आगे न बढ़ाने का फैसला किया था।
क्या था मामला और वकीलों की विधिक दलील?
2024 का आरोप: नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में एक विशाल सौर ऊर्जा परियोजना (Solar Project) का ठेका हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की सहमति जताई थी और अमेरिकी निवेशकों को कंपनी के भ्रष्टाचार-विरोधी नियमों को लेकर गुमराह किया था।
क्षेत्राधिकार की चुनौती: अडानी के वकीलों ने अदालत को बताया कि यह मामला पूरी तरह अमेरिकी विधिक सीमाओं के बाहर (Extraterritorial Jurisdiction) का है। उन्होंने तर्क दिया कि कथित घटनाक्रम पूरी तरह भारत में हुआ, इसमें कोई अमेरिकी नागरिक या एक्सचेंज सीधे शामिल नहीं था और अमेरिकी अभियोजक भारत में रिश्वतखोरी के इन दावों को साबित करने में असमर्थ रहेंगे।
राजनीतिक व प्रशासनिक बदलाव: अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए अमेरिकी प्रशासन (ट्रंप प्रशासन) के कार्यभार संभालने के बाद विदेशी रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों को लेकर प्रवर्तन प्राथमिकताओं में बदलाव आया है, जिसके बाद न्याय विभाग ने इस केस में और संसाधन न लगाने का फैसला किया।
सिविल और प्रतिबंध मामलों में वित्तीय समझौता (Settlements)
आपराधिक मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया के समानांतर, अडानी समूह ने अमेरिकी विनियामकों के साथ नागरिक (Civil) और प्रतिबंध संबंधी विवादों को सुलझाने के लिए वित्तीय समझौतों पर सहमति जताई है, हालांकि इसमें उन्होंने किसी भी तरह की विधिक गड़बड़ी या अपराध को स्वीकार नहीं किया है।
SEC सिविल समझौता: अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) के साथ हुए समझौते के तहत गौतम अडानी 6 मिलियन डॉलर (लगभग ₹57 करोड़) और उनके भतीजे सागर अडानी 12 मिलियन डॉलर (लगभग ₹115 करोड़) का नागरिक जुर्माना (Civil Penalty) देने पर सहमत हुए हैं।
प्रतिबंध उल्लंघन (Iran Sanctions): इसके अलावा, समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े एक पुराने मामले को रफा-दफा करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) को 275 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,630 करोड़) का भुगतान करने पर सहमति दी है।
केस मैट्रिक्स और विधिक अपडेट (Adani US Case Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) एवं कोर्ट की वर्तमान स्थिति (2026) |
| संबंधित अदालत | यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क |
| मामले की सुनवाई कर रहे जज | न्यायाधीश निकोलस गाराउफिस (Nicholas Garaufis) |
| आपराधिक मामले की स्थिति | अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने केस को ‘विथ प्रिज्युडिस’ (With Prejudice) यानी हमेशा के लिए बंद करने का प्रस्ताव दिया है (ताकि इसे दोबारा न खोला जा सके)। |
| सिविल जुर्माना (SEC) | कुल $18 मिलियन ($6 मिलियन गौतम अडानी + $12 मिलियन सागर अडानी द्वारा देय)। |
| प्रतिबंध समझौता (OFAC) | अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा $275 मिलियन का भुगतान। |
| अडानी समूह का आधिकारिक स्टैंड | आरोपों को शुरू से ‘निराधार’ बताया; बिना किसी अपराध को स्वीकार या अस्वीकार किए (Without Admitting or Denying) सिविल समझौता किया। |

