Tuesday, September 29, 2026
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UPSC Success Story: महज 1 नंबर से फेल हुईं, लेकिन हार नहीं मानी…जानिए कैसे अगले ही साल मृदुपाणि नम्बी ने हासिल की AIR 21

UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में AIR 21 रैंक लानेवाली मृदुपाणि नम्बी की कहानी सभी को जरूर पढ़कर प्रेरणा लेनी चाहिए।

इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा (ESE) को किया पास

वर्ष 2020 में मृदुपाणि अपने लक्ष्य से सिर्फ एक नंबर दूर रह गई थीं। प्रीलिम्स (प्रारंभिक परीक्षा) में महज 1 अंक से पिछड़ जाना किसी भी अभ्यर्थी को तोड़ सकता है, लेकिन मृदुपाणि ने इस निराशा को अपनी ताकत बनाया और अगले ही प्रयास में देश के शीर्ष इंजीनियरों की सूची में अपना नाम दर्ज करा दिया।
सफलता और विफलता के बीच कभी-कभी केवल एक अंक का फासला होता है। लेकिन वह एक नंबर आपकी काबिलियत तय नहीं करता, बल्कि यह तय करता है कि आप अपनी अगली कोशिश के लिए कितने तैयार हैं।” संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा (ESE), जिसे भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) भी कहा जाता है, में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 21 हासिल करने वाली मृदुपाणि नम्बी (Mridupani Nambi) की कहानी इसी जज्बे को बयां करती है।

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शुरुआती सफर और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड

मृदुपाणि नम्बी मूल रूप से हैदराबाद की रहने वाली हैं और उनकी स्कूली शिक्षा भी यहीं से पूरी हुई। वे बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज थीं और स्कूल के दिनों से ही उनकी रुचि तकनीक और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बढ़ने लगी थी।

IIT-JEE की तैयारी: कक्षा 12वीं पास करने के बाद, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से इंजीनियरिंग करने के सपने के साथ IIT-JEE की तैयारी शुरू की।

बीटेक की डिग्री: बाद में उन्होंने जी. नारायणम्मा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने अपना बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (BTech) पूरा किया। कॉलेज के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे प्राइवेट जॉब के बजाय देश के तकनीकी विकास में सीधे योगदान देना चाहती हैं।

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साल 2020: एक नंबर का वो दर्दनाक झटका

इंजीनियरिंग स्नातक होने के बाद, मृदुपाणि ने किसी निजी कंपनी में नौकरी करने के बजाय सीधे यूपीएससी ईएसई (UPSC ESE) की तैयारी करने का एक बड़ा और कठिन फैसला लिया। यह परीक्षा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।

पहला प्रयास (2020): मृदुपाणि ने साल 2020 में पहली बार इस परीक्षा में भाग लिया। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब परिणाम आया, तो वह हैरान रह गईं। वह कट-ऑफ से महज 1 नंबर कम होने के कारण प्रीलिम्स स्टेज को पार नहीं कर सकीं।

निराशा को बनाया सीढ़ी: इतने कम अंतर से फेल होना किसी बड़े अंतर से फेल होने से कहीं ज्यादा मानसिक दर्द देता है। कुछ समय के लिए वे काफी निराश हुईं, लेकिन उन्होंने जल्द ही खुद को संभाला। उन्होंने अपनी विफलता को अंत मानने के बजाय इसे अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ने का एक बेहतरीन मौका माना।

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रणनीति में बदलाव: सोशल मीडिया से दूरी और मॉक टेस्ट पर फोकस

मृदुपाणि को समझ आ गया था कि उनकी तैयारी में कोई बड़ी कमी नहीं थी, बल्कि कुछ छोटी-छोटी तकनीकी और रणनीतिक कमियां थीं जिन्हें दूर करना जरूरी था। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास के लिए अपनी जीवनशैली और पढ़ाई के तरीकों में बड़े बदलाव किए।

डिजिटल डिटॉक्स (Distractions से दूरी): उन्होंने सबसे पहले अपने स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूरी बना ली। इससे उनका काफी समय बचा और वे बिना किसी भटकाव के पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकीं।

सघन रिवीजन (Rigorous Revision): शून्य से शुरुआत करने के बजाय, उन्होंने उन विषयों और टॉपिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया जहां पिछले प्रयास में उनसे चूक हुई थी।

टाइम मैनेजमेंट और मॉक टेस्ट: परीक्षा हॉल के दबाव को संभालने के लिए उन्होंने लगातार मॉक टेस्ट (Mock Tests) दिए और समय प्रबंधन (Time Management) को सुधारा ताकि सिली मिस्टेक्स (छोटी गलतियों) के कारण नंबर न कटें।

दूसरे प्रयास में ऐतिहासिक सफलता: बनीं क्लास-1 अधिकारी

मृदुपाणि की अनुशासित मेहनत और नई रणनीति रंग लाई। जब अगले साल यूपीएससी ने इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा के अंतिम परिणाम घोषित किए, तो मृदुपाणि ने ऑल इंडिया रैंक 21 (AIR 21) हासिल की थी।

एक साल पहले जो लड़की महज 1 नंबर से प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थी, वह अब भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) की एक राजपत्रित (Gazetted) अधिकारी बन चुकी थीं। उनके इस सफर ने साबित कर दिया कि असफलताएं कभी स्थायी नहीं होतीं।

सफलता का सफरनामा: मृदुपाणि नम्बी (Profile at a Glance)

श्रेणियांमुख्य विवरण
नाममृदुपाणि नम्बी (Mridupani Nambi)
गृहनगरहैदराबाद (Hyderabad)
शैक्षणिक योग्यताबीटेक (BTech), जी. नारायणम्मा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस
परीक्षाUPSC इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जामिनेशन (ESE / IES)
2020 का परिणामकेवल 1 नंबर से प्रीलिम्स क्वालिफाई करने से चूकीं।
अगला प्रयास (परिणाम)ऑल इंडिया रैंक 21 (AIR 21)
सफलता का मूलमंत्रडिजिटल डिटॉक्स, गलतियों से सीखना, मॉक टेस्ट और लगातार रिवीजन।
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