Tuesday, August 18, 2026
HomeLaworder HindiElection Petition: पंचायत चुनाव विवादों का फैसला सिविल जज करेंगे, न कि...

Election Petition: पंचायत चुनाव विवादों का फैसला सिविल जज करेंगे, न कि सिक्किम पंचायत अधिनियम के तहत निर्धारित प्राधिकारी…यह केस पढ़ें

Election Petition: पंचायत चुनाव से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विधिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए सिक्किम हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

तुलसी दास सुब्बा बनाम मन बीर सुब्बा व अन्य मामले में सुनवाई

हाईकोर्ट के जस्टिस भास्कर राज प्रधान की एकल पीठ ने तुलसी दास सुब्बा बनाम मन बीर सुब्बा व अन्य मामले में सुनवाई करते हुए सिविल जज और पंचायत निदेशक दोनों के पुराने आदेशों को त्रुटिपूर्ण माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय की अयोग्यता को तय करने का क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं, बल्कि न्यायिक अदालत के पास है।

यह रही अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा, यदि कोई विवाद इस बात को लेकर है कि कोई उम्मीदवार चुनाव लड़ने के समय अयोग्य (Disqualified) था या नहीं, तो इसका फैसला केवल चुनाव याचिका (Election Petition) के जरिए सिविल जज (Civil Judge) ही कर सकते हैं। इसके विपरीत, ‘निर्धारित प्राधिकारी’ (Prescribed Authority) की भूमिका केवल तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति सफलतापूर्वक चुनाव जीतकर पंचायत सदस्य बन जाता है और अपने कार्यकाल के दौरान अयोग्यता का शिकार होता है।

मामला क्या है?: ठेकेदारी के विवाद में उलझा चुनाव

यह कानूनी विवाद ग्राम पंचायत चुनाव के दो उम्मीदवारों के बीच प्रतिद्वंद्विता से पैदा हुआ था।

अयोग्यता का आरोप: पंचायत चुनाव में मन बीर सुब्बा को विजेता घोषित किया गया था। चुनाव हारने वाले उम्मीदवार, तुलसी दास सुब्बा ने सिक्किम पंचायत अधिनियम, 1993 की धारा 119 के तहत सिविल जज के समक्ष एक चुनाव याचिका दायर कर इस जीत को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मन बीर सुब्बा अधिनियम की धारा 16(k) के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे, क्योंकि पंचायत द्वारा दिए गए सरकारी ठेकों (Government Contracts) में उनका व्यावसायिक हित (Interest) शामिल था।

सिविल जज की चूक: इस विधिक सवाल का खुद फैसला करने के बजाय, सिविल जज ने मामले को पंचायत विभाग के निदेशक (Director of Panchayat) के पास भेज दिया, जो इस कानून के तहत ‘निर्धारित प्राधिकारी’ के रूप में काम करते हैं। निदेशक ने जून 2023 में इस पर अपना फैसला भी सुना दिया। तुलसी दास सुब्बा ने सिविल जज द्वारा मामला ट्रांसफर किए जाने और निदेशक के आदेश, दोनों को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट का रुख: प्रशासनिक अधिकारी नहीं सुन सकते चुनाव याचिका

सिक्किम हाई कोर्ट ने सिक्किम पंचायत अधिनियम, 1993 और पंचायत चुनाव नियमों (Rules of 1997) के अध्याय X का बारीकी से विश्लेषण किया। अदालत के मुख्य विधिक निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

सिविल जज का विशेष क्षेत्राधिकार

जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने कानून की सीमाएं तय करते हुए कहा, “चुनाव को चुनौती देने वाले सभी प्रश्नों—जिसमें यह भी शामिल है कि चुना गया उम्मीदवार (Returned Candidate) चुनाव के समय अयोग्य था या नहीं—की जांच अनिवार्य रूप से सिविल जज के समक्ष दायर चुनाव याचिका में ही की जानी चाहिए। ‘निर्धारित प्राधिकारी’ के पास इस संदर्भ (Reference) पर फैसला करने का कोई विधिक अधिकार नहीं था।”

‘निर्धारित प्राधिकारी’ (Prescribed Authority) का सीमित कार्यक्षेत्र

अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 29 और 120 के तहत पंचायत निदेशक (निर्धारित प्राधिकारी) के पास शक्तियां जरूर हैं, लेकिन वे केवल चुनाव के बाद की स्थितियों के लिए हैं। यदि कोई व्यक्ति सदस्य रहते हुए बाद में कानून का उल्लंघन करता है या कोई नया सरकारी ठेका ले लेता है, तब उसे पद से हटाने का अधिकार इस प्राधिकारी को है, न कि चुनाव के समय की पात्रता जांचने का।

कानून के ड्राफ्ट में विसंगति (Drafting Error) को किया रेखांकित

हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते समय अधिनियम की धारा 119A में एक स्पष्ट ड्राफ्टिंग गलती (Inconsistency) की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया। इस धारा में ‘निर्धारित प्राधिकारी’ के आदेशों के खिलाफ अपील का जिक्र है, लेकिन साथ ही धारा 119 का हवाला दिया गया है (जो वास्तव में सिविल जज से संबंधित है)। अदालत ने कहा कि सरकार को इस विधायी त्रुटि को देखना चाहिए और इसमें आवश्यक सुधार करना चाहिए।

अदालत का अंतिम आदेश

सिक्किम उच्च न्यायालय ने माना कि सिविल जज ने गलत तरीके से मामले को प्रशासनिक प्राधिकारी के पास भेजा था। इसलिए, कोर्ट ने निर्धारित प्राधिकारी (पंचायत निदेशक) द्वारा पारित जून 2023 के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के कारण रद्द कर दिया। अदालत ने मुख्य चुनाव विवाद के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की और मामले को वापस सिविल जज के पास भेज दिया ताकि वे खुद कानून के मुताबिक इस पर अंतिम फैसला लें।

केस मैट्रिक्स: सिक्किम हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांसिक्किम उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतसिक्किम उच्च न्यायालय, गंगटोक
माननीय न्यायाधीशजस्टिस भास्कर राज प्रधान (एकल पीठ)
केस संदर्भतुलसी दास सुब्बा बनाम मन बीर सुब्बा व अन्य (Tulshi Das Subba v Man Bir Subba)
लागू कानूनसिक्किम पंचायत अधिनियम, 1993 की धारा 16(k), 29, 119 और 120
मूल विधिक टकरावचुनाव के समय की अयोग्यता का फैसला कोर्ट करेगा या पंचायत विभाग के डायरेक्टर?
याचिकाकर्ता के वकीलएडवोकेट यशवंत कुमार सुब्बा और मुक्कुम हांग लिम्बू
सरकार के प्रतिनिधिअतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) जांगपो शेरपा
अदालत का अंतिम निर्णययाचिका मंजूर; प्राधिकारी का आदेश रद्द, सिविल जज को खुद चुनाव याचिका तय करने का आदेश।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
28 ° C
28 °
28 °
89 %
3.1kmh
97 %
Tue
30 °
Wed
31 °
Thu
35 °
Fri
35 °
Sat
35 °