RG Kar Medical College: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में साल 2024 में हुए ट्रेनी डॉक्टर के वीभत्स बलात्कार और हत्या मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
मामले के पीछे की बड़ी साजिश नहीं हो रहा बेनकाब
हाईकोर्ट के जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत ने पूर्व जांच अधिकारी को हटाकर जिस विशेष जांच दल (SIT) को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसे इस मामले को इसके तार्किक निष्कर्ष (Logical Conclusion) तक तत्काल पहुंचाना चाहिए था। अदालत ने इस मामले के पीछे की बड़ी साजिश (Conspiracy Angle) की जांच में सीबीआई द्वारा की गई प्रगति पर गंभीर असंतोष और नाराजगी व्यक्त की है।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख: हम सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं
अदालत के 21 मई के निर्देश के अनुपालन में सीबीआई ने गुरुवार (25 जून 2026) को मामले की प्रगति को लेकर एक स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) अदालत के समक्ष पेश की थी, जिसे जजों ने नाकाफी माना।
लंबे समय से जारी है जांच: खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “हम हमारे समक्ष दायर की गई इस रिपोर्ट से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।” अदालत ने रेखांकित किया कि इस बड़ी साजिश को लेकर जांच अक्टूबर 2024 से लगातार चल रही है और न्यायालय यह उम्मीद करता है कि “इस जांच को तत्काल अंतिम रूप (Final Shape) दिया जाना चाहिए।”
सील्ड कवर में मांगे सबूत: हाई कोर्ट ने सीबीआई को कड़ा निर्देश दिया है कि वे अब तक की जांच में एकत्र की गई सभी सामग्रियों, बयानों और विधिक सबूतों को अगली सुनवाई की तारीख पर सील्ड कवर (बंद लिफाफे) में सीधे अदालत के सामने पेश करें।
पूछताछ को बताया नाकाफी: अदालत ने नोट किया कि हालांकि पिछले आदेश के बाद कुछ लोगों से पूछताछ की गई है, लेकिन अदालत के विधिक दृष्टिकोण से यह प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।
पीड़िता के माता-पिता की गुहार: सबूत मिटाने का संगीन आरोप
आरजी कर मामले में यह विशिष्ट विधिक मोड़ तब आया जब पीड़िता के माता-पिता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
क्या था आरोप? माता-पिता का संगीन आरोप है कि 9 अगस्त 2024 की उस काली रात को जब उनकी बेटी के साथ यह दरिंदगी हुई, उसके तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय तंत्र द्वारा सबूतों को बड़े पैमाने पर नष्ट (Destruction of Evidence) किया गया।
मामले को दबाने की कोशिश: याचिका में दावा किया गया कि घटना के तत्काल बाद मामले को दबाने और इसे आत्महत्या या सामान्य रूप देने की कोशिशें की गईं, जिसमें कई रसूखदार लोग शामिल थे।
SIT का गठन: इसी शिकायत पर गंभीरता दिखाते हुए हाई कोर्ट ने 21 मई को सीबीआई के ‘जॉइंट डायरेक्टर (ईस्ट)’ की अध्यक्षता में एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस सिट को उस रात ट्रेनी डॉक्टर के डिनर करने से लेकर उसके अंतिम संस्कार (Cremation) तक के पूरे घटनाक्रम की कड़ियों और साजिश की गहराई से जांच करने का जिम्मा सौंपा गया था।
केस मैट्रिक्स और आगामी विधिक एजेंडा (Case Timeline)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | कलकत्ता उच्च न्यायालय की विधिक कार्यवाही (25 जून 2026) |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष (खंडपीठ) |
| जांच एजेंसी | केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) – 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) |
| मुख्य विधिक प्रश्न | क्या ट्रेनी डॉक्टर की हत्या और उसके बाद सबूत मिटाने के पीछे कोई बड़ी संगठित साजिश (Conspiracy) थी? |
| अदालत का अंतरिम निर्देश | सीबीआई अगली सुनवाई पर केस डायरी (Case Diary) और सभी विधिक सामग्रियां सील्ड कवर में पेश करे। |
| अगली सुनवाई की तिथि | 6 अगस्त 2026 |

