Monday, August 24, 2026
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Small Hospitals: बिना रजिस्ट्रेशन बंद होंगे छोटे अस्पताल व क्लिनिक…बिहार सरकार ने लागू किए कड़े नियम, लापरवाही से मौत के बाद बड़ा एक्शन

Small Hospitals: पटना हाई कोर्ट के जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने स्पष्ट संदेश दिया कि बिहार में अब गलियों और मोहल्लों में बिना पंजीकरण के चलने वाले छोटे अस्पतालों, स्वतंत्र ओपीडी (OPD) और पैथोलॉजी सेंटरों की मनमानी नहीं चलेगी।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश

पटना हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद बिहार सरकार ने राज्य के हजारों छोटे और मध्यम चिकित्सा संस्थानों को एक मजबूत कानूनी दायरे में लाने के लिए नए नियमों की घोषणा कर दी है। अब जो भी अस्पताल या क्लिनिक इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उसे न केवल भारी जुर्माना भरना होगा, बल्कि उसे नए आपराधिक कानून के तहत सील (Seal) भी कर दिया जाएगा।बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर पटना उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और कानूनी बदलाव हुआ है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई ‘बिहार लघु और मध्यम स्वास्थ्य स्थापना (स्थापना और पंजीकरण) नियमावली, 2026’ के तहत राज्य के चिकित्सा ढांचे को पूरी तरह विनियमित (Regulated) करने की तैयारी कर ली गई है।

क्या हैं नए नियम?: 15 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य

स्वास्थ्य विभाग द्वारा 3 जून 2026 को अधिसूचित (Notified) किए गए इन नियमों के मुख्य बिंदु हैं।

बेड की सीमा: 1 से 40 बेड वाले सभी छोटे और मध्यम अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए इन नियमों के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

पैथियों का दायरा: यह नियम केवल एलोपैथी (Allopathy) पर ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद (Ayurveda) और होम्योपैथी (Homeopathy) सेवाएं देने वाले सभी स्वतंत्र ओपीडी, क्लिनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों (लैब) पर भी समान रूप से लागू होगा।

डेडलाइन: इन सभी चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अधिसूचना जारी होने के 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन (Online Provisional Registration) प्राप्त करना होगा।

कड़ी कानूनी कार्रवाई: यदि कोई भी क्लिनिक या अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चलता हुआ पाया जाता है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत उस संस्थान को तुरंत सील (Sealing) कर दिया जाएगा।

न्यायिक ट्रिगर: भोजपुर में प्रसूता की मौत और हाई कोर्ट का गुस्सा

बिहार सरकार द्वारा उठाए गए इस बड़े कदम के पीछे पटना हाई कोर्ट के जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ का एक ऐतिहासिक निर्देश है। इस कानूनी नियम की शुरुआत एक बेहद दुखद घटना के बाद हुई।

मूल मामला (नवंबर 2025): कोर्ट पिछले साल 24 नवंबर को भोजपुर जिले के एक मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वहां एक दंपति (पति-पत्नी) बिना किसी रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से एक छोटा अस्पताल चला रहे थे। इस तथाकथित अस्पताल में प्रसव (Childbirth) के बाद ब्लड ट्रांसफ्यूजन (गलत खून चढ़ाने या लापरवाही) के कारण एक युवा महिला की मौत हो गई थी।

कोर्ट का सख्त निर्देश: इस घटना पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त करते हुए जस्टिस राजीव रॉय ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिया था कि वह पूरे बिहार में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे ऐसे अवैध क्लिनिकों और छोटे अस्पतालों पर लगाम लगाने के लिए एक ठोस रेगुलेटरी गाइडलाइन (नियामक दिशानिर्देश) तैयार करे।

अदालती सराहना: इस वर्ष 19 जून (2026) को एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के वकील प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को सूचित किया कि सरकार ने नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। इस पर जस्टिस रॉय ने प्रभावी समन्वय के लिए राज्य के वकील प्रशांत प्रताप और लोक अभियोजक (Public Prosecutor) जितेंद्र सिंह के प्रयासों की सराहना की, जिनकी वजह से जन सुरक्षा से जुड़ा यह कानून धरातल पर आ सका।

केस शीट: बिहार स्वास्थ्य स्थापना नियमावली (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांनए नियमों की विधिक स्थिति और मुख्य प्रावधान
संबंधित अदालतपटना उच्च न्यायालय (Patna High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस राजीव रॉय
नए नियमों का नामबिहार लघु और मध्यम स्वास्थ्य स्थापना नियमावली, 2026
अधिसूचना की तिथि3 जून 2026
दायरे में आने वाले संस्थान1 से 40 बेड वाले अस्पताल, स्वतंत्र ओपीडी और डायग्नोस्टिक सेंटर
कार्रवाई का कानूनी आधारभारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जुर्माना और सीलिंग
मुख्य उद्देश्यमरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध चिकित्सा (झोलाछाप डॉक्टरों) पर रोक।
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