केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) |
| संबंधित कानून | BNS धारा 91 (बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद मृत्यु का कारण बनने का कृत्य) व अन्य धाराएं |
| मुख्य विवाद | लिंग परीक्षण (PCPNDT) का दबाव, गर्भवती पत्नी से मारपीट और शराब के नशे में घरेलू हिंसा |
| अदालत का रुख | जांच पूरी होने और 3 महीने की हिरासत के बाद जमानत मंजूर; शराब छोड़ने व पत्नी को मायके में रहने की स्वतंत्रता का आदेश। |
Liquor Habit: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन महीने की गर्भवती पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट करने और कथित तौर पर भ्रूण लिंग परीक्षण (Sex Determination Test) कराने का दबाव बनाने के आरोपी पति को नियमित जमानत (Regular Bail) दे दी है।
न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने 3 अगस्त 2026 के अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि यदि पत्नी चाहे, तो वह बच्चे के जन्म और पूरी तरह स्वस्थ होने तक अपने मायके में रहने के लिए स्वतंत्र है। जमानत देते हुए अदालत ने पति को शराब की लत छोड़ने और अपने पारिवारिक दायित्वों को ईमानदारी से निभाने की कड़ी हिदायत दी है।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- शराब की लत और पारिवारिक सुधार का निर्देश:“परिवार के व्यापक हित में यह बेहतर होगा कि याचिकाकर्ता (पति) अपनी शराब पीने की आदत पर काबू पाने के लिए ईमानदार प्रयास करे और अपनी वृद्ध मां व परिवार की जिम्मेदारियों का उचित ध्यान रखे।”
- गर्भवती पत्नी की सुरक्षा व सुविधा: अदालत ने कहा कि यह टिप्पणी इसलिए की जा रही है ताकि इस संवेदनशील अवधि के दौरान वैवाहिक घर में शिकायतकर्ता पत्नी के लिए कोई अप्रिय स्थिति या असुविधा पैदा न हो।
मामला क्या था? (Case Background)
- घटना और गंभीर आरोप
- दंपति का विवाह मई 2019 में हुआ था और उनकी 5.5 वर्ष तथा 2 वर्ष की दो बेटियां हैं।
- अप्रैल 2026 की घटना के अनुसार, पत्नी जब तीन महीने की गर्भवती थी, तब पति ने शराब के नशे में उससे विवाद किया। पहले से दो बेटियां होने के कारण पति तीसरी बेटी नहीं चाहता था और उसने पत्नी पर अवैध रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण (Ultrasound Sex Determination) कराने का दबाव बनाया।
- पत्नी के इनकार करने पर आरोपी पति ने उसके बाल खींचे, सिर दीवार से मारा, लात-घूंसों से पीटा और सब्जी काटने वाले चाकू से हमला कर दिया। मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर 11 चोटों के निशान पाए गए, हालांकि वे सभी सामान्य प्रकृति (Simple Injuries) की थीं।
- दोनों पक्षों की दलीलें
- पति के वकील (इम्पिंदर सिंह धालीवाल): उन्होंने दलील दी कि घटना के 5 दिन बाद एफआईआर दर्ज कराई गई (20 अप्रैल), जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया। चोटें गंभीर प्रकृति की नहीं थीं और आरोपी 21 अप्रैल से हिरासत में है।
- राज्य सरकार (State Counsel): जमानत का कड़ा विरोध करते हुए राज्य के वकील ने कहा कि पति ने जन्म पूर्व लिंग परीक्षण कराने से मना करने पर गर्भवती पत्नी पर जानलेवा हमला किया, ताकि बच्चे को जीवित पैदा होने से रोका जा सके। यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 91 के तहत एक गंभीर और क्रूर अपराध है।
⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
हाई कोर्ट ने पाया कि यह मामला वैवाहिक विवाद से उपजा है। हालांकि आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपी पिछले 3 महीनों (21 अप्रैल से) से जेल में बंद है, पुलिस जांच (Investigation) पूरी हो चुकी है और चालान पेश हो चुका है। विचारण (Trial) पूरा होने में समय लगेगा, इसलिए उसे अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं होगा।
अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित शर्तों के साथ जमानत दे दी।
- वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को डराएगा या प्रभावित नहीं करेगा।
- वह शराब की आदत छोड़ने का प्रयास करेगा।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश की टिप्पणियों का प्रभाव मुख्य केस के ट्रायल (Trial) पर नहीं पड़ेगा और निचली अदालत सबूतों के आधार पर स्वतंत्र फैसला लेगी।

