Tuesday, August 18, 2026
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Dilatory Tactics: अदालती कार्यवाही में उपस्थिति का झूठा दावा करने पर किस वकील पर लगा ₹2,500 का जुर्माना…सिविल केस पर यह दिया ऑर्डर

Dilatory Tactics: एक सिविल मुकदमे में सुनवाई के दौरान निचली अदालत में पेश होने का झूठा दावा करने और फिर हाई कोर्ट में कहानी बदलने पर 77 वर्षीय बुजुर्ग वकील पर जुर्माना ठोक दिया है।

दिव्यप्रकाश बनाम बृजेश कुमार और अन्य मामले में सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दिव्यप्रकाश बनाम बृजेश कुमार और अन्य मामले में सुनवाई करते हुए निचली अदालत (Trial Court) के उस आदेश को पूरी तरह सही ठहराया, जिसमें सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के जरिए वकील के झूठ को पकड़ा गया था। अदालत ने कहा, अदालत में आने वाले हर पक्षकार से यह उम्मीद की जाती है कि वह ‘साफ हाथों’ (Clean Hands) के साथ आए और सभी तथ्यों को पूरी सच्चाई व ईमानदारी से रिकॉर्ड पर रखे। कानूनी दांव-पेंच खेलकर मुकदमे को लटकाने (Dilatory Tactics) और विरोधाभासी बयान देकर फायदा उठाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मामला क्या है?: कोर्ट रूम से गायब, लेकिन हाजिरी का दावा!

यह मामला एक दीवानी मुकदमे (Civil Suit) से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता (जो खुद पेशे से एक वकील हैं) प्रतिवादी (Defendant) थे।

एकतरफा कार्रवाई (Ex-Parte Proceeding): अप्रैल माह में याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट की सुनवाइयों में हाजिर नहीं हुए। कोर्ट ने इसे मुकदमे को लटकाने की कोशिश मानते हुए 13 अप्रैल को उनके खिलाफ ‘एकतरफा कार्रवाई’ (Ex-Parte) करने का आदेश जारी कर दिया।

ट्रायल कोर्ट में दलील (CCTV ने खोला पोल): इस आदेश को रद्द कराने के लिए वकील ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 9 नियम 7 के तहत आवेदन दिया। उन्होंने दावा किया कि वह 13 अप्रैल को कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन प्रक्रियात्मक ज्ञान न होने के कारण ऑर्डर शीट पर दस्तखत नहीं कर पाए। हालांकि, जब जज ने कोर्ट परिसर के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे की फुटेज चेक की, तो वकील साहब कहीं नजर नहीं आए। कोर्ट ने 4 मई को उनकी अर्जी खारिज कर दी।

हाई कोर्ट का रुख: वकील कानून का जानकार है, अनपढ़ नहीं

ट्रायल कोर्ट से झटका लगने के बाद जब बुजुर्ग वकील ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया, तो उन्होंने अपनी दलील ही बदल दी। हाई कोर्ट ने उनके इस आचरण को गंभीरता से लिया:

विरोधाभासी बयान (Inconsistent Stands)

वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि वह एक सीनियर सिटीजन हैं और बुढ़ापे व अचानक बिगड़े स्वास्थ्य (Medical Issues) के कारण निचली अदालत में पेश नहीं हो सके थे। हाई कोर्ट ने नोट किया कि ट्रायल कोर्ट में उन्होंने खुद के ‘हाजिर होने’ का दावा किया था और हाई कोर्ट में ‘बीमारी के कारण गैरहाजिर’ होने की बात कह रहे हैं। एक ही मामले में दो अलग-अलग कहानियां गढ़ने पर कोर्ट ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

‘सच्चे इरादे’ (Good Cause) साबित करने में विफल

जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि अदालतें आमतौर पर एक्स-पार्टी ऑर्डर को रद्द करने के मामलों में उदार रुख (Lenient Approach) अपनाती हैं, लेकिन यह राहत केवल उन्हें मिलती है जो कोर्ट के साथ ईमानदारी बरतते हैं। याचिकाकर्ता ने न तो अपनी अनुपस्थिति का कोई ठोस कारण (Good Cause) बताया और न ही वे ‘साफ हाथों’ के साथ कोर्ट आए।

आचरण के आधार पर भारी जुर्माना

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता खुद एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं, इसलिए वे कानून की सभी बारीकियों और आवश्यकताओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्हें कानून की समझ न रखने वाला कोई अनपढ़ व्यक्ति नहीं माना जा सकता। विरोधाभासी बयान देकर अनुचित लाभ उठाने के इस आचरण के लिए उन पर कॉस्ट (Penalty) लगाई जानी चाहिए।

अदालत का अंतिम आदेश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन पर ₹2,500 का जुर्माना (Costs) लगाया। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि वकील को यह जुर्माना राशि 7 दिनों के भीतर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इंदौर के पास जमा करानी होगी।

केस मैट्रिक्स: म.प्र. हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रक्रियात्मक श्रेणियांमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ
माननीय न्यायाधीशजस्टिस संदीप एन. भट्ट (एकल पीठ)
केस संदर्भदिव्यप्रकाश बनाम बृजेश कुमार और अन्य (Divyaprakash v. Brijesh Kumar)
प्रासंगिक कानून / धारासिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का आदेश 9 नियम 7 (Order 9 Rule 7 CPC)
याचिकाकर्ता का पेशाप्रैक्टिसिंग एडवोकेट (उम्र 77 वर्ष)
मुख्य वैज्ञानिक साक्ष्यट्रायल कोर्ट का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, जिसमें उपस्थिति का दावा झूठा साबित हुआ।
अदालत का अंतिम निर्णययाचिका खारिज; ₹2,500 का जुर्माना इंदौर बार एसोसिएशन में जमा करने का आदेश।
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