Monday, August 24, 2026
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Google News: यूट्यूब से अदालती कार्यवाही की अवैध रिकॉर्डिंग हटाना मुमकिन नहीं…गूगल का दोटूक; हम जज नहीं, जो लाखों वीडियो फिल्टर करें

Google News: ओपन कोर्ट (Open Courts), डिजिटल गोपनीयता और कंटेंट मॉडरेशन की व्यावहारिक सीमाओं के बीच जारी विधिक बहस में टेक दिग्गज गूगल (Google) ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने एक बेहद तकनीकी और दोटूक हलफनामा (Affidavit) दायर किया है।

अवैध रूप से लीक और शेयर किए जा रहे वीडियो को खुद से नहीं रोक सकता

गूगल का कहना है कि वह अपनी तरफ से सक्रिय निगरानी (Proactive Monitoring) करके यूट्यूब पर अदालती कार्यवाहियों के अवैध रूप से लीक और शेयर किए जा रहे वीडियो को खुद से नहीं रोक सकता। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मों को कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) की अवैध रिकॉर्डिंग और री-अपलोडिंग को रोकने का निर्देश देना न केवल कानूनी रूप से अस्थिर है, बल्कि इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना भी असंभव है। यूट्यूब (YouTube) जैसे प्लेटफॉर्म के लिए यह पहचानना नामुमकिन है कि कौन सा वीडियो किसी वास्तविक अदालत की रिकॉर्डिंग है, वह अधिकृत (Authorized) है या नहीं, या वह किसी नियम का उल्लंघन करता है खासकर तब जब भारत के अलग-अलग राज्यों के कोर्ट नियम पूरी तरह भिन्न हैं।

मामला क्या है?: केजरीवाल की अदालती बहस का वीडियो वायरल होने पर छिड़ा विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शराब नीति मामले से जुड़ा है।

विवाद की वजह: आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत के सामने अरविंद केजरीवाल ने खुद अपनी बात (In-person) रखी थी। इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल सुनवाई के तुरंत बाद, अदालती कार्यवाही की अनधिकृत स्क्रीन-रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वायरल हो गई।

अदालत में याचिका: अधिवक्ता वैभव सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि जिन लोगों ने वीडियो अपलोड किए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही, उन्होंने गूगल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भविष्य में ऐसी अदालती रिकॉर्डिंग को ऑनलाइन आने से ‘सक्रिय रूप से रोकने’ (Prevent Recurrence) का निर्देश देने की मांग की थी।

हाई कोर्ट की चिंता: अप्रैल में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि यह न्यायपालिका की गरिमा और संस्थान के व्यापक हित से जुड़ा है, और ऐसी अवैध रिकॉर्डिंग पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।

गूगल की दलीलें: नए डिजिटल दौर में ‘सेफ हार्बर’ और तकनीकी सीमाएं

गूगल ने अदालत के सामने अपनी सीमाओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act की धारा 79) के तहत मिले विधिक संरक्षण (Safe Harbor) का हवाला देते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:

हम टेक प्लेटफॉर्म हैं, मध्यस्थ (Arbiters) या जज नहीं

गूगल ने साफ किया कि भारतीय कानून के तहत मध्यस्थ (Intermediaries) को यूजर्स द्वारा अपलोड किए जा रहे थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए ‘न्यायिक भूमिका’ (Adjudicatory Function) निभाने की उम्मीद नहीं की जा सकती। यूट्यूब यह तय नहीं कर सकता कि कौन सी शिकायत जायज है और कौन सी नहीं; किसी कंटेंट की वैधता या अवैधता का फैसला केवल एक सक्षम अदालत (Competent Court) ही कर सकती है।

सिर्फ विशिष्ट URL पर ही हो सकती है कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले का संदर्भ लेते हुए गूगल ने कहा कि वह कानूनन केवल उन्हीं वीडियो को हटाने या ब्लॉक करने के लिए बाध्य है, जिनके विशिष्ट URL की पहचान कर के अदालत या अधिकृत सरकारी एजेंसी द्वारा हटाने का आदेश दिया गया हो। याचिकाकर्ता ने जिन वीडियो को फ्लैग किया था, उन्हें भारत में पहले ही ब्लॉक या डिलीट किया जा चुका है।

लाखों वीडियो को फिल्टर करना तकनीकी रूप से असंभव

गूगल का तर्क है कि यूट्यूब पर हर मिनट सैकड़ों घंटे के वीडियो अपलोड होते हैं। कंप्यूटर एल्गोरिदम या एआई (AI) के लिए यह पहचानना असंभव है कि कोई वीडियो वास्तव में कोर्ट का लीक वीडियो है, किसी लॉ कॉलेज का ‘मॉक ट्रायल’ है, या किसी राज्य (जैसे गुजरात या कर्नाटक) का वैध लाइव-स्ट्रीम क्लिप है, क्योंकि कई हाई कोर्ट खुद यूट्यूब पर अपनी कार्यवाही लाइव प्रसारित करते हैं।

“स्क्रीन रिकॉर्डिंग यूट्यूब के बाहर (External Tools के जरिए) की जाती है। चूंकि यूट्यूब के पास कोई डिजिटल वॉटरमार्क नहीं होता, इसलिए अपलोड होते समय लाखों वीडियो के बीच से केवल कोर्ट रूम के दृश्यों को छानना (Sift through) और रोकना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है।”

केस शीट: दिल्ली उच्च न्यायालय – टेक इंटरमीडियरी विवाद (2026)

विधिक और तकनीकी श्रेणियांगूगल की स्थिति और विधिक स्टैंड
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
मामले की पृष्ठभूमिअरविंद केजरीवाल की सुनवाई के वायरल वीडियो (शराब नीति केस)
गूगल का मुख्य विधिक कवचआईटी एक्ट (IT Act) की धारा 79 और ‘श्रेया सिंघल’ नजीर
तकनीकी चुनौतीएक्सटर्नल स्क्रीन-रिकॉर्डिंग और प्रोएक्टिव अपलोड फिल्टर की विफलता
कार्रवाई की शर्तअदालत द्वारा विशिष्ट वेब लिंक (Specific URLs) प्रदान किए जाने पर तुरंत ब्लॉक
वर्तमान स्थितिफ्लैग किए गए मूल वीडियो यूट्यूब द्वारा भारत में हटाए जा चुके हैं।
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